AAP से गठबंधन को लेकर जीतीं तो टिकट बंटवारे में शीला को इस तरह मिली शिकस्त

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली में काग्रेस ने शीला दीक्षित को लोकसभा उम्मीदवार बनाकर अपना ट्रम्प कार्ड तो खेल दिया है, लेकिन टिकट बंटवारे में शीला की बिल्कुल भी नहीं चल पाई। अगर एक राजेश लिलोठिया को छोड़ दें तो शीला की पसंद का एक भी उम्मीदवार नहीं है। यहां तक कि शीला अपनी पूर्वी दिल्ली की सियासी जमीन भी नहीं बचा सकीं। ज्यादातर टिकटों के बंटवारे में प्रदेश प्रभारी पीसी चाको और उनके खासमखास एक प्रदेश स्तरीय नेता की ही चलती दिखी है। सीईसी की बैठक में भी शीला की नहीं ही चली थी।

गौरतलब है कि काग्रेस ने उत्तर-पूर्वी सीट से जेपी अग्रवाल, उत्तर-पश्चिमी सीट से राजेश लिलोठिया, नई दिल्ली से अजय माकन, चादनी चौक से स्वयं शीला, पश्चिमी दिल्ली से सुशील कुमार, पूर्वी दिल्ली से अरविंदर सिंह लवली और दक्षिणी दिल्ली से रमेश कुमार का नाम फाइनल किया है। इनमें से पाच नाम शीला दीक्षित की पसंद के नहीं हैं।

सूत्रों का कहना है कि उत्तर-पूर्वी सीट से शीला दीक्षित ने पूर्व विधायक मतीन अहमद का नाम सुझाया था, लेकिन उनकी जगह जेपी अग्रवाल का नाम तय कर दिया गया। ऐसे ही चादनी चौक सीट पर शीला ने अपने विश्वासपात्र मंगतराम सिंघल के नाम की पैरवी की थी, लेकिन पार्टी ने इस सीट से उन्हें खुद ही प्रत्याशी बना दिया। नई दिल्ली सीट से प्रत्याशी अजय माकन और शीला दीक्षित के बीच 36 का आकड़ा है।

दक्षिणी दिल्ली के लिए शीला दीक्षित ने योगानंद शास्त्री का नाम दिया था, लेकिन रमेश कुमार का टिकट फाइनल हो गया। पश्चिमी दिल्ली से शीला ने अपने कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र यादव की संस्तुति की थी, लेकिन टिकट उन्हें भी नहीं मिला।

यहां तक कि शीला अपने बेटे संदीप दीक्षित की परंपरागत पूर्वी दिल्ली सीट भी नहीं बचा सकीं। वह यहा से अपने पीए रह चुके पवन खेड़ा को टिकट दिलवाना चाह रही थीं लेकिन इस सीट से उनके विरोधी अरविंदर सिंह लवली को टिकट दे दिया गया।

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