स्‍टूडेंट आगामी सत्र से बीकॉम और एमबीए जैसे कोर्सेज आनलाइन कर सकेंगे, ये विवि करा सकेंगे कोर्स

दिल्ली के आइपी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. दुर्गेश त्रिपाठी ने बताया कि देश के ए प्लस नैक श्रेणी के विश्वविद्यालयों को आनलाइन डिग्री कोर्स चलाने की यूजीसी की यह पहल छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें ज्यादा से ज्यादा शिक्षित करने के उद्देश्य से की गई है।

Sanjay PokhriyalWed, 23 Jun 2021 02:24 PM (IST)
स्‍टूडेंट दाखिले के लिए परेशान होने के बजाय मनपसंद संस्‍थान से आनलाइन डिग्री करके उच्‍च शिक्षा हासिल कर सकते हैं।

नई दिल्‍ली, जेएनएन। कोरोना की वजह से तमाम क्षेत्रों के साथ अध्‍ययन-अध्‍यापन की दुनिया भी काफी हद तक बदल गई है। इस क्रम में एक खास पहल के तहत अब स्‍टूडेंट आगामी सत्र से बीए, बीकॉम, बीबीए, एमए या एमबीए जैसे कोर्सेज अब आनलाइन भी कर सकेंगे यानी अब घर बैठे ये डिग्री कोर्स किये जा सकते हैं। विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से देश के 38 विश्‍वविद्यालयों को आनलाइन फुलटाइम डिग्री कोर्स संचालित करने की अनुमति दे दी गई है। इससे स्‍टूडेंट दाखिले के लिए परेशान होने के बजाय मनपसंद संस्‍थान से आनलाइन डिग्री कोर्स करके उच्‍च शिक्षा हासिल कर सकते हैं।

माना जा रहा है जल्‍द ही देश के अन्‍य विश्‍वविद्यालयों को भी इस तरह के डिग्री कोर्स चलाने की अनुमति मिलेगी, ताकि स्‍टूडेंट्स को उनकी सहूलियत के अनुसार पढ़ाई ज्‍यादा से ज्‍यादा विकल्‍प मिल सकें। आइए जानते हैं, एजुकेशन का यह न्‍यू नार्मल उच्‍च शिक्षा और करियर को आगे बढ़ाने में किस तरह उपयोगी साबित होगा...

कोविड-19 के इस दौर में पिछले एक-डेढ़ साल में कई बदलाव देखने को मिले हैं। स्‍कूल-कालेज बंद होने की स्थिति में आनलाइन क्‍लासेज का मॉडल काफी उपयोगी साबित हुआ है। निजी स्‍कूल-कालेजों के साथ-साथ सरकारी संस्‍थानों ने इस फॉर्मेट को अपने यहां लागू किया और उसका उन्हें भरपूर फायदा भी मिला। आनलाइन पढ़ाई के इसी महत्‍व को देखते हुए विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के 38 विश्‍वविद्यालयों को कुल 171 आनलाइन डिग्री प्रोग्राम चलाने की मंजूरी दी है। पूरी तरह आनलाइन पाठ्यक्रम चलाने की मंजूरी पाने वालों में इन संस्‍थानों में 15 डीम्‍ड, 13 राज्‍य, तीन केंद्रीय और तीन निजी विश्‍वविद्यालय शामिल हैं। यूजीसी की अनुमति मिलने के बाद ये सभी विश्‍वविद्यालय 2021-2022 के इसी शैक्षणिक सत्र से बीए, बीकाम, बीबीए, एमए, एमकाम, एमएससी (मैथ्‍स) और एमबीए जैसे डिग्री कोर्सेज अपने यहां आनलाइन शुरू कर सकते हैं।

विदेशी यूनिवर्सिटी की तर्ज पर पढ़ाई: यूजीसी के फैसले के बाद अब आप सर्टिफिकेट कोर्सेज ही नहीं, देश के नामी कालेजों/विश्‍वविद्यालयों से आनलाइन डिग्री कोर्सेज भी कर सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे विदेश की तमाम यूनिवर्सिटीज यह सुविधा उपलब्‍ध कराती रही हैं। वैसे, नई-नई तकनीक और इंटरनेट के व्‍यापक प्रसार को देखते हुए इस तरह के कोर्सेज की जरूरत काफी बढ़ गई है। इसलिए स्‍टूडेंट की दिलचस्‍पी भी इस तरह के कोर्सेज में काफी देखी जा रही है। कोरोना महामारी के बाद से भारत समेत दुनियाभर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी में अभी तक सुचारू रूप से ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में तमाम स्‍टूडेंट आज के दौर में अपने समय सदुपयोग करते हुए अपने स्किल को अपग्रेड करने के लिए कोर्सेरा, उडेमी जैसे प्लेटफॉर्म के साथ-साथ ऑक्‍सफोर्ड, कैंब्रिज, येल, ड्यूक, जॉन हॉपकिंस जैसी यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज, लंदन जैसे नामी संस्‍थानों से कोर्स कर रहे हैं। उन्‍हें 100 से अधिक सर्टिफिकेट कोर्सेज के विकल्‍प उपलब्ध हैं, जिसका फायदा उन्‍हें अपने करियर को आगे बढ़ाने में मिलता है।

