अनंत संभावनाओं वाला उभरता क्षेत्र, लाजिस्टिक्स पर जोर से निर्यात को मिलेगी तेजी

उद्योगों तक रेलवे ट्रैक का न होना समस्या को और बढ़ाता है। भारत में लाजिस्टिक्स क्षेत्र में कार्य करने वाली अधिकांश कंपनियां असंगठित क्षेत्र में हैं जहां कुशल श्रमिकों की कमी एवं नवीन तकनीक के कम प्रयोग के कारण भी लागत बढ़ जाती है।

Neel RajputTue, 30 Nov 2021 08:29 AM (IST)
एक देश-एक बाजार की अवधारणा के दायरे में लाजिस्टिक्स क्षेत्र भी आना चाहिए। इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी

सुरजीत सिंह। हाल में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रलय द्वारा जारी लीड्स (लाजिस्टिक्स ईज अक्रास डिफरेंट स्टेट्स) की रिपोर्ट विभिन्न राज्यों में लाजिस्टिक्स क्षेत्र में किए गए कार्यो एवं प्रगति की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करती है। संरचना, सेवा, क्षमता, प्रतिस्पर्धा, सुरक्षा, परिचालन वातावरण, विनियामक प्रक्रिया, कारोबारी माहौल आदि मानकों पर आधारित लीड्स रिपोर्ट में गुजरात प्रथम स्थान पर है। फिर हरियाणा और पंजाब का क्रमश: दूसरा एवं तीसरा स्थान है। गुजरात में उद्योगों की प्रधानता तथा हरियाणा एवं पंजाब में हरित क्रांति और एनआरआइ समुदाय के कारण लाजिस्टिक्स क्षेत्र ने बहुत प्रगति की है। उत्तर प्रदेश, झारखंड एवं उत्तराखंड का प्रदर्शन 2019 की तुलना में सराहनीय रहा है। गृह, परिवहन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नगर विकास, आवास और शहरी नियोजन, कौशल विकास, राज्य भंडारण और उद्योगों में ठोस प्रयासों के परिणामस्वरूप अपेक्षाकृत अधिक प्रगति दर्ज करते हुए उत्तर प्रदेश 13वें स्थान से छठे नंबर पर पहुंच गया है।

देश के 35 शहरों में मल्टी माडल लाजिस्टिक्स पार्क बनाए जा रहे हैं। किसान रेल, उड़ान, गतिशक्ति कार्यक्रम, सागरमाला, भारतमाला, डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर आदि प्रयासों से लाजिस्टिक्स क्षेत्र के अवसंरचना पक्ष पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कोरोना के समय चिकित्सा से जुड़े सामानों की आपूर्ति में लाजिस्टिक्स क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अमेजन एवं फ्लिपकार्ट की सफलता की कहानी भी लाजिस्टिक्स क्षेत्र पर ही निर्भर करती है। विकसित देशों में लाजिस्टिक्स क्षेत्र में लगने वाली लागत जीडीपी के लगभग आठ से 10 प्रतिशत तक है, जबकि भारत में यह लागत 14 प्रतिशत से भी अधिक है।

मांग एवं आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में लगने वाली लागत एवं समय की बचत का सीधा प्रभाव आपूर्ति श्रृंखला की कीमतों पर भी दिखाई देता है। भारत में एक से दूसरे महानगर तक सामान पहुंचने में कम से कम एक दिन का समय लगता है, जबकि छोटे शहरों तक सामान पहुंचने में दो से चार दिन लगते हैं। यदि हम आयात एवं निर्यात के संदर्भ में बात करें तो एक अनुमान के अनुसार भारत से अमेरिका में निर्यात करने में लगभग 45 दिनों का समय लगता है, जबकि आयात करने में 20 से 25 दिन ही लगते हैं। इसका प्रमुख कारण भारत में सड़कों की अच्छी स्थिति का न होना, प्रत्येक राज्य में चेक पोस्ट और टोल पर अधिक समय लगने जैसे कारण प्रमुख हैं, जो लागत बढ़ा देते हैं। मालगाड़ी को प्राथमिकता के क्रम में अंतिम पायदान पर रखने के कारण रेलवे से सामान पहुंचने में बहुत समय लगता है। उद्योगों तक रेलवे ट्रैक का न होना समस्या को और बढ़ाता है। भारत में लाजिस्टिक्स क्षेत्र में कार्य करने वाली अधिकांश कंपनियां असंगठित क्षेत्र में हैं, जहां कुशल श्रमिकों की कमी एवं नवीन तकनीक के कम प्रयोग के कारण भी लागत बढ़ जाती है।

