मनजिंदर सिंह सिरसा SAD छोड़ क्यों भाजपा में हुए शामिल? हरमीत सिंह कालका ने बताई वजह

शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) का दावा है कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा के भाजपा में शामिल होने के बावजूद पार्टी मजबूत स्थिति में है। पार्टी में किसी तरह का कोई विवाद नहीं है।

Mangal YadavFri, 03 Dec 2021 06:47 AM (IST)
शिअद बादल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका। फाइल फोटो

नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) का दावा है कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा के भाजपा में शामिल होने के बावजूद पार्टी मजबूत स्थिति में है। पार्टी में किसी तरह का कोई विवाद नहीं है और डीएसजीएमसी में उसका अध्यक्ष बनेगा। शिअद बादल के प्रदेश अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कमेटी के नवनिर्वाचित सदस्यों के साथ प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने सिरसा को पूरा मान सम्मान दिया। पार्टी में उनका कोई विवाद नहीं था। चुनाव हारने के बावजूद पार्टी के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें डीएसजीएमसी का अध्यक्ष बनाने की घोषणा की थी। चुनाव परिणाम के कुछ ही घंटे के अंदर उन्हें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का नामित सदस्य मनोनित किया था। संभव है वह निजी कारण या राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा में गए होंगे।

हरमीत सिंह कालका ने कहा कि उनके जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सभी नवनिर्वाचित सदस्य पार्टी के साथ खड़े हैं। निश्चित रूप से कमेटी में फिर से शिअद बादल का अध्यक्ष बनेगा। सिरसा पर भ्रष्टाचार के लगे आरोपों के बारे में उन्होंने कहा कि जहां तक उन्हें लगता है इसमें कोई सच्चाई नहीं है। वह आरोपों से सहमत नहीं है। मामले की जांच चल रही है और सब स्पष्ट हो जाएगा।

बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) छोड़कर बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व गजेंद्र सिंह शेखावत और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं पंजाब प्रभारी दुष्यंत गौतम ने उनका पार्टी में स्वागत किया। इससे पहले उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी।

सिरसा शिअद बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नजदीकी समझे जाते हैं। लेकिन अचानक पार्टी छोड़कर सबको चौंका दिया था। वह अकाली-भाजपा गठबंधन से राजौरी गार्डन से विधायक भी रह चुके हैं। बुधवार को उन्होंने कमेटी के नवनिर्वाचित सदस्यों व अन्य अकाली नेताओं के साथ बैठक करने के बाद डीएसजीएमसी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

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