100 साल बाद खिलाफत आंदोलन का सही सच सामने लाएगा संघ, प्रदर्शनी व सेमीनार का होगा आयोजन

खिलाफत आंदोलन को स्वाधीनता की लड़ाई से जाेड़ने वाले इतिहास का सही सच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सबके सामने लाएगा। उसके मुताबिक यह आंदोलन पूरी तरह से धार्मिक था। संघ द्वारा इसके लिए प्रदर्शनी सेमीनार और प्रस्तुति आयोजित की जाएगी।

Mangal YadavThu, 23 Sep 2021 07:01 AM (IST)
संघ प्रदर्शनी, सेमीनार और प्रस्तुति के जरिए मालाबार में हिंदुओं के नरसंहार के बारे में बताएगा

नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। खिलाफत आंदोलन को स्वाधीनता की लड़ाई से जाेड़ने वाले इतिहास का "सही सच' राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सबके सामने लाएगा। उसके मुताबिक यह आंदोलन पूरी तरह से "धार्मिक' था। केरल के मालाबार का नरसंहार इसकी बानगी है, जिसमें 10 हजार से अधिक हिंदुओं को मारा गया। संघ द्वारा इसके लिए प्रदर्शनी, सेमीनार और प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से दावा होगा कि जिन्हें स्वतंत्रता सेनानी बताया जाता है और उनके परिवार को सरकारी सुविधाएं दी जा रही है, उन्होंने मतांतरण न करने पर एक वर्ग विशेष का नरसंहार किया।

यह प्रदर्शनी और प्रस्तुति 25 सितंबर को कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होगी, जिसमें पीड़ित परिवार के लोगों की तस्वीरें और उनके बयान दिखाए जाएंगे। साथ ही एक कुंए की प्रतिकृति होगी, जिसके बारे में जिक्र होगा कि इसी तरह के कुंए में लोगों को मारकर डाला गया था। शाम को वहीं पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी।

इसी तरह 26 सितंबर को कांस्टीट्यूशन क्लब में सेमीनार आयोजित होगी, जिसमें वरिष्ठ इतिहासकार और विशेषज्ञ खिलाफत आंदोलन के काले अध्याय पर प्रकाश डालेंगे। संघ का यह यह कार्यक्रम ऐसे समय मेें हो रहा है जब खिलाफत आंदोलन के 100 वर्ष पूरे होने को केरल के वामपंथ सरकार द्वारा समारोह के रूप मेें मनाने की तैयारी है।

विशेष बात कि हाल ही में शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आइसीएचआर) की एक समिति ने परिषद को सौंपी रिपोर्ट में देश के स्वाधीनता आंदोलन के सेनानियों की सूची से मालाबार से डाले गए 386 लोगों के नाम बाहर करने की सिफारिश की है, इसमें 1921 के इस कथित आंदोलन के अगुआ वीके हाजी का भी नाम है।

संघ के आनुषांगिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे नंदकुमार ने कहा कि इन लोगों के नाम स्वाधीनता आंदोलन के सेनानियों की सूची से बाहर किया जाना चाहिए। क्योंकि स्वाधीनता की लड़ाई में खिलाफत आंदोलन का कुछ लेना देना नहीं था, बल्कि इसके चलते देश में जगह-जगह धार्मिक उन्माद बढ़ा। उसमें से एक मालाबार का नरसंहार भी है, जिसमें मतांतरण न करने पर हजारों लाेगों को मारा गया। उन परिवारों के लोग अभी भी माैजूद हैं, लेकिन तोड़मरोड़ कर लिखे गए इतिहास में उन्हें उचित स्थान नहीं दिया गया।

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