आरपी सेंटर में 13.80 करोड़ का घाेटाला मामले में एम्स के दो कर्मचारी गिरफ्तार

ई-वे बिल की जांच से पता चला कि जिन वाहनों को एम्स में उक्त सामानों की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल किया गया दिखाया था उसे कभी भी एम्स में ई-वे बिल में उल्लिखित किसी भी तारीख पर डिलीवर नहीं किया था।

Prateek KumarThu, 25 Nov 2021 10:07 PM (IST)
आरोपितों में एक एम्स का स्टोर कीपर व दूसरा कार्यक्रम सहायक (संविदा) शामिल

नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के आरपी सेंटर में चिकित्सा उपकरणों की खरीद में हुए 13.80 करोड़ का घोटाला मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने एम्स के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में एम्स का स्टोर कीपर बिजेंद्र कुमार और कार्यक्रम सहायक (संविदा) नवीन कुमार शामिल हैं। इनसे पहले पुलिस ने उक्त फर्म की मालकिन को गिरफ्तार किया था जिससे फर्जी तरीके से खरीददारी दिखाई गई थी।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर आरके सिंह के मुताबिक कुछ महीना पहले चिकित्सा अधीक्षक, राजेंद्र प्रसाद आई सेंटर डा. अनूप डागा ने आर्थिक अपराध शाखा में अनुमानित 5 करोड़ के गबन के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान 13.85 करोड़ रुपये का गबन पाया गया। यह भी पता चला कि चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति वास्तव में कभी नहीं की गई थी, लेकिन मैसर्स स्नेह एंटरप्राइजेज के नाम पर आपूर्तिकर्ता फर्म को भुगतान जारी कर किया गया था।

ई-वे बिल की जांच से पता चला कि जिन वाहनों को एम्स में उक्त सामानों की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल किया गया दिखाया था, उसे कभी भी एम्स में ई-वे बिल में उल्लिखित किसी भी तारीख पर डिलीवर नहीं किया था। ई-वे बिल पर दिखने वाले वाहनों के जीपीएस लॉग की जांच से पता चला कि उसकी लोकेशन दिल्ली से बाहर थी। आरोपित बिजेंद्र कुमार एम्स में स्टोरकीपर है। उसने जाली खरीद प्रोफार्मा, आपूर्ति आदेश, निरीक्षण नोट तैयार किया था और मैसर्स स्नेह एंटरप्राइजेज के पक्ष में भुगतान कर दिया था।

नवीन कुमार संविदा कर्मचारी था और डॉ. अतुल कुमार, पूर्व प्रमुख डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र केंद्र के कार्यालय में कार्यक्रम सहायक के पद पर तैनात था। माल के लिए मांगपत्र नवीन कुमार की आधिकारिक आईडी के माध्यम से जारी किए गए थे और उसके द्वारा सत्यापित भी किए गए थे। इस तरह की आपूर्ति के उद्देश्य से एम्स में बनाए गए सभी मैनुअल और डिजिटल रिकॉर्ड से आरोपित फर्म की मिलीभगत से आरोपितों के आपराधिक कृत्यों का पता चला।

जांच के दौरान पता चला था कि बिजेंद्र कुमार और नवीन कुमार दोनों ने आरोपित फर्म की मिलीभगत से जाली सप्लाई ऑर्डर जारी किए थे। जाली आपूर्ति आदेशों के जवाब में आरोपित फर्म ने माल की भौतिक डिलीवरी के बिना केवल चालान, डिलीवरी चालान जमा किए। सामान की रसीदें जनरल स्टोर के अन्य रजिस्टरों में नहीं मिलीं। बिजेंद्र कुमार ने बिल पेश कर स्वयं स्वीकृत कराया। नकली डिलीवरी के इन बिलों को मंजूरी मिलने के बाद ठगी की गई राशि को मैसर्स स्नेह एंटरप्राइजेज नाम की फर्म के खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता था।

डीसीपी राजीव रंजन, एसीपी कपिल पराशर व इंस्पेक्ट दिनेश दहिया के नेतृत्व में एसआई सुरेश कुमार की टीम ने जांच के बाद बुधवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। बिजेंद्र कुमार ,गोकलपुरी व नवीन कुमार, करोलबाग का रहने वाला है।

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