स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली, पूर्वी दिल्ली स्थित गाजीपुर लैंडफिल साइट से संबंधित समस्याओं में आ रही कमी

Ghazipur landfill News हमारे विकास का माडल ऐसा होना चाहिए जो वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए भी फायदेमंद हो। इसके लिए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है-गौतम गंभीर सदस्य लोकसभा।

Sanjay PokhriyalSat, 16 Oct 2021 10:06 AM (IST)
आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली दे सकूं।

गौतम गंभीर। भारत तेजी से विकास के नए नए युग में प्रवेश कर रहा है। इस युग की पहचान बुनियादी ढांचे के निर्माण से कहीं ज्यादा है। विकास की कुंजी निश्चित रूप से अब सतत विकास ही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बार बार सतत विकास पर जोर दिया है, क्योंकि आगे बढ़ने का एकमात्र यही बेहतर तरीका है। कोई भी देश इस मुकाम पर तभी आता है जब उसके पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन, मजबूत राजनीतिक व्यवस्था और जागरूक आबादी हो। आज भारत भी उस राह पर अग्रसर है। बीते कुछ वर्षो के दौरान लोगों की जरूरतों में भारी बदलाव आया है। उनकी आवश्यकताएं महज कुछ इमारतों या फ्लाईओवर से अधिक हैं, वे एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण में रहने की इच्छा रखते हैं और इसके लिए वे अपने जीवन जीने के तरीके को भी बदलने के इच्छुक हैं।

समग्रता में देखा जाए तो पूर्वी दिल्ली के एक बड़े भौगोलिक इलाके में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक ‘पहाड़’ थी। लेकिन यह मिट्टी या पत्थर का कोई साधारण पहाड़ नहीं था। दरअसल यह एशिया का सबसे बड़ा कचरे का पहाड़ था जो 60 मीटर से अधिक ऊंचा था। संबंधित अधिकारियों से यह जानकारी प्राप्त हुई कि यह जल्द ही कुतुब मीनार की ऊंचाई को पार कर सकता है। लिहाजा मेरी पहली इच्छा इस मानव निर्मित पहाड़ की चोटी पर जाने की थी ताकि यह समझा जा सके कि वर्षो से इस समस्या को हल करना इतना कठिन क्यों है। जल्द ही यह महसूस हुआ कि इस कृत्रिम पहाड़ के संबंध में निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार कई राजनेता और अधिकारी कभी इस लैंडफिल साइट पर गए ही नहीं थे।

उल्लेखनीय है कि गाजीपुर में इस जगह को वर्ष 1984 में लैंडफिल साइट यानी कचरा डंपिंग के लिए आवंटित किया गया था और अब यह 70 एकड़ में विस्तृत है। यह वर्ष 2002 में पहले ही कचरा रखने की अपनी क्षमता को पार कर चुका था। अधिकारियों ने उल्लेख किया कि निगम के पास पूर्वी दिल्ली में रहनेवाले लगभग 45 लाख लोगों से एकत्र किए गए कचरे को डंप करने के लिए कोई वैकल्पिक साइट नहीं है। इस लैंडफिल साइट में प्रतिदिन लगभग 700 ट्रक तीन हजार मीटिक टन कचरा डंप करते हैं। ज्वलनशील पदार्थो, कचरे और सीवेज के ढेर से बने इसने आसपास रहनेवाले लोगों के जीवन को दयनीय बना दिया है। कूड़े के ढेर से निकलने वाली दरुगध इतनी तेज और तीखी थी कि खिड़कियां बंद होने के बावजूद वह कार के भीतर तक जा पहुंची। इस कूड़े के ढेर के आसपास की कालोनियों में लोगों को देखकर ऐसी परिस्थितियों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें रोजमर्रा के कार्यो में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता होगा।

ऐसे में सबसे पहले यह तय किया गया कि इस समस्या के समाधान के लिए उन विशेषज्ञों से परामर्श करना चाहिए जिन्होंने इस तरह की समस्याओं का सामना किया है। लिहाजा इंदौर के नगर आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनके अनुभवों को समझने के लिए बैठकें आयोजित की गईं। गाजीपुर के साथ सबसे बड़ा मुद्दा वर्षो से जमा हुआ कचरा था। कई दौर की बैठकों के बाद अत्याधुनिक तकनीक वाली मशीनों को अंतिम रूप दिया गया, जो पुराने कचरे को संसाधित कर सकती हैं। इस कार्य को समग्रता से अंजाम देने के लिए अक्टूबर 2019 में खास किस्म के ट्रोमेल मशीनों का उपयोग शुरू किया गया, जो यांत्रिक स्क्रीनिंग मशीनें हैं। इनका उपयोग ठोस अपशिष्ट और निष्क्रिय सामग्री को अलग करने के लिए किया जाता है।

वर्तमान में 1,800 टन प्रतिदिन की संयुक्त क्षमता वाली 20 ऐसी मशीनें इस साइट से कचरे को अलग करते हुए यहां से उठा रही हैं। इन मशीनों ने पिछले दो वर्षो में 748800 मीटिक टन से अधिक कचरे को संसाधित किया है। कई अन्य विशेषज्ञों ने भी सुझाव दिया है कि गाजीपुर लैंडफिल साइट की समस्या से निपटने के लिए बायो-माइनिंग का उपयोग किया जा सकता है। इसका उद्देश्य मूल रूप से उन पदार्थो को मिलाना है जो उपयोगी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कूड़े के ढेर में से उन खास जीवों को अलग करना जिनका उपयोग खेती के लिए किया जा सकता है। हमारे निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप पूर्वी दिल्ली के इस कचरे के पहाड़ की ऊंचाई 25 वर्षो में पहली बार 40 फीट कम हुई है। यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि रही जिससे एक तय रणनीति के साथ आगे बढ़ने के हमारे प्रयासों को बल मिला। उम्मीद की जा सकती है कि बहुत जल्द ही इस कचरे के पहाड़ की ऊंचाई को कुछ और कम करने में हमें कामयाबी हासिल होगी। हाल के समय में कई ऐसी खबरें भी आई हैं जिनमें आसपास के लोगों ने यह बताया है कि इस कचरे के पहाड़ से आने वाली दरुगध में भी कमी आई है।

दरअसल हमारा उद्देश्य वर्ष 2023 तक 50 प्रतिशत कचरे को संसाधित करना है ताकि इस पहाड़ की ऊंचाई काफी कम हो और इस कारण यहां के लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे। हमारे शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए नागरिक समाज के सदस्य भी आगे आए हैं। मेरे सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह होगी कि मैं अपने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पर लगे इस दाग को जितना हो सके कम करूं और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली दे सकूं।

[सदस्य, लोकसभा]

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