kisan Andolan से इन 6 बड़ी वजहों के चलते अलग हुए 2 बड़े किसान संगठन

दिल्ली में हुई हिंसा के अलावा भी कुछ अन्य वजहें भी हैं।

Kisan Andolan दिल्ली में हुई हिंसा के अलावा भी कुछ अन्य वजहें भी हैं जिसकी वजह से दोनों गुट किसान आंदोलन से अलग हुए हैं। आइये हम बताते हैं दोनों संगठनों के किसान आंदोलन से अलग होने की वजहें।

Publish Date:Wed, 27 Jan 2021 08:13 PM (IST) Author: JP Yadav

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Kisan Andolan:  तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली-एनसीआर में चल रहे किसान आंदोलन में बुधवार को उस दौरान हैरान करने वाला मोड़ आ गया, जब इससे जुड़े 2 संगठनों खुद को अलग कर लिया। दरअसल, मंगलवार को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने के दौरान हुई हिंसा से नाराज राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने गाजीपुर और नोएडा बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन को वापस ले लिया। दिल्ली में हुई हिंसा के अलावा भी कुछ अन्य वजहें भी हैं, जिसकी वजह से दोनों गुटों ने किसान आंदोलन से अलग हुए हैं। आइये हम बता हैं दोनों संगठनों के किसान आंदोलन से अलग होने की वजहें।

वजह-एक

मंगलवार को ट्रैक्टर परेड निकालने के दौरान राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा के बाद जनमानस में भी किसान संगठनों की छवि खराब हुई है। दिल्ली दंगों के बाद 2 करोड़ दिल्ली वालों ने ऐसा नजारा देखा, जब कुछ उपद्रवी किसान सड़कों पर गुंडों की तरह तलवारें और लाठी डंडे लहराते नजर आए। दोनों किसान संगठनों राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने यह महसूस किया कि यह आंदोलन जनमानस के मन में नकारात्मक छवि बना रहा है तो उन्होंने इससे पीछा छुड़ाना मुनासिब समझा।

वजह-2

दिल्ली के लाल किला पर तिरंगे के समानांतर अन्य झंडा फहराने से आम लोग ही नहीं, बल्कि हरियाणा की दहिया खाप के साथ किसान संगठन भी नाराज नजर आए। और आखिर में 24 घंटे के भीतर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने किसान आंदोलन से मोहभंग होने का एलान कर दिया।

वजह-3

बुधवार को मीडिया से रूबरू किसान मजदूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने राकेश टिकैत को घेरते हुए कहा कि हम लोगों को पिटवाने के लिए यहां नहीं आए हैं। देश को हम बदनाम नहीं करना चाहते हैं। उनका इशारा मंगलवार को किसानों की कई जगहों पर हुई पिटाई से था। 

वजह-4

किसान मजदूर संगठन के नेता वीएम सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक भी मीटिंग में गन्ना किसानों की मांग नहीं उठाई। बता दें कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के पैसे का मुद्दा अहम है। इसको लेकर कई बार मांग भी की जा चुकी है।

वजह-5 

किसान नेता वीएम सिंह ने बुधवार को कहा कि हम किसी ऐसे व्यक्ति (राकेश टिकैत) के साथ विरोध को आगे नहीं बढ़ा सकते, जिसकी दिशा कुछ और हो। इसलिए, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं, लेकिन वीएम सिंह और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति इस विरोध को तुरंत वापस ले रही है।

वजह-6

लाल किला पर एक संगठन का झंडा फहराने से भी वीएम सिंह नाराज हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का झंडा, गरिमा, मर्यादा सबकी है। उस मर्यादा को अगर भंग किया है, भंग करने वाले गलत हैं और जिन्होंने भंग करने दिया, वह भी गलत हैं। आईटीओ में एक साथी शहीद भी हो गया। जो लेकर गया या जिसने उकसाया उसके खिलाफ पूरी कार्रवाई होनी चाहिए।

गौरतलब है कि मंगलवार को जब समूचा देश 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा था तो उसी समय विभिन्न किसान संगठनों ने दिल्ली की सीमाओं से किसान ट्रैक्टर परेड निकाली। वहीं, सुबह 9 बजे के यह परेड आगे जाकर हिंसक घटनाओं में परिवर्तित हो गई। हद तो तब हो गई जब उपद्रवी किसानों ने लाल किले की प्राचीर पर तिरंगे के समानांतर अपना झंडा लगा दिया।

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