DDA Housing Scheme: अनधिकृत कॉलोनियों में बदलेंगे मानक, लैंड पूलिंग की तर्ज पर होगा विकास

DDA Housing Scheme 1731 अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने की शुरुआत तो डीडीए 16 दिसंबर 2019 को ही कर चुका है लेकिन विभिन्न कानूनी अड़चनों के कारण इन कॉलोनियों को नियमित करना टेड़ी खीर साबित हो रहा है।

Jp YadavThu, 29 Jul 2021 08:41 AM (IST)
DDA Housing Scheme: अनधिकृत कॉलोनियों में बदलेंगे मानक, लैंड पूलिंग की तर्ज पर होगा विकास

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। मालिकाना हक देने की शुरुआत करने के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) अब अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की दिशा में भी कदम आगे बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में इन कॉलोनियों के नए विकास मानक भी जल्द अधिसूचित हो सकते हैं। इनके तहत इन कॉलोनियों में भी लैंड पूलिंग नीति की तर्ज पर विकास हो सकेगा। गौरतलब है कि 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने की शुरुआत तो डीडीए 16 दिसंबर 2019 को ही कर चुका है, लेकिन विभिन्न कानूनी अड़चनों के कारण इन कॉलोनियों को नियमित करना टेड़ी खीर साबित हो रहा है।

दरअसल, इन कॉलोनियों की बसावट में नियम कायदों का पूरी तरह से उल्लंघन हुआ है। लिहाजा, अब इन कॉलोनियों में लैंड पूलिंग नीति की तरह छोटे छोटे भूखंडों को आपस में जोड़कर जन भागीदारी के साथ ग्रुप हाउसिंग सोसायटी की तर्ज पर कॉलोनियों का पुनसर्जन किया जाएगा। इस बाबत अनधिकृत कॉलोनियों में इन सीटू डेवलपमेंट यानि जो जहां जैसा है, उसे वहीं पर पुनर्विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।

अनधिकृत कॉलोनियों (यू.सी.) के लिए विकास मानकों को योजनाबद्ध विकास हेतु मार्ग तैयार करने के लिया बनाया गया है। अलग-अलग मानकों के साथ द्विस्तरीय ²ष्टिकोण को तैयार किया गया है जिसका उद्देश्य निरंतर सस्ते किराए के मकान प्रदान करने हेतु निर्मित पर्यावरण और क्षेत्र के मौजूदा वास्तविक और सामाजिक-आर्तिक स्थिति में सुधार करना है। इन मानकों को दिसंबर 2020 में हुई डीडीए की बैठक में अनुमोदित किया गया। फिर जनता से सुझावों और स्थानीय निकायों से चर्चा के आधार पर इनको संशोधित कर दिल्ली विकास अधिनियम की 'धारा-11 क' के तहत केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय को भेज दिया गया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

नए मानकों के अनुसार अनधिकृत कालोनियों का विकास करने के लिए दो विकल्प तैयार किए गए हैं। पहला, भूखंडों के समायोजन को बढावा देकर और निर्धारित मापदंडों के साथ भूमि के मूल मालिकों / निवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करके कालोनियों का पुनसर्जन। दूसरा, न्यूनतम प्ला¨नग जरूरतों को पूरा करते हुए मौजूदा कालोनियों का नियमितीकरण।

जानकारी के मुताबिक इन कॉलोनियों के लोग दो हजार वर्गमीटर भूखंड को जोड़कर उसमें 300 एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) पा सकेंगे। 30 फीसद क्षेत्र में हरित क्षेत्र सहित पार्क वगैरह होंगे। 10 फीसद क्षेत्र का व्यावसायिक उपयोग किया जा सकेगा और 10 फीसद क्षेत्र में सामुदायिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यहां सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 12 मीटर होनी चाहिए। स्लम एवं जेजे कलस्टर के लिए भी यही मानक हैं बस वहां पर एफएआर थोड़ा ज्यादा यानि 400 रखा गया है।

शहरीकृत गांवों में भूखंड जोड़ने की न्यूनतम सीमा 1,670 वर्ग मीटर रखी गई है। यहां सड़क की चौड़ाई साढ़े सात मीटर होनी चाहिए। डीडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए मानकों को लेकर केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद इन कॉलोनियों में विकास कार्य भी गति पकड़ने लगेंगे।

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