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माल से रेलवे होगी मालामाल

संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली

कोरोना संकट में नियमित ट्रेनें न चलने से अब यात्री किराया से होने वाली कमाई के नुकसान की भरपाई माल ढुलाई से की जा रही है। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं। दो से तीन मालगाड़ियों को जोड़कर एक साथ चलाया गया है, जिससे कि कम समय में ज्यादा सामान एक से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जा सके। इन कदमों से माल ढुलाई में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। इस दौरान मिले अनुभव का सदुपयोग करके रेल प्रशासन अपनी कमाई बढ़ाने के लिए रणनीति बनाने में जुट गया है। अगले चार साल में (2024 तक) माल ढुलाई दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए रेलवे बोर्ड से लेकर मंडल स्तर पर रणनीति बनेगी जिसके लिए अधिकारियों की टीम तैनात होगी। कोरोना काल में माल ढुलाई से मिले 1418.5 करोड़ रुपये :-

कोरोना महामारी की वजह से 22 मार्च से ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी, लेकिन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए मालगाड़ियों का संचालन जारी रखा गया। मार्च से जून तक रेलवे की माल ढुलाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। उत्तर रेलवे के लदान क्षमता में भी वृद्धि हुई है। लॉकडाउन में 90 दिनों (अप्रैल से जून) में माल भाड़ा से उत्तर रेलवे को 1418.5 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। यह पिछले साल की इस अवधि की तुलना में 14 फीसद ज्यादा है। रोजाना माल लदान की औसत क्षमता भी 3.6 गुना बढ़ गई है। रेलवे बोर्ड से लेकर मंडल तक होगा मंथन :-

बोर्ड से लेकर मंडल स्तर पर व्यवसाय विकास इकाई (बीडीयू) का गठन करने का फैसला किया गया है। प्रत्येक महाप्रबंधकों को जोनल स्तरीय इकाई गठित करने को कहा गया है जिसमें परिचालन, वाणिज्य, वित्त व यांत्रिकी विभाग के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड के अधिकारी शामिल होंगे। इसी तरह की इकाई प्रत्येक रेल मंडल में गठित होगी, जिसके संयोजक वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक होंगे। अधिकारी करेंगे संभावनाओं की तलाश :-

मालगाड़ी के जरिये अनाज, नमक, सीमेंट, कोयला, पेट्रोलियम पदार्थ सहित कई सामान की ढुलाई होती है। इसे बढ़ाने के साथ ही उन वस्तुओं की सूची तैयार की जाएगी जिसकी ढुलाई में रेलवे की भागीदारी कम है। रेल की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अधिकारियों की टीम काम करेगी। उन कारणों की पहचान की जाएगी, जिस वजह से व्यापारी रेल के बजाय सड़क मार्ग को वरियता देते हैं। डीएफसी से लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद :-

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के बनने से माल भाड़ा से कमाई बढ़ाने में रेलवे को मदद मिलेगी। यह कॉरिडोर पूरी तरह से मालगाड़ियों के लिए होगा। अगले वर्ष तक ईस्टर्न व वेस्टर्न कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा। इससे माल ढुलाई में तेजी आएगी। ज्यादा क्षमता वाली मालगाड़ियों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार चलाया जा सकेगा। फिलहाल मालगाड़ी औसतन 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से चलती हैं।

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