ये विवि करा सकेंगे कोर्स: यूजीसी की नई शैक्षिक व्‍यवस्‍था के अनुसार, फिलहाल देश के अच्‍छे शैक्षिक रिकार्ड वाले विश्‍वविद्यालय ही अभी अपने यहां यह आनलाइन डिग्री कोर्सेज चला सकते हैं। आनलाइन पाठ्यक्रम कराने के लिए विश्‍वविद्यालयों की नैक (राष्‍ट्रीय मूल्‍यांकन व प्रत्‍यानन परिषद) स्‍कोर 3.26 से ज्‍यादा होनी चाहिए या गत तीन वर्षों में कम से कम दो बार उनकी रैकिंग टॉप-100 में रही हो। तभी वे अपने यहां यह कोर्स शुरू करने के लिए आवेदन के पात्र होंगे। जाहिर है आनलाइन के साथ-साथ कोर्स की पढ़ाई और उसके गुणवत्‍ता पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि छात्रों को घर बैठे क्‍वालिटी उच्‍च शिक्षा मिल सके।

फायदे-नुकसान: इसमें दो राय नहीं कि आनलाइन कोर्सेज के संचालन से शैक्षिक संस्‍थान और स्‍टूडेंट, दोनों को ही फायदे हैं। शैक्षिक संस्‍थानों को इस तरह के आनलाइन कोर्सेज से फायदा यह है कि अपने एक ही वीडियो लेक्‍चर/लाइव लेक्‍चर के माध्‍यम से वे एक साथ असीमित संख्‍या में स्‍टूडेंट्स को पढ़ा सकते हैं, उन्‍हें अपना कोर्स करा सकते हैं, क्‍योंकि ऑफलाइन कैंपस कोर्सेज की तरह उनके सामने सीटों की यह बाध्‍यता नहीं होती है। इससे उनके संसाधन और लागत की भी बचत होती है, जिसे वह कोर्स की गुणवत्‍ता बढ़ाने और फैकल्‍टी को अपग्रेड करने में लगा सकते हैं। वहीं, स्‍टूडेंट को कोर्स करने के लिए फिजिकली कालेज/यूनिवर्सिटी जाने की अनिवार्यता नहीं होती। अपनी सुविधानुसार देश में कहीं से भी यह कोर्स किया जा सकता है। इससे स्‍टूडेंट्स को पढ़ाई का खर्च भी कम आ सकता है। विश्‍वविद्यालय-कालेज आने-जाने में रोजाना जो समय लगता है, उसका वह अपनी पढ़ाई के लिए इस्‍तेमाल कर सकेंगे। इस तरह के आनलाइन कोर्सेज कामकाजी लोगों के लिए भी उपयुक्‍त हैं। अपनी स्किल अपग्रेड करने या दूसरे जॉब फील्‍ड में करियर बनाने के लिए इस तरह के कोर्सेज वर्किंग प्रोफेशनल्‍स के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

पढ़ाई पर कम खर्च: देश में जरूरत के मुताबिक आज भी अच्‍छे कालेजों की कमी है। ऐसे में गिनती के जो कालेज/यूनिवर्सिटीज हैं, उनमें दाखिले के लिए स्‍टूडेंट के बीच होड़ लग जाती है। इस तरह के कालेजेज/यूनिवर्सिटीज में दाखिले के लिए अच्‍छे अंक होना सकते जरूरी होता है। ऐसे में अगर किसी तरह इन यूनिवर्सिटीज के कोर्सेज में दाखिला मिल भी जाता है, तो उनकी फीस इतनी ज्यादा होती है कि उन्हें वहन करना हर किसी के बस से बाहर होता है। वहीं, तमाम ऐसे भी स्‍टूडेंट होते हैं, जिन्‍हें तमाम कोशिश के बाद भी अपने पसंदीदा कालेज और कोर्स में दाखिला नहीं मिल पाता। ऐसे में आप आनलाइन वही कोर्स कम खर्च में घर बैठे भी कर सकते हैं।

