क्यों न आपके खिलाफ शुरू की जाए अवमानना की कार्रवाई : हाई कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

केंद्र सरकार की हर दलील को अस्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा की पीठ ने ऑक्सीजन आपूर्ति को देख रहे केंद्र सरकार के उच्च अधिकारी पीयूष गाेयल व सुमिता डाबरा को सुनवाई के दौरान पेश होने का निर्देश दिया।

Prateek KumarWed, 05 May 2021 04:13 PM (IST)

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। आवंटित ऑक्सीजन की आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार के रुख पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के 30 अप्रैल व इस अदालत के एक मई के आदेश का अनुपालन नहीं करने पर बताएं क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। केंद्र सरकार की हर दलील को अस्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा की पीठ ने ऑक्सीजन आपूर्ति को देख रहे केंद्र सरकार के उच्च अधिकारी पीयूष गाेयल व सुमिता डाबरा को सुनवाई के दौरान पेश होने का निर्देश दिया। हलफनामा दायर करने के लिए मोहलत मांगने की केंद्र सरकार की दलील पर पीठ ने कहा कि हम समझने में नाकाम है कि आखिर इससे क्या होगा जबकि 700 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होगी। पीठ ने टिप्पणी की कि दिल्ली को आवंटित 490 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की केंद्र सरकार एक भी दिन आपूर्ति नहीं कर सका। पीठ ने एएसजी से से कहा कि हम बाकी निर्देशों का अनुपालन बाद में देख सकते हैं, लेकिन 700 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति आपको करनी होगी।

पीठ ने केंद्र सरकार के एडिशनल सालिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा की उस दलील से असहमति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत द्वारा 700 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति का आदेश नहीं दिया गया है। पीठ ने कहा कि पढ़ने से साफ पता चला है कि शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को तत्काल ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने ऑक्सीजन की मांग 700 मैट्रिक टन बढ़ने की दिल्ली सरकार की दलील को रिकार्ड पर लेकर केंद्र सरकार को तत्काल इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है।

पीठ ने कहा कि अगर एएसजी को इसमें कोई संदेश है तो अगला पैरा से यह दूर होता है। शीर्ष अदालत ने नोट किया है कि सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी को दिक्कत नहीं होगी। पीठ ने कहा कि इसके बावजूद भी बड़े अस्पतालों और छोटे नर्सिंग होम की जरूरत नहीं पूरी हुई और उनके पास ऑक्सीजन नहीं है। पीठ ने एएसजी की उस दलील को भी अस्वीकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली सरकार मौजूदा आधारभूत ढांचा के हिसाब से प्रति दिन 700 मैट्रिक टन आपूर्ति पाने की हकदार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि दिल्ली को ऑक्सीजन आपूर्ति पर तत्काल राहत दी जाए और मांग 700 मैैट्रिक टन की है।

आदेश के अनुपालन के सिवा नहीं सुनी जाएगी कोई दलील

पीठ ने केंद्र सरकार की तमाम दलीलों को खारिज करते हुए साफ किया कि अब अदालत को कोई जवाब नहीं चाहिए। पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार छोटी जानकारी देने के लिए समय मांग कर लोगों को मरने देने के लिए कह रही है। पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा कि शीर्ष अदालत से लेकर इस अदालत के आदेश के बावजूद भी आप 700 मैट्रिक टन आपूर्ति न करें। हम अदालत के आदेश का अनुपालन करने के सिवा कोई दलील नहीं सुनेंगे। पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब एएसजी ने कहा कि हम बुधवार को हलफनामा दायर कर आवंटन से लेकर आपूर्ति की सभी स्थिति साफ करेंगे। दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसल राहुल मेहरा ने इसके जवाब में कहा कि यह हलफनामा-हलफनामा खेलने का वक्त नहीं है। यहां लोगों की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

अन्य राज्यों के टैंकर का दिल्ली के लिए इस्तेमाल पर साफ करें स्थिति

सुनवाई के दौरान राहुल मेहरा ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भारत में कुल 1631 टैंकर हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास जरूरत से ज्यादा टैंकर है और हमें इसे उन राज्यों से टेक-ओवर करना चाहिए, जहां इसकी ज्यादा जरूरत नहीं है, ताकि दिल्ली को ऑक्सीजन की मांग को पूरा किया जा सके। पीठ ने इस पर एएसजी से कहा कि आपके पास टैंकर मौजूद हैं। इसके बावजूद भी आप अपना काम नहीं करना चाहते हैं। पीठ ने एएसजी से कहा कि वे महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से टैंकर को डायवर्ट करने के मामले पर केंद्र सरकार से निर्देश लेकर अदालत को सूचित करें। एएसजी ने इस दौरान पीठ को बताया कि दिल्ली में सोमवार रात को 433 मैट्रिक टन और मंगलवार सुबह आठ बजे तक 307 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है, जबकि शाम को और ऑक्सीजन पहुंच रही है। इस पर पीठ ने कहा कि पर सवाल तो यही है कि आवंटित ऑक्सीजन की आपूर्ति कब होगी।

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