Yoga Benefits: ईश्वर से साक्षात्कार करने का तरीका है योग, सेहत के साथ मन भी रहता है शांत

योग के लिए हमें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं होती। बस ताजी हवा आती रहे।अपने घर की खिड़कियां दरवाजे खोल लीजिए। सूरज की रोशनी लीजिए और योग करिए।ध्यान के लिए घर से अच्छी शांत जगह और कौन-सी होगी। आप घर में करेंगे तो बच्चे भी आपके साथ करने लगेंगे।

Prateek KumarSun, 20 Jun 2021 11:56 AM (IST)
हर चिकित्सा पद्धति ने योग को अपनाने की सलाह दी है।

नई दिल्ली, यशा माथुर। सांस को शरीर के भीतर लेना, बाहर निकालना और ईश्वर से जुड़ जाना। तन, मन पर संयम प्राप्त करना और सात्विक जीवन की ओर मुड़ जाना। शरीरिक व मानसिक रूप से संबल प्राप्त करना और हर मुश्किल से लड़ जाना। यह सब हम किससे सीख सकते हैं? इस प्रश्न का एकमात्र जवाब होगा 'योग'। योग तो भारतीय संस्कृति की पांच हजार वर्ष पुरानी विरासत है लेकिन पिछले दो सालों में जब कोरोना का कोहराम मचा है तो यह सेहत का ऐसा मंत्र हो गया जिसे हर चिकित्सा पद्धति के महारथियों ने दोहराया। सभी ने कहा कि श्वास पर नियंत्रण की इस साधना से शरीर के हर अंग को साधा जा सकता है और घर पर रहकर भी किया जा सकता है प्राणायाम, आसन और ध्यान ...

जैसा श्वास, वैसा विचार। जब प्राण चलता है तो मन चलता है और जब मन चलता है तो प्राण चलता है। इनमें से आप अगर प्राण पर नियंत्रण स्थापित कर लेंगे तो मन पर नियंत्रण हो जाएगा। ऐसी संकल्पना योग की है। कोविड को देखते हुए आयुष मंत्रालय, एम्स आदि ने श्वास प्रक्रिया को कोविड से बचने और ठीक होने में काफी मददगार बताया है और इसे नियमित रूप से करने की सलाह भी दी है। हर चिकित्सा पद्धति ने योग को अपनाने की सलाह दी है। शारीरिक दूरी की जरूरत को देखकर घर पर ही इसके अभ्यास पर जोर दिया है। इसीलिए इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की थीम है 'बी विद योग, बी, एट होम' रखी गई है यानी 'योग के साथ रहें, घर पर रहें'।

प्राणधारणा के साथ योगाभ्यास

हमने जो महामारी का मंजर देखा है उसमें योग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर आप घर में रहकर नियमित योगाभ्यास करते हैं तो अपनी मेटाबॉलिज्म को सुधारते है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। योगाचार्य डा. लक्ष्मीनारायण जोशी कहते हैं, 'अगर आप आइसोलेशन में हैं और खुद को ज्यादा कमजोर महसूस नहीं करते तो पवनमुक्तासन, सूर्यनमस्कार कर सकते हैं। पाचन तंत्र को मजबूत बनाएंगे तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी। इसके लिए आप भोजन के बाद वज्रासन कीजिए। नियमित रूप से फॉरवर्ड बेंडिंग वाले आसन कीजिए। इससे पाचनतंत्र मजबूत होगा। कोविड से ठीक होने में समस्या सबसे ज्यादा उन लोगों को आई है जो डाइबिटीज के रोगी रहे हैं। इनके लिए भी मंडूक आसन, अद्र्धमत्स्येन्द्रासन है। इसके साथ नाड़ी शोधन, उज्जायी, भ्रामरी प्राणायाम किए जा सकते हैं। इनसे बहुत आसानी से रिकवरी होगी। इन्हें घर में रहकर किया जा सकता है।' डा. लक्ष्मीनारायण इस बात पर जोर देते हैं कि व्यायाम और योग में जमीन आसमान का अंतर है। व्यायाम हमें शारीरिक रूप से मजबूत बनाते हैं और इस दौरान हम संगीत सुन सकते हैं। वह कहते हैं कि फिजिकल एक्टिविटी के समय अपना ध्यान हम कहीं और लगा सकते हैं लेकिन योगाभ्यास प्राणधारणा के साथ ही कर सकते हैं। प्राणधारणा का मतलब है कि हम जब आसन लगाते हैं तो उस अंग का ध्यान करते हैं जिसके लिए आसन कर रहे हैं। अगर हम डाइबिटीज के रोगी हैं तो मंडूकासन करते समय अपना ध्यान पैंक्रियाज पर लगाएंगे। तब प्रभाव बढ़ जाता है। जब हम योग करते हैं तो हमारी पीयूष ग्रंथि से हैप्पी हारमोन निकलते हैं जिन्हें हम एंडोर्फिन कहते हैं। इससे हमारा तनाव एकदम खत्म हो जाता है।

