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World Hypertension Day 2021: कोरोना के दौरान हाई बीपी का आसान उपाय, योग, ध्यान और व्यायाम

नियमित योग, ध्यान व व्यायाम करें। सकारात्मक रहें। अच्छी नींद लें। इससे तनाव कम होता है।

World Hypertension Day 2021 कोरोना के कारण शरीर के आंतरिक हिस्से में इनफ्लामेशन होता है जिससे ठीक होने के बाद हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी बीमारियां देखी जा रही हैं। इसलिए एक साल तक सतर्क रहने की जरूरत है।

Sanjay PokhriyalMon, 17 May 2021 12:14 PM (IST)

नई दिल्‍ली, जेएनएन। कोरोना महामारी के कारण लोगों में व्याप्त तनाव व घबराहट जैसी समस्याओं के कारण स्वाभाविक रूप से हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप की समस्या बढ़ सकती है। लेकिन एलोपैथ, आयुर्वेद और होम्योपैथ की उपचार पद्धतियों का उपयोग और जीवन शैली में मामूली बदलाव कर हम इस समस्या से पार पा सकते हैं।

बेहद गंभीर हैं हालात: दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कार्डियलजी विभाग के प्रोफेसर डा. अंबुज राय बताते हैं कि देश की वयस्क आबादी में हर चार में एक व्यक्ति इस समस्या से पीड़ित हैं। करीब 25 फीसद लोग प्री हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं, जिसमें युवा भी शामिल हैं। करीब 10 फीसद लोग कोरोना के कारण उत्पन्न तनाव व घबराहट के कारण उच्च रक्तचाप के मरीज बन सकते हैं। हालत यह है कि देश में करीब 25 फीसद लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा ज्यादा है। समस्या यह है कि आधे लोगों को इसका पता ही नहीं होता। मौजूदा समय में अस्पताल भी सिर्फ कोरोना का इलाज कर रहे हैं, जबकि उच्च रक्तचाप का भी इलाज करना चाहिए, ताकि दूसरी बीमारियां नियंत्रित रहें।

कोरोना से ठीक होने के बाद भी खतरा: कोरोना के कारण शरीर के आंतरिक हिस्से में इनफ्लामेशन होता है, जिससे ठीक होने के बाद हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी बीमारियां देखी जा रही हैं। इसलिए एक साल तक सतर्क रहने की जरूरत है।

इन लक्षण को न करें नजरअंदाज:

सिर दर्द, कमजोरी व सुस्ती महसूस होना, चेस्ट में भारीपन जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आहार में इन नियमों का करें पालन अल्कोहल नहीं लें, चाय-काफी से भी बचें। कम वसा वाले डेयरी उत्पाद ही प्रयोग में लाएं। नमक का इस्तेमाल कम, हरी सब्जियों व फलों का इस्तेमाल अधिक करना चाहिए। शरीर का वजन पांच से 10 किलोग्राम कम करने पर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर पांच मिमी कम होता है।

योग करें, सकारात्मक रहें

नियमित योग, ध्यान व व्यायाम करें। सकारात्मक रहें। अच्छी नींद लें। इससे तनाव कम होता है।

दवा का इस्तेमाल रखें जारी

उच्च रक्तचाप के मरीज पहले से चल रही दवा को जारी रखें। खून पतला करने की दवा चल रही है तो जारी रखें। दर्द निवारक दवाओं से बचें।

आयुर्वेद में कोई दुष्प्रभाव नहीं

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में आयुर्वेद विभाग के कायचिकित्सक प्रो. जेएस त्रिपाठी बताते हैं कि आयुर्वेद की एक ही औषधि सर्पगंधा घन वटी इस रोग से मुक्ति दिलाएगी। दो टैबलेट रोज लें, यदि समस्या कम है तो एक से भी लाभ दिखेगा। मुक्ता पिष्टी और प्रवाल पिष्टी (250 एमजी) दो बार रोजाना लिया जा सकता है। भोजन के बाद अर्जुनारिष्ट 15-20 एमजी भी लाभप्रद होता है। शंखपुष्पी चूर्ण, पुनर्नवा चूर्ण, अर्जुन चूर्ण का डेढ़ ग्राम और 250 ग्राम अकीक पिष्टी का मिश्रण उपयोग करें काफी बेहतर लाभ मिलेगा।

होम्योपैथ: कोलकाता के जाने-माने होम्योपैथिक चिकित्सक देबांजन मुखर्जी के मुताबिक होम्योपैथी की चिकित्सा रोगी की आदत, जीवनशैली व प्रकृति पर निर्भर करती है, इसलिए किसी खास दवा की सलाह नहीं दी जा सकती।

(इनपुट : दिल्ली से रणविजय, वाराणसी से हिमांशु अस्थाना और कोलकाता से इंद्रजीत)

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