Ramlila 2021: रामलीला से युवा पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास सराहनीय: अर्जुन राम मेघवाल

केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि रामलीला जैसी विधाओं के जरिये सांस्कृतिक विरासत से युवा पीढ़ी को अवगत करवाने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन संदेश सभी सीमाओं से परे सभी लोगों के लिए है।

Mangal YadavThu, 14 Oct 2021 05:01 PM (IST)
रामलीला से युवा पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास सराहनीय: अर्जुन मेघवाल

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि रामलीला जैसी विधाओं के जरिये सांस्कृतिक विरासत से युवा पीढ़ी को अवगत करवाने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन संदेश सभी सीमाओं से परे सभी लोगों के लिए है। यह संदेश जन-जन तक पहुंचना चाहिए। इस दिशा में रामलीला के माध्यम से अद्भुत प्रयास हो रहा है। वह लालकिला परिसर में चल रही लव कुश रामलीला को देखने पहुंचे थे।

इस अवसर पर वह राममय नजर आए और उन्होंने ‘त्रिभुवन की सेना चली, विष्णु है राम के रूप में..’ गीत भी गाया। उनके गीत के साथ प्रभु राम की सेना लंका की ओर बढ़ चली। यह गीत लव कुश रामलीला के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने लिखी है। इसके पहले रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को गदा और शाल भेंटकर स्वागत किया।

उत्तरी दिल्ली के पूर्व महापौर अवतार सिंह कुंभकरण की भूमिका को गरजती आवाज के साथ दमदार तरीके से मंचित किया। बुधवार को कई देशों के राजदूत भी मंचन देखने पहुंचे।

कोरोना ने घटा दिया दशानन का कद

राम से युद्ध से पहले ही कोरोना ने रावण के कद को घटा दिया है। दशानन पर महामारी की जोरदार मार पड़ी है। इस बार उसकी ऊंचाई घटकर आधी हो गई है। कोरोना के पहले रावण, मेघनाद और कुंभकरण का पुतला 60-60 फुट का होता था, जो इस वर्ष घटकर महज 30-30 फुट का रह गया है।

इस वर्ष दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध का असर भी रावण के पुतले पर दिखाई देगा। बगैर पटाखे के पुतले जलेंगे। पटाखों की रोशनी और शोर में पुतलों को जलते देखने का अलग आनंद था। ऐसे में पटाखों की भरपाई साउंड और लाइट से करने की कोशिश होगी। पुतला बनाने वाले कलाकार आजम प्रधान ने बताया कि कोरोना के चलते रामलीला आयोजन को अनुमति काफी बाद में मिली। इस कारण तैयारियों को काफी कम समय मिला है।

पहले जहां रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले आयोजन स्थल पर दो माह पहले ही बनने शुरू हो जाते थे, वहीं इस बार मुश्किल से एक माह पहले तैयारी शुरू की गई थी। इस बार दिल्ली में रामलीला का आयोजन कम हो रहा है तो कुछ ही रावण जलेंगे।

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