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जीटीबी अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था

स्वदेश कुमार, पूर्वी दिल्ली : संदिग्ध मरीजों को इलाज न मिलने की समस्या को देखते हुए जीटीबी अस्पताल ने तीन स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था लागू की है ताकि कोरोना लक्षणों के साथ गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों को भी इलाज मिल सके। इसके तहत सामान्य लक्षण वाले कोरोना मरीजों को अलग वार्ड में रखा जा रहा है। वहीं कोरोना पॉजिटिव ऐसे मरीज जिनकी हालत गंभीर है और जिनको कभी भी वेंटिलेटर या ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है, उनके लिए अलग वार्ड तैयार किया गया है। यहां पर जीवन रक्षक उपकरणों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा एक वार्ड गंभीर हालत में पहुंचे कोरोना संदिग्ध का भी है। यहां पहली प्राथमिकता ऐसे मरीजों की जान बचाने की होगी। अगर स्थिति में सुधार होता है और रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो उन्हें नॉन कोविड अस्पताल में रेफर किया जाएगा। अस्पताल में तैनात किए गए मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि अभिनव राय इन व्यवस्था पर खुद नजर रख रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पहले सिर्फ कोरोना पॉजिटिव मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा था। लेकिन इसमें अब संदिग्ध मरीजों को भी भर्ती किया जा सकता है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अभी इसके लिए करीब 50 बेड की व्यवस्था की गई है। आगे इसे सौ तक ले जाने की योजना है। इसके अलावा मरीजों की सहूलियत के लिए अस्पताल के गेट पर ही एक काउंटर लगाने की तैयारी है जो मरीजों और उनके तिमारदारों की समस्या को सुनेंगे और उनका उचित निवारण करेंगे। संक्रमण काल की शुरुआत में करीब डेढ़ महीने तक इस अस्पताल में कोरोना मरीजों का इलाज चला था। बाद में इसे नॉन कोविड घोषित कर दिया गया था। गत मंगलवार से यह पूरी तरह से कोविड अस्पताल हो गया। मंगलवार तक यहां करीब तीन सौ मरीज भर्ती थे। इनमें ऐसे मरीज जो ठीक हो रहे थे, उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। जिन मरीजों को जीवन रक्षक उपकरणों की जरूरत थी, उन्हें निजी और सरकारी अस्पतालों में भेज दिया गया है। मरीजों का मार्गदर्शन कर रहे आप के वालंटियर

आप नेता और मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि अभिनव राय अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। इसके अलावा अस्पताल के बाहर भी उनकी टीम मरीजों का मार्गदर्शन कर रही है। दरअसल 1500 बेड की क्षमता वाले जीटीबी अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन सात से आठ हजार मरीज आते थे। कोविड घोषित होने के बाद भी कई मरीज यहां पहुंच रहे हैं जिन्हें इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे मरीजों अब कहां इलाज मिल सकता है इसकी जानकारी ये आप के वालंटियर उन्हें दे रहे हैं।

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