मेक इन इंडिया कार्यक्रम में भारत को विनिर्माण के वैश्विक केंद्र में बदलने की बात कही गई है। इसके लिए अर्थव्यवस्था के मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के 18 प्रतिशत योगदान को बढ़ाकर 2025 तक जीडीपी के लगभग 25 से 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का विकास प्रत्यक्ष रूप से लाजिस्टिक्स क्षेत्र के विकास के साथ ही जुड़ा हुआ है। लाजिस्टिक्स क्षेत्र के सभी पक्षों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्या को तुरंत सुलझाने के लिए आनलाइन पोर्टल को अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनाने से समय की भी बचत होगी। कार्यदक्षता एवं कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नवीन तकनीकी से युक्त स्मार्ट कर्मचारियों को वरीयता देने से पेपरलेस ट्रांजेक्शन को भी बढ़ावा मिलेगा। योग्य युवाओं में उद्यमी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नियामकीय बाधाओं को कम करके एवं स्टार्टअप के लिए टैक्स प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। इससे भारत की आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धा से गुणात्मक सुधारों की एक नई शुरुआत होगी।

एक देश, एक बाजार की अवधारणा तब तक अधूरी रहेगी, जब तक लाजिस्टिक्स क्षेत्र के समन्वित विकास हेतु केंद्र एवं राज्य अपने व्यक्तिगत हितों को छोड़कर एक जैसे नियम-कानून नहीं बनाएंगे। पुलिस, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सहित विभिन्न विभागों में समन्वय हेतु राज्यों एवं केंद्र द्वारा मिलकर समन्वित मास्टर प्लान बनाया जाना चाहिए। इससे लाजिस्टिक्स में सक्रिय वाहनों को जाम से ही मुक्ति नहीं मिलेगी, बल्कि मालवाहक वाहनों को पुलिस से होने वाली परेशानी से भी मुक्ति मिलेगी। समय एवं लागत को कम करके लाजिस्टिक्स क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी ताकत बनाया जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत को अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, माल ढुलाई की लागत और परिवहन के बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को भी कुशल बनाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इससे न सिर्फ मुद्रा के प्रवाह में गति आएगी, बल्कि वैश्विक व्यापार संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।

लाजिस्टिक्स क्षेत्र में लगभग दो करोड़ से अधिक लोग रोजगार में लगे हुए हैं और इतने ही और लोगों को प्रशिक्षित कर इस क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। यह क्षेत्र उपभोक्ता और निवेश मांग की कमी को ही दूर नही करता, बल्कि विदेशी निवेश के लिए अनुकूल परिवेश बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि इस क्षेत्र में सुधारों की गति को और तीव्रता एवं प्रभावशाली तरीके से लागू किया जाए तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पांच टिलियन डालर के लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है। त्वरित और समावेशी आर्थिक विकास के लिए देश में एक एकीकृत लागत प्रभावी, विश्वसनीय, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सक्षम लाजिस्टिक्स क्षेत्र को विकसित करने के लिए एक दृष्टि तैयार करनी होगी। इसके लिए पहले से कहीं अधिक व्यापक सुधारों और दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता होगी।

(लेखक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं)

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