बेड की स्थिति बताने के लिए अस्पताल में होना चाहिए एक समर्पित कर्मचारी : हाई कोर्ट

वन विभाग के अधिकारियों को भी दी जाये काम की जिम्मेदारी।

पीठ ने इस दौरान दिल्ली सरकार से पूछा कि सेवानिृत्त डाक्टरों को आपदा में लोगों की मदद के लिए लगाने के मामले का क्या हुआ। जवाब में अधिवक्ता सत्यकाम ने बताया कि अपोलो अस्पताल से बात की गई है और मरीजों की टेली-कंसल्टेशन की समस्या इससे दूर हो सकती है।

Prateek KumarFri, 07 May 2021 07:10 AM (IST)

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में बेड न मिलने की समस्या को हल करने के लिए सुझाव देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि बेड की वर्तमान स्थिति काे बताने के लिए प्रत्येक अस्पताल में एक समर्पित कर्मचारी होना चाहिए। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि वह कर्मचारी ऐसा होना चाहिए जिसके पास बेड का लाइव डाटा उपलब्ध हो और वह मरीज के तीमारदार को जानकारी दे सके। पीठ ने इसके साथ ही दिल्ली सरकार से कहा कि वह अपने फोर्स और स्रोत का पूरी ताकत के साथ उपयोग करें। पीठ ने कहा कि आपके पास वन विभाग के इंजीनियर हैं और उनके पास डिग्री भी हैं। ऐसे अधिकारियों को भी आपदा में काम करने के लिए लगाया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत मित्र राजशेखर राव ने पीठ को बताया कि बेड की उपलब्धता वर्तमान समय की एक बड़ी समस्या है और हमें नहीं पता है कि अस्पताल के बाहर कितने लोग बेड के इन्तजार में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास 700 मैट्रिक टन आक्सीजन आ भी जाता है तो हमें बड़ी संख्या में बेड की उपलब्धता रखनी होगी, लेकिन क्या हमारे पास इसके लिए मैनपावर है।

पीठ ने इस दौरान दिल्ली सरकार से पूछा कि सेवानिृत्त डाक्टरों को आपदा में लोगों की मदद के लिए लगाने के मामले का क्या हुआ। इसके जवाब में दिल्ली सरकार के अधिवक्ता सत्यकाम ने बताया कि अपोलो अस्पताल से बात की गई है और मरीजों की टेली-कंसल्टेशन की समस्या इससे दूर हो सकती है। पीठ ने कहा कि जो भी तैयार है तत्काल उसका इस्तेमाल करिये। पीठ ने कहा कि इस संबंध में सरकार को अपील करनी चाहिए और सरकार को लोगों में जागरुकता फैलानी चाहिए।

बीसीडी के मामले में स्थिति रिपोर्ट करें दाखिल

कोरोना संक्रमित अधिवक्ताओं को चिकित्सा सुविधा देने के लिए एक अस्पताल अटैच करने की मांग को लेकर बार काउंसिल आफ दिल्ली (बीसीडी) की याचिका पर पीठ ने दिल्ली सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि इस पर जल्द निर्णय करें। अब तक सरकार ने इस पर कोई फैसला क्यों नहीं किया। पीठ ने निर्देश दिया कि वह ऐसे अस्पताल को चिंहित करे जोकि बीसीडी के साथ अटैच होने के लिए तैयार हो। वहीं, बीसीडी चेयरमैन ने कहा कि वकीलों की मदद के लिए दो करोड़ मिल रहे हैं और उन्हें सरकार से पैसे के बजाए अस्पताल की सुविधा चाहिए। जिसमें आइसीयू बेड और आक्सीजन की सुविधा हो। उन्होंने कहा कि डाॅक्टर का इन्तजाम करने से लेकर कुछ सिलेंडर का इंतजाम वे खुद कर लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल अटैचमेंट का आदेश होता है तो चार दिन के अंदर वे उसमें सारी व्यवस्था कर देंगे।

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