यमुना खादर को उसका प्राकृतिक सौंदर्य लौटाने के लिए डीएनडी फ्लाइवे के पास बनाया जा रहा पार्क, पढ़िए खूबियां

दो एकड़ के पार्क में 50 देशज प्रजातियों के 12 हजार पौधे लगाए जाएंगे पहले यहां कीकर का जंगल था प्रयोग के तौर पर तीन साल में 700 वर्गमीटर में 2214 देशज पेड़-पौधों का घना जंगल तैयार किया गया है।

Vinay Kumar TiwariSun, 01 Aug 2021 10:38 AM (IST)
प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाजर (पीएसए) टू द गवर्नमेंट आफ इंडिया भी इस पर काम कर रही है।

नई दिल्ली, [अरविंद कुमार द्विवेदी]। राजधानी को कीकर से मुक्त करने के लिए कई स्तर पर विभिन्न परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें कीकर की जगह देशज प्रजातियों के पेड़-पौधे लगाए जा रहे हैं। बारापुला सूर्यघड़ी के पास यमुना खादर में दो एकड़ में एक ऐसा पार्क बनाया जा रहा है जिसमें यमुना खादर की मूल प्रजातियों वाले पेड़-पौधे ही लगाए जाएंगे। प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाजर (पीएसए) टू द गवर्नमेंट आफ इंडिया भी इस पर काम कर रही है।

पीएसए ने डीडीए, आइजीएल व मरुवन फाउंडेशन के साथ मिलकर वर्ष- 2018 में इस पर काम शुरू किया था। जहां यह पार्क विकसित किया जा रहा है वहां पहले कीकर के पेड़ और नाले का पानी भरा होता था। लेकिन अब यहां पर देशज प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं। चार हजार से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं। मरुवन फाउंडेशन के ईकोलाजिस्ट ने बताया कि दिल्ली में देसी पेड़ों का जंगल तैयार करने के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। वर्ष- 2018 में डीडीए ने ट्रायल के रूप में यहां पर पौधे लगाने की अनुमति दी थी। तब 750 वर्गमीटर भूमि में 2214 पौधे लगाए गए थे।

आज ये बड़े पेड़ बन गए हैं। इनमें पलाश, कैम (कृष्ण कदम), देसी बबूल, बेलपत्र, अडूसा, खाबर (यह सिर्फ खादर में पाया जाता है), तीन प्रजातियों के जामुन, अर्जुुन, झाऊ, वेटी वेयर, चित्रक गूलर, महुआ, गुग्गल, बकैन, झाऊ, फराश, कांस घास सफेद सिरस, ढाक, मिस्वाक, गम्हर समेत औषधीय गुण वाले तमाम पेड़ व लताएं शामिल हैं। इस प्रयोग की सफलता के बाद ही डीडीए ने यहां पर दो एकड़ जमीन में पार्क विकसित करने की अनुमति दी है। इस प्रायोगिक जंगल में छोटे, बड़े, लता वाले सभी तरह के पौधे लगाए गए थे। अब यहां एक बहुस्तरीय जंगल तैयार हो गया है। इसमें बड़े पेड़ों की पांच, सपोर्टिंग कैटेगरी की 13 व छोटे पौधों की 26 प्रजातियां लगाई गई थीं।

अधिकारी का जवाब

तत्कालीन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहल पर इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था। जब हमें यह जमीन मिली थी तो यहां सिर्फ कीचड़ और कीकर ही था। लेकिन तकनीक व इच्छाशक्ति के कारण ही अब यहां पर खूबसूरत पार्क बनाने का सपना साकार हो रहा है। यहां आकर लोग मनोरंजन व शुद्ध ताजा हवा के साथ ही प्रकृति व देशज पेड़-पौधों के बारे में ज्ञानवर्धक जानकारियां भी हासिल कर सकेंगे। पार्क को सुंदर व लोगों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए इसमें वाकिंग ट्रैक, पत्थर की सुंदर बेंच, पत्थर की बड़ी कलाकृतियां लगाई जाएंगी।

- शैलजा वैद्य गुप्ता, सीनियर एडवाइजर, प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर टू द गवर्नमेंट आफ इंडिया

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