योग देता है दीर्घ जीवन

21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है। इसके निरंतर अभ्यास से व्यक्ति को लंबा जीवन मिलता है। योग का ही कमाल है कि वाराणसी के स्वामी शिवानंद को 125 वर्ष की अवस्था में भी देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि उनकी उम्र इतनी हो सकती है। चेहरे पर चमक, चाल में उम्र का असर नहीं। श्रवण व स्मरण शक्ति बेजोड़। स्वामी जी इसका कारण योग व आसन को मानते हैं। काशी में निवास कर रहे स्वामी शिवानंद यायावरी जीवन के कारण देश-विदेश में घूमते रहे हैं। वह कहते हैं, ‘योग मेरी जीवनचर्या का अभिन्न अंग है। योग के जरिए ईश्वर से भी साक्षात्कार किया जा सकता है क्योंकि योग, नियम और आसन मन को पवित्र और एकाग्र बनाता है। यदि ये दोनों चीजें मनुष्य के अंदर हो तो वह प्रसन्न, स्वस्थ और निर्मोही हो जाएगा। मैं यम नियम से प्रसन्न रहता हूं।'

हर पल जो नया हो रहा है उससे जुड़ना है योग

योग के लिए हमें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं होती। बस ताजी हवा आती रहे। अपने घर की खिड़कियां, दरवाजे खोल लीजिए। सूरज की रोशनी लीजिए और योग करिए। ध्यान के लिए घर से अच्छी शांत जगह और कौन-सी होगी। आप घर में करेंगे तो बच्चे भी आपके साथ करने लगेंगे। स्थिरता योग की आवश्यकता है और इसे घर में भी प्राप्त किया जा सकता है। घर में योग को लाभदायक बताते हुए योग गुरु डा. नवदीप जोशी कहते हैं, 'योग को केवल आसन से न देखें। हम अपनी वर्कशॉप में आनंद की कला सिखाते हैं। इसे 'आर्ट ऑफ हैप्पीनेस' कहते हैं। एक यौगिक मनोविज्ञान कहता है कि हमारा अवचेतन मन वर्तमान में कैसे रहे? हमारा अवचेतन मन अगर आनंद में और वर्तमान में है और जितनी देर तक हम इस अवस्था में रहेंगे उतने ही स्वस्थ रहेंगे, अच्छा कार्य करेंगे और नकारात्मक चीजों से दूर रह पाएंगे। इसे हमने नवयोग नाम दिया हे यानी हर पल जो नया हो रहा है उससे स्वयं को जोडऩा। अगर आप बाहर देखें तो आपको नये फूल और नई पत्तियां और उगते हुए नये पौधे दिखेंगे। ऐसा तभी होगा जब आप सकारात्मक हैं। हम केवल अपने विचारों को बदलें। अगर हम नकारात्मक रहते हैं तो आगे नहीं बढ़ पाते। यदि हम प्रकृति के पास जाकर उसे देखने का प्रयास करें, उसे महसूस करें और अपनी चेतना को प्रकृति के साथ जोड़ें तो हम तनावमुक्त भी होते हैं। हमारे भीतर सकारात्मक रसायन उत्पन्न होते हैं और इससे हमें एक नई ऊर्जा मिल जाती है।'

विदेशी बने योग साधक, रम गए भारतभूमि में

योग के लाभ देखकर, जानकर पूरी दुनिया इस जीवनशैली में खुद को ढाल रही है। विदेशी साधक या तो भारत में योग सीख कर अपने देश के लोगों की सेहत सुधारते हैं या फिर इस जन्म के लिए तो भारतभूमि के ही होकर रह जाते हैं। अमेरिका के हॉलीवुड कैलिफोर्निया में जन्मीं साध्वी भगवती स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं। 1996 में पीएचडी के दौरान जब ऋषिकेश के परमार्थ आश्रम आईं तो यहां के मर्मस्पर्शी वातावरण से बेहद प्रभावित हो गईं। तीन माह बाद ही घर से वापस लौटीं तो फिर यहीं की होकर रह गई। ब्राजील से क्लॉडीन फ्रांसो सात साल पहले ऋषिकेश स्वर्गाश्रम में योग की शिक्षा ग्रहण करने आई थीं। यहां की फिजाओं में बसे अध्यात्म और योग ने इन्हें यहीं रोक लिया। अब क्लॉडीन फ्रांसो योग प्रशिक्षक बन गई हैं। अब उन्हें करुणा के नाम से जाना जाता है। सुसाना बैरियस दक्षिण अमेरिकी देश चिली से भारत में योग का प्रशिक्षण लेने आई हैं। भारत भ्रमण के दौरान सुसाना के कदम ऋषिकेश में ही ठहर गए। पर्यटक बनकर आईं सुसाना अब साधक के रूप में यहां रमी हुई हैं। योग की राजधानी ऋषिकेश में केवल यही नहीं, ऐसे हजारों लोग हैं।

