वित्त मंत्री ने कॉरपोरेट टैक्स में की कटौती, अब उद्योग जगत भी अपनी जिम्मेदारी निभाए

[ संजय गुप्त ]: देश में मंदी की आहट के बीच जब उद्योगपतियों में निराशा का भाव घर कर रहा था तब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की घोषणा करके न केवल उद्योग जगत को हर्षोल्लास से भर दिया, बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। यह वह कदम है जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था अगले पांच वर्ष में पांच ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल कर सकती है और साथ ही भारत तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था वाला देश बना रह सकता है। भारत में विदेशी निवेश की राह में सबसे बड़ा रोड़ा कॉरपोरेट टैक्स की ऊंची दर थी। जो निवेश चीन या अन्य पूर्वी एशियाई देशों में होता था वह अब नई दरों के कारण भारत की ओर आकर्षित होगा।

मेक इन इंडिया और स्टार्टअप को बल मिला

इस फैसले ने मोदी शासन के मेक इन इंडिया और स्टार्टअप को भी बल प्रदान किया है, क्योंकि एक अक्टूबर 2019 के बाद स्थापित होने वाली मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों पर सेस और सरचार्ज मिलाकर अब 17.01 फीसद कॉरपोरेट टैक्स ही लगेगा। यह अभी तक 29.12 प्रतिशत था। 2014 के आम बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था के लिए जो रोडमैप दिया था उसमें टैक्स दरें कम कर उन्हें दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाने की बात की गई थी। बावजूद इसके किसी को उम्मीद नहीं थी कि जो घोषणा बजट में नहीं की गई वह चालू वित्त वर्ष के बीच में ही कर दी जाएगी।

देश को आर्थिक मंदी से उबारने के लिए मिली तगड़ी खुराक

मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद से ही अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत मिल रहे थे। पहले फिसलता हुआ ऑटोमोबाइल उद्योग और फिर जीडीपी के गिरते हुए आंकड़े आर्थिक सुस्ती को ही बयान कर रहे थे। हालांकि पिछले तीन सप्ताह से अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए सरकार की ओर से कई घोषणाएं की गईं, लेकिन माहौल नहीं बदल रहा था। अब इस तगड़ी खुराक से स्थिति पूरी तरह परिवर्तित हो गई है।

सरकार के फैसलों का निवेशकों ने किया स्वागत

भारत ही नहीं, दुनिया भर के निवेशकों ने इसका स्वागत किया है। इसे बीते 20 वर्षों का सबसे बड़ा फैसला करार दिया जा रहा है। खुद प्रधानमंत्री ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती को ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा कि उनकी सरकार भारत को व्यापार के लिए बेहतर स्थान वाला देश बनाने और समाज के सभी वर्गों के लिए अवसरों को बेहतर करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। चूंकि यह फैसला रोजगार के नए अवसर भी पैदा करने वाला है इसलिए उसने सबकी उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ध्यान रहे कि जब रोजगार के अवसर बढ़ते हैैं तो मांग को भी बल मिलता है। यह फैसला इसका परिचायक है कि प्रधानमंत्री देश की आर्थिक उन्नति को लेकर प्रतिबद्ध हैं। अपनी इसी प्रतिबद्धता के तहत वह हरसंभव उपाय कर रहे हैं।

सरकार के फैसलों पर राहुल गांधी ने कसा तंज

यह आश्चर्यजनक है कि सरकार के जिस कदम का उद्योग जगत के साथ आर्थिक मामलों के लगभग सभी विशेषज्ञ स्वागत कर रहे हैं उस पर राहुल गांधी तंज कसना जरूरी समझ रहे हैैं। उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के फैसले को प्रधानमंत्री के ह्यूस्टन में होने वाले कार्यक्रम से जोड़ते हुए कहा कि कोई भी इवेंट उस आर्थिक संकट को छिपा नहीं सकता, जिसमें हाउडी मोदी ने भारत को डाल दिया है।

सरकार ने अमीरों को फायदा पहुंचाया- कपिल सिब्बल

राहुल गांधी के इसी तंज को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के एक अन्य नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार ने अमीरों को फायदा पहुंचाया और गरीबों को उनके हाल पर छोड़ दिया। साफ है कि वह गरीबों के बहाने वामपंथी दलों वाली राजनीति कर रहे हैैं। उन्हें यह याद होना चाहिए कि आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री ने अपने पहले संबोधन में यही कहा था कि देश में अब दो ही जातियां रह गई हैं-एक गरीब और दूसरे, गरीबी दूर करने वाले। क्या कांग्रेस यह नहीं जानती कि उद्योग-धंधों के विकास से ही गरीबी दूर करने का काम सही तरह से हो सकता है?

