दिल्ली में खून की कमी से पीड़ित हैं दो तिहाई नौनिहाल

पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दिल्ली में एनीमिया से पीड़ित करीब पांच साल की उम्र वाले बच्चों की संख्या 10 फीसद बढ़ गई है। इस वजह से दिल्ली में दो तिहाई से ज्यादा नौनिहाल खून की कमी (एनीमिया) से पीड़ित हैं।

Jp YadavMon, 29 Nov 2021 10:30 AM (IST)
दिल्ली में खून की कमी से पीड़ित हैं दो तिहाई नौनिहाल

नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। कोरोना के दौर में लोगों का कामकाज प्रभावित हुआ और प्रति आय पर भी असर पड़ा। अब इसे कोरोना का असर कहें या चाहे कुछ और, लेकिन पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दिल्ली में एनीमिया से पीड़ित करीब पांच साल की उम्र वाले बच्चों की संख्या 10 फीसद बढ़ गई है। इस वजह से दिल्ली में दो तिहाई से ज्यादा नौनिहाल खून की कमी (एनीमिया) से पीड़ित हैं। डाक्टर कहते हैं कि खानपान में पर्याप्त पौष्टिक आहार की कमी से यह बीमारी होती है। इससे बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।

दिल्ली में 9,486 परिवारों पर यह सर्वे दो चरणों में कोरोना से पहले चार जनवरी 2020 से 21 मार्च 2020 के बीच और कोरोना के दौर में 21 नवंबर 2020 से 20 जनवरी 2021 के बीच हुआ। सर्वे में यह बात सामने आई है कि छह माह से 59 माह की उम्र वाले 69.2 फीसद बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। पांच साल पहले चौथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में यह आंकड़ा 59.7 फीसद है। मौजूदा समय में शहरी क्षेत्र में 68.7 फीसद व ग्रामीण क्षेत्र में 81.7 फीसद बच्चे एनीमिया से पीड़ित पाए गए।

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डा. अजय गंभीर ने कहा कि एनीमिया की बीमारी आयरन की कमी से होती है। इसका कारण यह है कि बच्चों को ठोस आहार कम दिया जा रहा है। खानपान में जो चीजें इस्तेमाल हो रही हैं उसमें भी आयरन युक्त खाद्य वस्तुओं की कमी है। इसलिए बच्चों को रोटी व चावल भी पर्याप्त मात्र में खिलाना भी जरूरी है। इसके अलावा बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या होती है। मनोवैज्ञानिक तौर पर सोचें तो आयरन की कमी को दूर करने के लिए फोलिक एसिड की दवा अक्सर लेना संभव नहीं हो पाता। इसलिए चावल में फोलिक एसिड युक्त पोषक तत्व मिलाकर फोर्टिफायड चावल का इस्तेमाल शुरू करने की बात हो रही है।

बच्चों का कद नहीं बढ़ पाने का एक बड़ा कारण एनीमिया व पोषण की कमी है। इसके मद्देनजर ही स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम में फोलिक एसिड को शामिल किया गया था।

गौरतलब है कि मिड-डे मील के आहार व घर में भी बच्चों के खानपान में पौष्टिक चीजों को शामिल कर इस समस्या को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में दूर दराज के क्षेत्रों से काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं। झुग्गी बस्तियों के बच्चों व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों में एनीमिया की परेशानी अधिक होती है। इसलिए संख्या यहां अधिक है।

सर्वे के अनुसार छह से 23 माह तक के 16.8 फीसद बच्चों को ही पर्याप्त आहार मिल पाता है। यानी दो साल की उम्र तक के 83.2 फीसद बच्चों को पर्याप्त आहार नहीं मिल पाता। हालांकि, पिछले सर्वे की तुलना में इस आंकड़े में कुछ सुधार हुआ है। पांच साल की उम्र के 30.9 फीसद बच्चे छोटे कद के हैं। पहले ऐसे बच्चों की संख्या 31.9 फीसद थी। वहीं सामान्य से कम वजन वाले बच्चों की संख्या 21.8 फीसद व अधिक वजन वाले बच्चों की संख्या चार फीसद दर्ज की गई है।

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