योग के लिए शरीर ही उपकरण

योग की विशेषता यही है कि इसका अभ्यास आप कभी भी और कहीं भी कर सकते हैं। आपको इसके लिये व्यायाम के किसी अन्य बाह्य उपकरण की कोई आवश्यकता नहीं होती। इसके अभ्यास के लिए शरीर ही एकमात्र उपकरण है। आपको इसके लिए अन्यत्र कहीं जाने की आवश्यकता नहीं। आप जहां हैं वहीं बैठकर इसका अभ्यास कर सकते हैं। इसका अभ्यास प्रतिदिन नियमित रूप से करना ही चाहिए। यह केवल शरीर के लिए ही नहीं, अपितु मन के लिए भी परम लाभकारी है। यह भावनाओं के उद्वेग को शांत करता है। हमारे विचारों में स्पष्टता लाता है। महामारी के इस समय में जब हम सब अपने-अपने घरों में बंद हैं और संक्रमण के भय से लगातार भयभीत हो रहे हैं, यही एक साधना है जिसका अभ्यास करके हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं, उसे रोगाणुओं से लडऩे के लिये बलशाली बना सकते हैं। अपने विचारों में सकारात्मकता बनाये रख सकते हैं। आसनों के अभ्यास के साथ-साथ योग की अपनी ही एक सात्विक जीवनशैली है, जो मनुष्य के न केवल शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को सुनिश्चित रखती है अपितु उसकी आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करती है। मैंने अपने चारों ओर बहुत लोगों को दुखी देखा, लोगों को अपना जीवन लगातार रहने वाले तनाव में जीते हुए देखा, तो समझ आया कि जीवन में चैन एवं आनंद को सतत बनाये रखने के लिये योग कितना आवश्यक है। अनेक प्रकार की चुनौतियों से भरपूर इस जीवन को जीते समय शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से मजबूत बने रहने के लिये मुझे इससे अधिक उपयुक्त साधन कोई दूसरा नहीं दिखा। मैं सदैव धन्यवाद देती हूं अपने गुरु श्री अयंगर जी को, जिन्होंने जीवन के सबसे कठिन समय से मुझे योग का मार्ग दिखाकर उबारा। अभी पिछले ही महीने कोविड से ग्रसित हो जाने पर एक महीने के एकांतवास में मुझे केवल योग का सहारा रहा। लगभग 70 वर्ष की उम्र होने पर भी भगवान व योग की कृपा से कोविड से संक्रमण का समय भी बिना किसी भी परेशानी के निकल गया।

उषा देवी, पातञ्जल योग केंद्र ऋषिकेश (उत्तराखंड)

 

