Kisan Andolan: सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों के लिए जारी हो रहे तुगलकी फरमान, जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (पंजाब) के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू की फाइल फोटो।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा- जब सोने के लिए बोले तो सोना है जब उठने के लिए बोले तो उठना है और जब धरना स्थल पर आने के लिए कहा जाए तो धरना स्थल पर आना है।

Jp YadavTue, 20 Apr 2021 04:09 PM (IST)

नई दिल्ली [सोनू राणा]। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-हरियाणा के टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर पंजाब और हरियाणा के किसान पिछले साढ़े महीने से धरना-प्रदर्शन पर बैठे हैं, लेकिन हालात अब 360 डिग्री बदल चुके हैं। एक समय जहां प्रदर्शनकारी किसानों के समक्ष किसान नेता हाथ जोड़े खड़े रहते थे, वे अब गुंडो जैसी भाषा शैली पर उतर आए हैं। अब  किसान नेता अपने आंदोलन को बचाने के लिए तुगलकी भरमान तक जारी करने लगे हैं। 

प्रदर्शनकारियों पर हुकुम चलाने लगे नेता

दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर समर्थकों के साथ बैठे किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (पंजाब) के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू अब तुगलकी जुबान में बात कर रहे हैं। अपने संबोधन में वह इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे लगा रहा है किसान उनके गुलाम हैं। हाल ही में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा- 'जब सोने के लिए बोले तो सोना है, जब उठने के लिए बोले तो उठना है और जब धरना स्थल पर आने के लिए कहा जाए तो धरना स्थल पर आना है।' सतनाम सिंह पन्नू यहीं पर नहीं रुके, बल्कि यहां तक कह दिया कि मंच से जो भी बोला जाए उसका पालन करना है। कोरोना वायरस

संक्रमण से न डरने को लेकर भी दिए जा रहे भड़काऊ भाषण

सिंघु बॉर्डर पर आलम यह है कि मंच पर पहुंच कर नेता कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर गलत जानकारी दे रहे हैं। मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव ने दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर कहा कि कोरोनो वायरस पर केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों का पाखंड उजागर हो गया है। मंत्री और नेता चुनावी रैलियां कर रहे हैं। ऐसे में दूसरों पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।

किसानों को लगाए जा रहे कोरोना के टीके

योगेन्द्र यादव ने यहां तक कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण के इच्छुक लोगों के लिए सभी धरना स्थल पर शिविर लगाए जा रहे हैं। आंदोलनकारी किसानों की सुरक्षा के लिए ऑक्सीमीटर और एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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बड़े स्तर नहीं आए कोरोना के मामले

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन स्थलों पर कोरोना संक्रमण के मामले बड़े स्तर पर नहीं आए हैं और न ही हॉटस्पॉट हैं। उन्होंने कहा कि 20 से 26 अप्रैल के दौरान सभी मोर्चें पर प्रतिरोध सप्ताह के तौर पर मनाया जाएगा, ताकि किसानों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए इंतजामों को पुख्ता किया जा सके।

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संसद कूच रद करने पर निराशा जताई

मंच पर नेता लगातार संसद कूच नहीं कर पाने पर निराशा जता रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित संसद मार्च की तारीख अभी तय नहीं की गई है। मोर्चा ने आरोप लगाया कि किसानों के विरोध को खत्म करने के लिए कोरोना वायरस को एक बहाने के तौर पर उपयोग कर रही है। पिछले साल भी सरकार ने ऐसा ही कर, आंदोलन को खत्म करने की कोशिश की थी। 

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