फसल तक जरूरत के मुताबिक धूप व पानी पहुंचाएगा छाता

यूपी के शिक्षक डॉ. प्रवीण कुमार मडुरी व छात्र कुशाग्र सिंह व छात्रा अपूर्वा सोनी की तीन सदस्यीय टीम ने क्रॉप शेल्टर ऐंड वाटर हार्वेस्टिंग डिवाइस बनाया है। यह एक तरह का छाता है जो खेत में फसलों के मुताबिक धूप व गर्मी और बारिश का पानी का उपलब्ध कराएगा।

Jp YadavTue, 03 Aug 2021 10:42 AM (IST)
फसल तक जरूरत के मुताबिक धूप व पानी पहुंचाएगा 'छाता'

नई दिल्ली/नोएडा [अर्पित त्रिपाठी]। जलवायु परिवर्तन का असर हम सभी इन दिनों साफतौर पर देख रहे हैं। गर्मी का बढ़ना, कम समय में अधिक बारिश, जिसका जनजीवन पर सीधे तौर पर असर पड़ रहा है, खासकर फसलों पर। जलवायु परिवर्तन के चलते फसलों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव से बचाव का नायाब तरीका ग्रेटर नोएडा के गलगोटिया कॉलेज के शिक्षक डॉ. प्रवीण कुमार मडुरी व छात्र कुशाग्र सिंह व छात्रा अपूर्वा सोनी की तीन सदस्यीय टीम ने 'क्रॉप शेल्टर ऐंड वाटर हार्वेस्टिंग डिवाइस' बनाया है। यह एक तरह का छाता है, जो खेत में फसलों के मुताबिक धूप व गर्मी और बारिश का पानी का उपलब्ध कराएगा। इसका पेटेंट भी उन्हें मिल गया है। अगले दो से चार महीने में यह किसानों को उपलब्ध हो जाएगी।

ऐसे करेगा काम

डॉ. प्रवीण कुमार मडुरी ने बताया कि एडवांस पॉलिस्टर से बना यह छाता छोटे-छोटे पोल पर लगेगा। उदाहरण के तौर पर कोई फसल है जो 45 डिग्री तापमान तक गर्मी झेल सकती है। इससे अधिक तापमान में वह जल जाती है। छाते में लगी डिवाइस में पहले से तापमान फीड कर दिया जाएगा। तापमान के बढ़ते ही छाता खुल जाएगा और छाते के अंदर तापमान फसल के मुताबिक बना रहेगा।

पॉलिस्टर इस तरह का बना है, जिससे धूप तो पहुंचेगी, लेकिन उसकी गर्मी अधिक नहीं होगी। इसी तरह उदाहरण के तौर कोई फसल के लिए अधिकतम बारिश 100 मिलीलीटर उपयुक्त है। जैसे ही बारिश 102 मिलीलीटर से अधिक होगी तभी ये छाता खुल जाएगा। छाते में एक पोल लगा होगा, जिसके माध्यम से पानी भूजल स्तर पर लगे टैंक में चला जाएगा।

प्रवीण ने बताया कि उन्हें इस डिवाइस को बनाने की प्रेरणा किसानों से लगातार संपर्क में रहने और फसल संबंधी शिकायत के जरिये आया। ये डिवाइस बैटरी से चलेगा जिसमें बिजली की खपत काफी कम होगी। पांच हजार गज में 20 छाते लगाने पड़ेंगे। 

पक्षियों से भी करेगा बचाव

छाते में सिल्वर लाइनिंग लगी होगी। पक्षी को ये लाइनिंग बिजली का एहसास कराएगी, जिससे वे करीब नहीं आएंगे।

किसी भी मौसम में कोई भी फसल

डॉ. प्रवीण ने बताया कि एक डिवाइस और तैयार की जा रही है जो अगले दो महीने तक बन जाएगी। इसके जरिये किसी भी मौसम में कोई भी फसल उगाई जा सकेगी। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी एक डिवाइस तैयार हो रही है जो हवा में मौजूद नमी से पानी निकालने का काम करेगी।

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