Toolkit Case: स्पेशल सेल तीन प्रमुख बिंदुओं को ध्यान में रखकर कर रही जांच, निकिता ने दायर की जमानत याचिका

निकिता जैकब की अग्रिम जमानत अर्जी पर पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई।

उपद्रव व टूलकिट के आरोपितों के बीच संबंध तलाशने में जुटी पुलिस। दोनों को जोड़ने वाली कड़ी नहीं मिलने पर कमजोर पड़ेगा पुलिस का पक्ष। टूलकिट मामले में आरोपित निकिता जैकब की अग्रिम जमानत अर्जी पर मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई।

Vinay Kumar TiwariWed, 03 Mar 2021 01:28 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। टूलकिट मामले में आरोपित निकिता जैकब की अग्रिम जमानत अर्जी पर मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई। कुछ देर की सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि निकिता को 10 मार्च तक बांबे हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत दे रखी है। ऐसे में इस अर्जी को नौ मार्च को सुना जाएगा, तब तक दिल्ली पुलिस इस पर अपना जवाब दाखिल करे। नौ मार्च को ही आरोपित शांतनु मुलुक की अग्रिम जमानत अर्जी पर भी सुनवाई होनी है। दिशा रवि को इस मामले में हाल ही में जमानत मिली है। 

पेशे से अधिवक्ता मुंबई निवासी निकिता जैकब ने अग्रिम जमानत अर्जी में गिरफ्तारी से राहत देने की मांग की है। अर्जी में कहा गया है कि जब पुलिस ने नोटिस जारी किया तो उन्होंने जांच में शामिल होकर पुलिस के सवालों का जवाब दिया। भविष्य में भी वह पुलिस के बुलाने पर जांच में शामिल होती रहेंगी। निकिता को पुलिस ने टूलकिट मामले में दिशा और शांतनु के साथ नामजद किया था। 

तीन पहलुओं पर जांच कर रही सेल 

टूलकिट मामले में साइबर सेल तीन मुख्य पहलुओं पर विस्तृत तफ्तीश में जुटी हुई है। पहला, दिशा रवि, निकिता जैकब व शांतनु मुलुक से विस्तृत पूछताछ में जितनी बातें सामने आई हैं, पुलिस उसकी सत्यता जांच रही है। इनके मोबाइल व लैपटाप की जांच में जो कुछ पाए गए उन्हें सामने लाने की कोशिश की जाएगी। दूसरा, इनके बैंक खाते खंगाले जा रहे हैं ताकि इससे यह पता किया जा सके कि कृषि कानून विरोधी आंदोलन से पहले देश-विदेश से इन्हें फं¨डग हुई अथवा नहीं? फं¨डग के स्नोत का पता लगने पर इस साजिश का भंडाफोड़ हो सकेगा। तीसरा, दिल्ली उपद्रव मामले में गिरफ्तार अथवा फरार आरोपितों से टूलकिट के आरोपितों के बीच की कड़ी का पता लगाना। 

यह वही टूलकिट है, जिसे खालिस्तानी अतांकियों के समर्थकों के इशारों पर कृषि कानूनों के खिलाफ ट्विटर पर अभियान चलाने के लिए तैयार किया गया था। इस टूलकिट के तहत नामी हस्तियों से कृषि कानून के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में ट्वीट कराए गए थे। इसका पता तब चला जब पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने इस टूलकिट को अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट कर दिया। हालांकि कुछ देर बाद ही इसे डिलीट कर दिया गया था, लेकिन तब तक यह वायरल हो चुकी थी। 

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल टूलकिट मामले में शुरुआती सुनवाई के दौरान अदालत में किरकिरी होने के बाद आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटाने में जी जान से जुट गई है। सबसे बड़ी चुनौती साइबर सेल के लिए 26 जनवरी को हुए उपद्रव मामले में गिरफ्तार अथवा फरार आरोपितों का टूलकिट मामले के आरोपितों के बीच की कड़ी जोड़ने की होगी। 

नौ मार्च को साइबर सेल को अदालत में जवाब दाखिल करना है। अगर इनके बीच की कड़ी जोड़ने में पुलिस सफल हो जाती है तब कथित जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की तरह निकिता जैकब व शांतनु मुलुक को भी गिरफ्तार करने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद मामले में जिन 10 अन्य आरोपितों की पहचान हो चुकी है, उनकी गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस कार्रवाई तेज कर सकती है।

पिछले कुछ हफ्ते से पुलिस ने धर पकड़ की कार्रवाई इसलिए बंद कर दी, क्योंकि दिशा रवि की जमानत का विरोध जताने के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाते हुए उन्हें पुख्ता सुबुत पेश करने की नसीहत दी थी। 

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