समय की बचत: स्‍टूडेंट के लिहाज से आनलाइन कोर्सेज का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस तरह का कोई भी कोर्स करने के लिए आपको अपने किसी काम को छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। कालेज आने जाने का भी झंझट नहीं होता है। आप घर-परिवार की जिम्‍मेदारियां देखते हुए भी यह कोर्स कर सकते हैं। चाहें तो अपनी सहूलियत के हिसाब से कोई टाइम शेड्यूल भी सेट कर सकते हैं और रोजाना थोड़ा वक़्त निकाल कर कोर्स पूरा भी कर सकते हैं। कुल मिलाकर, आनलाइन कोर्स के माध्यम से आपके समय की बचत होती है, जिसका आप दूसरे कामों के लिए उपयोग कर सकते हैं या उस समय में कोई और कोर्स भी कर सकते हैं।

विकल्प जयादा: इंटरनेट पर इन दिनों तमाम कोर्सेज उपलब्‍ध हैं, जिसमें से कोई भी आप अपनी रुचि और आवश्‍यकता के अनुसार कर सकते हैं, जबकि कैंपस कोर्सेज के साथ ऐसा नहीं है। आपको कई बार चाहकर भी मनमाफिक कोर्स में दाखिला नहीं मिल पाता है, क्‍योंकि आपके उतने अंक नहीं होते या पैसे नहीं हैं कि उस इंस्‍टीट्यूट में अपनी पढ़ाई कर सकें। इस तरह के कोर्सेज का एक फायदा यह भी है कि आप एक कई तरह के कोर्स एक साथ भी कर सकते हैं। आनलाइन माध्‍यम से ढेर सारे ऐसे नये कोर्सेज भी हैं, जिसकी मार्केट में डिमांड भी है।

नौकरी के साथ पढ़ाई: आनलाइन कोर्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे वर्किंग प्रोफेशनल्‍स भी आसानी से कर सकते हैं यानी अगर वे कहीं कोई काम कर रहे हैं या जॉब कर रहे हैं, तो उसे छोड़े बगैर इस तरह के कोर्सेज कर सकते हैं।

आनलाइन सीखकर बढ़ें आगे: इन दिनों टेक्नोलाजी का ही बोलबाला है। आने वाले समय में भी तकनीक में और इजाफा ही होगा। ऐसे में स्किल डेवलपमेंट के साथ-साथ टेक्निकल स्किल बढ़ाने में भी आनलाइन कोर्सेज से काफी मदद मिल सकती है। क्लाउड सर्विस, मोबाइल डेवलपमेंट, कोडिंग, डाटा साइंस, एआइ जैसे फील्‍ड में कुशलता आजकल आनलाइन कोर्सेज के आ जाने से काफी आसान भी हो गई है। टेक्नोलाजी कंपनियों में ऐसे स्किल्ड वर्कफोर्स की डिमांड हमेशा रहती है। इन्हें करने के बाद स्टूडेंट्स चाहें, तो खुद भी इनोवेटिव टेक्नोलाजी एवं एप्लीकेशन डेवलप कर सकते हैं। कोरोना के दौर में तमाम युवाओं आनलाइन काफी कुछ सीखने में रुचि दिखाई, ताकि वे नया स्किल सीखकर अपने करियर को नया आयाम दे सकें।

एक्‍सपर्ट व्‍यू

यूजीसी की पहल से छात्रों को मिलेंगे अधिक अवसर: दिल्ली के आइपी यूनिवर्सिटी प्रोफेसर एवं कोआर्डिनेटर मूक्स डा. दुर्गेश त्रिपाठी ने बताया कि देश के ए प्लस नैक श्रेणी के विश्वविद्यालयों को आनलाइन डिग्री कोर्स चलाने की यूजीसी की यह पहल छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें ज्यादा से ज्यादा शिक्षित करने के उद्देश्य से की गई है। छात्रों को इस तरह के आनलाइन कोर्स में समय, सुविधा, एक समय में कई कोर्स करने की उपलब्धता, रोजगारोन्मुख कोर्स, प्रतिभाशाली अध्यापकों द्वारा अध्यापन जैसे कई लाभ और अवसर मिलेंगे। इन आनलाइन कोर्सेज का फार्मेट भी कमोबेश मूक्स जैसा ही होगा, जिसमें पूरा कोर्स आनलाइन माध्यम से ही कराया जाएगा। चूंकि आनलाइन डिग्री कोर्स की अनुमति ए प्लस श्रेणी के मान्यताप्राप्त शैक्षणिक संस्थानों को प्रदान की गई है, इसलिए इससे छात्रों एवं अभिभावकों में डिग्री प्रदान करने वाले संस्थानों के प्रति किसी तरह का भ्रम एवं संदेह भी नहीं रहेगा।

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