पार्टी छोड़ने वाले स्वार्थी, देख रहे सिर्फ अपना लाभ : कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता डा नरेश कुमार ने कहा कि कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी और पार्टी की अगुवाई में देश में व्यापक पैमाने पर संघर्ष तथा आंदोलन चलाए गए। इसी की बदौलत देश आजाद हुआ। इन 62 वर्षों में इसके नेताओं ने अनेक त्याग किए।

Prateek KumarSun, 28 Nov 2021 06:45 AM (IST)
हाथ का साथ छोड़ अन्य दलों में शामिल हो रहे नेताओं को कांग्रेस ने मौकापरस्त बताया है।

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। हाथ का साथ छोड़ अन्य दलों में शामिल हो रहे नेताओं को कांग्रेस ने मौकापरस्त बताया है। उसका कहना है कि जो नेता अन्य दलों में शामिल हो रहे हैं वे बरसाती मेंढक की तरह हैं। जहां उन्हें अपना भविष्य नजर आता हैं वे वहीं चले जाते हैं और ऐसा करके वे अपना ही नुकसान कर रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता डा नरेश कुमार ने कहा कि कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी और पार्टी की अगुवाई में देश में व्यापक पैमाने पर संघर्ष तथा आंदोलन चलाए गए। इसी की बदौलत देश आजाद हुआ। इन 62 वर्षों में कांग्रेस और इसके नेताओं ने देश के विकास के लिए अनेक त्याग किए।

पार्टी नेताओं ने देश के लिए अपने हितों की कुर्बानी देकर भारत का विकास किया और पंडित नेहरू जी ने देश को इंजीनियरिंग, चिकित्सा तथा प्रबंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए बड़े बड़े बांधों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय प्रबंधन संस्थानों की स्थापना की थी।

उन्होंने कहा कि जो कांग्रेसी नेता निजी स्वार्थों और पद की लालसा के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं उन्हें यह बात भी ध्यान रखनी कि उन्हें वर्षों तक पार्टी ने विभिन्न पदों पर नवाजा था और ऐसे स्वार्थी नेताओं को कांग्रेस कार्यकर्ता कभी माफ नहीं करेंगे।

डाॅ कुमार ने कहा कि कांग्रेस और अन्य दलों के जो नेता आम आदमी पार्टी में शामिल हो रहे हैं वे एक ऐसे डूबते जहाज पर सवार हो रहे हैं जिसका कोई भविष्य नहीं हैं और ऐसे नेताओं को अपने निर्णयों पर एक दिन पछतावा होगा।

कांग्रेस में नहीं अब कार्यकर्ताओं का सम्मान : माजिद

अजय माकन के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए मुख्य मीडिया प्रभारी का दायित्व संभालने वाले मेहदी माजिद ने वरिष्ठ पार्टी नेता मुकेश गोयल के आम आदमी पार्टी में जाने का स्वागत किया है। माजिद का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस में आज न पुराने नेताओं का मान बचा है और न कार्यकर्ताओं का ही सम्मान रह गया है। यहां केवल चापलूसों की जमात रह गई है। पार्टी आलाकमान भी सारी स्थिति को मूकदर्शक बनकर देख रहा है और कोई कदम नहीं उठा रहा। अगर यही हाल रहा और एक एक करके पुराने नेता पार्टी छोड़ते रहे तो दिल्ली में कांग्रेस का वजूद भी नहीं रह जाएगा। 

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