ई-गवर्नेंस वेबसाइट इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के काम को बना देगी काफी आसान

130 करोड़ से अधिक की आबादी वाले हमारे देश में सिर्फ 1.5 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। अगर कुल आबादी से इसकी तुलना की जाए तो इनकम टैक्स देने वालों की संख्या देश में सिर्फ एक फीसद से कुछ अधिक है।

Sanjay PokhriyalFri, 25 Jun 2021 12:31 PM (IST)
नई वेबसाइट इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के काम को काफी आसान बना देगी। फाइल

डॉ. सुशील कुमार सिंह। गत दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स रिटर्न (आइटीआर) से जुड़ी नई वेबसाइट की खामियों को तुरंत दूर कर यूजर फ्रेंडली बनाने का इन्फोसिस को निर्देश दिया। इस विशेष पोर्टल को सात जून को लांच किया गया था, लेकिन पहले ही दिन से इसमें कई प्रकार की बाधाएं आने लगीं। दरअसल अनेक आयकरदाता, चार्टर्ड एकाउंटेंट और तकनीक के जानकार पहले दिन से इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इसमें दो मत नहीं कि इसके सुचारू होने से आयकरदाताओं के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना बहुत ही आसान हो जाएगा। इस वेबसाइट ने आयकर विभाग के लिए एक तरह से ई-गवर्नेस की राह खोल दी है। आयकर से जुड़े इसमें सारे समाधान एक ही जगह मौजूद हैं, जो कि ई-गवर्नेस की अवधारणा को सफल बनाते हैं। ई-गवर्नेस एक ऐसा साधन है, जिसके द्वारा किसी भी तंत्र में तकनीक का समुचित प्रयोग करके व्यवस्था की कठिनाइयों को समाप्त करने के साथ ही उसे तुलनात्मक रूप से सरल बनाया जाता है। इसी से व्यवस्था स्मार्ट बनती है। यह नया पोर्टल भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के एक जटिल काम को बहुत ही आसान बनाने वाला है।

हालांकि पिछले दिनों आयकर विभाग के लिए नीतियां बनाने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा जारी किए जाने के बाद से इसमें कुछ दिक्कतें आ रहा हैं। जाहिर है सुविधा देने वाला यह पोर्टल अभी कई असुविधा से स्वयं जकड़ा है। गौरतलब है कि इन्फोसिस से 2019 में अगली पीढ़ी के इनकम टैक्ट रिटर्न फाइल करने संबंधी प्रणाली तैयार करने का अनुबंध किया गया था। जिसका मकसद रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया का सरल बनाना और उसकी प्रोसेसिंग में लगने वाले 63 दिन के समय को कम करके एक दिन करना तथा रिफंड प्रक्रिया को तेज करना था। उम्मीद है इन्फोसिस मौजूदा खामियों तो जल्द ही दूर कर देगी। वैसे भी कोई तकनीक हो या सामान्य व्यवस्था, दोनों एक व्यवस्थित आकार लेने में समय तो लेते ही हैं। वेबसाइट की मौजूदा खामियों को भी इसी संदर्भ में लिया जाना चाहिए।

व्यापक रूप से देखा जाए तो जिस तरह से आइआरसीटी ने ट्रेन का टिकट बुक करने संबंधी सारी व्यवस्थाओं को बदल दिया, ठीक उसी तरह से नई वेबसाइट आयकर रिटर्न दाखिल के साथ भी करने वाली है। आयकर आम करदाताओं के लिए हमेशा से एक जटिल विषय रहा है। बिना किसी विशेषज्ञ की मदद से उन्हें अपना रिटर्न फाइल करना टेड़ी खीर होती है। जितना उन्हें रिटर्न नहीं मिलता कई बार उससे अधिक इस पर खर्च करना पड़ता है। उन्हें अपनी वित्तीय मामलों का खुलासा भी दूसरों के सामने करना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें हमेशा इस बात की चिंता सताती है कि रिटर्न फाइल करने में कहीं कोई गलती न हो जाए। इस कारण इनकम टैक्स अधिकारियों का डर उनमें अलग से रहता है। नई वेबसाइट करदाताओं को इस सबसे मुक्त कर देगी।

इसमें आयकरदाताओं के लिए कई उन्नत सुविधाएं और फायदे की चीजें जोड़ी गई हैं। जैसे-एक आयकरदाता इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान कहीं भी किसी प्रकार की समस्या महसूस होने पर आयकर अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकता है। उसके हर सवाल का जवाब देने के लिए एक कॉल सेंटर की भी इसमें व्यवस्था की गई है। इन सबके लिए वेबसाइट में एकल खिड़की की व्यवस्था है। वैसे ई-गवर्नेस में एकल खिड़की संस्कृति का परिपक्व होना अपरिहार्य होता है। यह इनकम टैक्स रिटर्न की तत्काल प्रोसेसिंग करेगी, ताकि आयकरदाताओं को शीघ्र रिफंड मिल सके। आयकरदाताओं को सभी लेन-देन और अपलोड्स या पेंडिंग संबंधी चीजें एक ही पेज पर मिल जाएंगी। उन्हें को इसमें नि:शुल्क आइटीआर भी सॉफ्टवेयर मिलेगा। इसकी मदद से वे बिना किसी विशेषज्ञ की मदद से खुद भी टैक्स फाइलिंग कर सकेंगे। यह मुफ्त में मिलने वाला आइटीआर प्रिपरेशन सॉफ्टवेयर होगा जिसे ऑनलाइन और ऑफलाइन एक साथ काम किया जा सकेगा। इसमें वेतन, आय, ब्याज, लाभांश, पूंजीगत लाभ संबंधी ब्योरे पहले से ही भरे मिलेंगे। इसे मोबाइल से भी संचालित किया जा सकता है। मोबाइल गवर्नेस को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।

जाहिर है आयकर विभाग की इस नई प्रणाली से नई पीढ़ी की जरूरतों को उड़ान मिलेगी। पिछले कई वर्षो की तुलना में देखा जाए तो टैक्स रिटर्न फॉर्म भी निरंतर सरल बनाए जाते रहे हैं। और अब तकनीकी सरलता से इसकी सुगमता और बढ़ जाएगी। इसके अलावा बैंक खाते, पैन कार्ड और आधार को आपस में जोड़ा जा रहा है। इससे भी उपभोक्ताओं को कई समस्याओं से छुटकारा मिलेगी। संभव है आने वाले दिनों में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना बिजली बिल भरने, टीवी या मोबाइल रिचार्ज कराने जितना आसान हो जाए। इससे निश्चित रूप से इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या बढ़ेगी। अभी 130 करोड़ से अधिक की आबादी वाले हमारे देश में सिर्फ 1.5 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। अगर कुल आबादी से इसकी तुलना की जाए तो इनकम टैक्स देने वालों की संख्या देश में सिर्फ एक फीसद से कुछ अधिक है।

[निदेशक, वाईएस रिसर्च फाउंडेशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन]

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