योग में प्राण ऊर्जा ही सब कुछ

मैं नाड़ी विज्ञान में काम करता हूं। हम योग से काफी पुराने दर्द को भी ठीक कर देते हैं। हमारा कोई भी अंग हमेशा काम कर सकता है। यदि इन्हें तीन चीजें मिलती रहे तो हम कभी रोगी नहीं होंगे। एक हृदय से नियमित रक्त आपूर्ति, दूसरा मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाओं की आपूर्ति और तीसरा, वह प्राण ऊर्जा जो अंग को चाहिए। यह सारी आपूर्ति उम्र के साथ ब्लॉक होने लग जाती है। अगर इन्हें किसी भी तरीके से सही रखें तो अंग चलते रहेंगे। योग में प्राण ऊर्जा ही सब कुछ है। जो हम खाते हैं उससे भी हमें ऊर्जा मिलती है। प्रकृति से भी हमें ऊर्जा मिलती है। अगर हम इस प्राण ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाध रूप से अंगों तक बनाए रखें तो हमारे अंग हमेशा काम कर सकते हैं। आप मकरासन कीजिए। कभी-कभी छोटे बच्चे दोनों कोहनियों को जमीन पर रख अपनी हथेलियों में चेहरे को रख लेते हैं और दोनों पैर चलाते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी में मूवमेंट होती है। यह मकरासन है इसे मजाक में टीवी वाचिंग पोज भी कहते हैं। इसी तरह से योग में कई सरल तकनीकें हैं जिन्हें आप घर में प्रयोग कर सकते हैं। इसमें 75 प्रतिशत शरीर जमीन पर होता है। घुटनों से लेकर पेट तक आप जमीन पर होते हैं। फेफड़े व दिल ऊपर होते हैं और पंपिंग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। गुरुत्वाकर्षण की स्थिति सब जगह बराबर आदर्श रहती है। स्पाइन की एस शेप बनी रहती है। ब्लड की सप्लाई ठीक हो जाती है। 26 बर्टिब्रा एक लाइन में आने शुरू हो जाते हैं और आपकी ऊर्जा खुलकर बहने लगती है। आपकी मांसपेशियां तनावमुक्त हो जाती हैं। इस आसन में जहां साइटिक नर्व दब रही है वह क्षेत्र धीरे से खुल जाता है। उसकी स्थिति सही हो जाती है। वहां से दबाव हट जाता है और आपको तुरंत आराम मिल जाता है। यदि आप सही प्रकार से आसन करते हैं तो सब कुछ सही हो जाता है।

डा. लक्ष्मी नारायण जोशी, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार

प्राकृतिक ध्वनियां देती हैं सुकून

हम नाद मेडिटेशन सिखाते हैं। नाद का मतलब ध्वनि है। नाद योग हठ योग प्रदीपिका का ही एक भाग है। मैंने अपनी रिसर्च में पाया है कि यह एक महत्वपूर्ण पहलू है क्योंकि हम आवाजों के बीच ही रहते हैं और हम खुद में एक आवाज हैं यानी हम कंपन से बने हैं। यह बात क्वांटम फिजिक्स भी कहती है। अगर हम अच्छी लय वाली ध्वनि को सुनते हैं तो हम तनाव भूल जाते हैं। हम शांत होते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। इस दौरान हम कोलाहल से दूर चले जाते हैं और खुद में सकारात्मक बदलाव देख सकते हैं। अगर हम विकृत नाद यानी खराब ध्वनि सुनते हैं तो हमारे भीतर व्यवधान पैदा होता है। इसे लोग साउंड पॉल्यूशन भी बोलते हैं। अगर आपको इससे छुटकारा पाना है तो प्राकृतिक ध्वनियां सुननी होंगी। इस ध्वनि को सुनते-सुनते हम आंतरिक नाद में चले जाते हैं जिसे हमने ओंकार कहा है। भ्रामरी, समुद्र की आवाज, वीणा की आवाज जैसी ध्वनियां बिना संवेदनशील अंग के सुनाई देती हैं।

योगगुरु डा. नवदीप जोशी, संस्थापक, नवयोग एवं प्राकृतिक चिकित्सक

 

घर में तीन फीट की जगह है काफी

लाकडाउन के कारण सब लोगों को पता चल गया है कि हमें घर में तीन फीट की जगह चाहिए जहां बैठकर या लेटकर हम योग कर सकते हैं। इसके लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। बिस्तर से उठकर दैनिक क्रिया के बाद आप योग करें। मैं छह साल का था तब मैंने योग शुरू किया था। मैं समझता हूं कि पांच साल के बच्चे से लेकर नब्बे साल के बुजुर्ग भी योग को अपनी जीवनशैली बना सकते हैं। योग एक जीवनशैली है। योग का मतलब जुडऩा है। आसन, प्राणायाम, ध्यान हमें बहुत मदद कर सकता है। हम सर्वा पर विश्वास करते हैं। जैसे हम खाते हैं, पीते हैं, जीते हैं इसी तरह से योग को भी जीवनशैली का अटूट हिस्सा बनाना होगा। योग से न केवल मैं शारीरिक रूप से सशक्त हुआ बल्कि मानसिक रूप से सशक्त हुआ। हमने करीब दस लाख लोगों को मदद की है।

सर्वेश शशि, फाउंडर, सर्वायोग

 

योग मेरी दिनचर्या का अंग

मैं योग की शुक्रगुजार रहूंगी। उसके चलते मैं डिप्रेशन से निकल पाई। बाद में सही इलाज और नियमित योग ने असर दिखाया। उसके बाद से योग मेरी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। रोजाना घर पर दो घंटे नियमित रूप से योग करती हूं। मांसपेशियों को जिस आराम की जरूरत होती है, वह आराम योग से मिलता है।

दीपिका पादुकोण, बॉलीवुड एक्टर

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