खुले में कूड़ा जलाना पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी

बढ़ते हुए वायु प्रदूषण के मद्देनजर सरकार राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के आदेश का उल्लंघन

JagranFri, 22 Oct 2021 01:51 AM (IST)
खुले में कूड़ा जलाना पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी

जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली:

बढ़ते हुए वायु प्रदूषण के मद्देनजर सरकार राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने खुली जगहों पर कूड़ा नहीं जलाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इन निर्देशों के बावजूद खुले में कूड़ा जलाने का सिलसिला नहीं थम रहा है। इलाके की सड़कों के किनारे, डलाव घर के आसपास व खुली जगहों पर अक्सर कूड़ा चलाते हुए देखा जा सकता है। वैसे तो ज्यादातर घरों से निकलने वाला दैनिक कूड़ा और सूखे पत्तों को ही जलाया जाता है, लेकिन इसमें शामिल प्लास्टिक वेस्ट हवा को प्रदूषित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। लिहाजा इसमें सख्त नियम के अलावा लोगों में जागरूकता भी जरूरी है।

सामाजिक कार्यकर्ता व बवाना निवासी राम किशन ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में लोग कूड़े को यहां-वहां फेंक देते हैं और बाद में उसे जलाया जाता है। इसके लिए निगरानी के साथ साथ समय समय पर लोगों के बीच जाकर उन्हें वायु प्रदूषण के दुष्परिणाम से अवगत कराना चाहिए। मौजूदा समय में वायु प्रदूषण पूरे विश्व के लिए चिता का विषय बना हुआ है। हालांकि इसके उपाय पर ढूंढ़े जा रहे हैं, लेकिन हर रोज एकत्रित होने वाले कूड़े के ढ़ेर में आग लगा कर इस वायु प्रदूषण को बढ़ाया ही जा रहा है। आग लगे उस कूड़े के ढेर से उठने वाले धुएं यहां की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं से कहीं अधिक खतरा पैदा कर रही है। इसलिए इसे लेकर अधिक सतर्कता जरूरी है। कचरा कहीं भी जलाया जाए वो ठीक नहीं है, इससे आसपास की हवा प्रदूषित होती है। पहले किसी भी स्थान पर कूड़ा खुले में फेंका जाता है और उसे फिर जलाया जाना गंभीर समस्या है। इसमें अक्सर प्लास्टिक होता है और इसके जलने से पर्यावरण को सीधे नुकसान पहुंचता है। इसे लेकर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

-कनिका चोपड़ा, पर्यावरणविद, पश्चिम विहार। यदि कचरा को सही समय पर उठाकर उसका उचित निस्तारण किया जाए तो उसे जलाए जाने की गतिविधियों में कमी आ सकती है। ज्यादातर जगहों पर खुले में कचरा फेंका जाता है और उसे जलाया जाता है। इसके लिए संबंधित विभाग की ओर से निगरानी की जानी चाहिए। सर्द मौसम में इसपर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

सुमित राणा, पर्यावरण प्रेमी, रोहिणी।

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