अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका की परख करेगा अमेरिका

अमेरिका ने पाकिस्तान की आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों की जो अनदेखी की उसके कारण ही उसे अफगानिस्तान में मुंह की खानी पड़ी। 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद ओसामा बिन लादेन समेत सारे तालिबानी सरगना पाकिस्तान में जा छिपे लेकिन अमेरिकी प्रशासन अनजान ही बना रहा।

Neel RajputWed, 15 Sep 2021 09:16 AM (IST)
पहले भी ऐसी बातें कह चुका है अमेरिकी प्रशासन

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का यह कहना महत्वपूर्ण तो है कि अमेरिका इसकी परख करेगा कि पाकिस्तान ने बीते दो दशकों में कैसी भूमिका निभाई है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से ऐसी बातें पहले भी की गई हैं और सब जानते हैं कि उनका कहीं कोई नतीजा नहीं निकला।

पिछले दो दशकों में अमेरिकी सत्ता में जो भी लोग रहे, वे इससे भली तरह अवगत रहे कि पाकिस्तान तरह-तरह के आतंकी संगठनों को केवल पालता-पोसता ही नहीं रहा, बल्कि अमेरिका की आंखों में धूल भी झोंकता रहा। वह एक ओर आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से आर्थिक एवं सैन्य सहायता लेता रहा और दूसरी ओर तालिबान, जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों को पनाह भी देता रहा। इस आशय की न जाने कितनी खुफिया रपटों से अमेरिकी प्रशासन परिचित होता रहा, लेकिन उसने पाकिस्तान को उसके दोहरे रवैये के लिए कभी दंडित नहीं किया।

अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बनाने के नाम पर उसकी आर्थिक सहायता तो रोकी, लेकिन खूंखार आतंकी संगठनों को पनाह देने के लिए उसे कभी जवाबदेह नहीं बनाया। 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद ओसामा बिन लादेन समेत सारे तालिबानी सरगना पाकिस्तान में जा छिपे, लेकिन अमेरिकी प्रशासन अनजान ही बना रहा। अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों की जो अनदेखी की, उसके कारण ही उसे अफगानिस्तान में मुंह की खानी पड़ी। अमेरिकी विदेश मंत्री का यह कथन कोई बहुत उम्मीद नहीं जगाता कि अमेरिका पाकिस्तान की भूमिका की जांच करेगा, क्योंकि यह सबके संज्ञान में है कि तालिबान उसकी ही मदद से वहां पर काबिज हुआ।

यह भी किसी से छिपा नहीं कि पाकिस्तान ने तालिबान की जीत पर किस तरह खुशी जताई और किस प्रकार उसकी अंतरिम सरकार बनवाई। यदि इस अंतरिम सरकार में अनेक घोषित आतंकी मंत्री बन गए हैं तो पाकिस्तान के कारण ही। यह विचित्र है कि अमेरिका तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों को अलग-अलग करके देख रहा है, जबकि वे एक ही हैं और उन सबकी पीठ पर पाकिस्तान का हाथ है।

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनवाने के बाद पाकिस्तान इस कोशिश में है वे उसके ही हिसाब से सरकार चलाएं। बेहतर हो कि अमेरिका यह महसूस करे कि अफगानिस्तान में तालिबान के सहारे एक तरह से पाकिस्तान वहां पर काबिज हो गया है। इससे अफगानिस्तान में किस्म-किस्म के आतंकी संगठनों के फलने-फूलने का अंदेशा पैदा हो गया है। इस अंदेशे को दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि अमेरिका पाकिस्तान को दंडित करने पर गंभीरता से विचार करे।

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