कटौती की घोषणा से शेयर बाजार में आया था जबरदस्त उछाल

इस पर हैरत नहीं कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की घोषणा होते ही शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आई। इस दौरान ऑटो कंपनियों के शेयरों में भी खासी तेजी आई और रुपया भी मजबूत हुआ। हालांकि अर्थव्यवस्था में जान फूंकने वाले इस फैसले से सरकारी खजाने पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये का बोझ आएगा, लेकिन इससे राजकोषीय घाटा मामूली रूप से ही बढ़ने का अंदेशा है। हाल में रिजर्व बैंक ने अपने रिजर्व से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये दिए हैं। यह राशि नई घोषणाओं की मद में बढ़ रहे खर्च में समायोजित होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए उठाएं कदम

जब यह तय माना जा रहा है कि कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती से मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विसेज क्षेत्र में तेजी आएगी तब सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार को भी अपनी प्राथमिकता में शामिल करना होगा। अभी देश के जीडीपी में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का योगदान 15-17 प्रतिशत है, जबकि 65-70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। चूंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में केवल सब्सिडी और डीबीटी ही पर्याप्त नहीं इसलिए कृषि क्षेत्र में भारी निवेश के साथ अन्य आवश्यक कदम भी उठाने होंगे। इसलिए और भी, क्योंकि मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया हुआ है।

कारोबारियों पर लटकती टैक्स टेररिज्म की तलवार हटी

कॉरपोरेट टैक्स कटौती का फैसला करके सरकार ने उद्योगपतियों का मनोबल तो बढ़ाया ही है, आयकर के ई-असेसमेंट की योजना शुरू करने की घोषणा कर कारोबारियों के सिर पर लटकती टैक्स टेररिज्म की तलवार को भी हटाया है। इसके तहत अब किसी को भी आयकर अधिकारी के सामने व्यक्तिगत तौर पर पेश नहीं होना पड़ेगा। अब यह आवश्यक है कि उद्योग जगत अपनी उत्पादकता बढ़ाने और अपने उत्पादों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सक्रिय हो।

कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का फैसला अप्रैल से होगा प्रभावी

अभी भारतीय उत्पाद कई मायनों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमजोर साबित होते हैं। इसी कारण चीनी उत्पाद भारतीय बाजार में अपनी पैठ बनाते जा रहे हैं। चूंकि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का फैसला अप्रैल से प्रभावी होगा इसलिए घरेलू कंपनियों को बहुत लाभ होने जा रहा है। उन्हें इस पैसे का इस्तेमाल रिसर्च और डेवलपमेंट पर करना चाहिए ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हो सके। अगर हमारी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पद्र्धा में खरा उतरना है तो उन्हें अपने उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर करनी ही होगी।

नई सोच के साथ देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करना होगा

इसी तरह अब जब सरकार ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व पर किए जाने वाले खर्च का दायरा बढ़ा दिया है तो फिर अनुसंधान को भी गति मिलनी चाहिए। ध्यान रहे कि अनुसंधान किसी भी राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि की नींव बनते हैैं। मोदी सरकार कॉरपोरेट जगत को रियायतें देने के साथ ही कारोबारी माहौल को और सुगम बनाने के लिए सक्रिय है। ऐसे में उद्योग जगत को एकजुट होकर अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आगे आना होगा। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव आता रहता है, लेकिन अतीत में यह देखने में आया है कि उद्योगपति अपनी हर समस्या के लिए सरकार को कोसने लगते हैं। उद्योग क्षेत्र को इस मन:स्थिति से उबरना होगा और नई सोच के साथ देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में जुटना होगा।

[ लेखक दैनिक जागरण के प्रधान संपादक हैं ]

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