Coronavirus 3rd Wave Update: तीसरी लहर और कोरोना से जुड़े हर सवाल का जवाब जानने के लिए पढ़ें डॉ. बीएल शेरवाल का पूरा इंटरव्यू

तीसरी लहर और कोरोना से जुड़े हर सवाल का जवाब जानने के लिए पढ़ें डॉ. बीएल शेरवाल का पूरा इंटरव्यू

Coronavirus 3rd Wave Update मुझे लगता है कि इस बार हमारे पास लड़ने के लिए बड़ा हथियार है। देश में तेजी से टीकाकरण अभियान चल रहा है। अगर हमारी आबादी के बड़े हिस्से को टीका लग गया तो शायद तीसरी लहर न देखने को मिले।

Jp YadavMon, 17 May 2021 10:09 AM (IST)

नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर ने राजधानी सहित देशभर में हाहाकार मचा रखा है। संक्रमण तेजी से फैल रहा है और मौतों ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब अगली लहर के और खतरनाक होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही ब्लैक फंगस का खतरा भी बढ़ रहा है। इन सभी मुद्दों पर दैनिक जागरण संवाददाता स्वदेश कुमार ने राजीव गांधी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के निदेशक डॉ. बीएल शेरवाल से लंबी बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश :

पिछले साल की तुलना में इस बार कोरोना की लहर ज्यादा संक्रामक और घातक क्यों हुई?

- अभी देश में जो लहर चल रही है। उसकी शुरुआत महाराष्ट्र से हुई थी। शुरुआत में इसका कारण पता नहीं चला था, लेकिन बाद यह साफ हुआ कि ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में कोरोना के जो स्ट्रेन पाए गए थे, वही भारत के मरीजों में भी थे। यहां म्यूटेशन होने की वजह से ये अधिक संक्रामक और घातक हो गए। वायरस में अभी भी लगातार म्यूटेशन देखे जा रहे हैं। इसके अलावा मामले कम होने पर हम लोग लापरवाही बरतने लगे थे। यह भी संक्रमण तेजी से फैलने का कारण बना। इस वर्ष संक्रमण के साथ मौतें भी अधिक हुईं।

इसके पीछे क्या कारण रहे?

-पिछली बार लोग संक्रमित तो हो रहे थे, लेकिन उनके फेफड़ों और अन्य अंगों पर इसका प्रभाव बहुत कम था। जबकि इस बार वायरस फेफड़ों को अधिक प्रभावित कर रहा है। साथ ही अन्य अंगों पर भी हमला कर रहा है। कुछ मरीजों के शरीर में खून का थक्का भी जम रहा है। इसी वजह से मौतें अधिक हो रही हैं। इसके अलावा मौतों का एक बड़ा कारण यह भी है कि इस बार मरीजों को संभलने का अधिक समय नहीं मिल रहा है। तीन-चार दिन में ही उनकी हालत गंभीर हो जा रही है। जब तक मरीज को संक्रमण का एहसास होता है तब तक 80 फीसद से अधिक फेफड़ा खराब हो चुका होता है। दुखद यह है कि ऐसे मरीजों को बचाना मुश्किल हो जाता है। युवाओं की मौत का कारण भी यही है। क्योंकि कई युवा अपने आपको स्वस्थ मानते हुए संक्रमण को गंभीरता से नहीं लेते। कोरोना के साथ अब लोगों को ब्लैक फंगस का भी डर सता रहा है।

यह कितना खतरनाक है?

- कोरोना के कई मरीजों के इलाज में स्टेराइड दवाओं का सकारात्मक असर देखने को मिला है। ऐसे में कई मरीजों को यह दवाएं दी जा रही हैं। हालांकि इनका प्रयोग सीमित और डॉक्टरों की देखरेख में ही करना चाहिए। अगर मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है तो स्टेराइड दवाएं नुकसान नहीं करेंगी। लेकिन, अनियंत्रित मधुमेह, कैंसर और लिवर व किडनी प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों में यह ब्लैक फंगस का खतरा पैदा करती हैं। क्योंकि इन्हें पहले से जो दवाएं दी जा रही हैं वे रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करती हैं। ब्लैक फंगस आंखों और मस्तिष्क में असर कर सकता है। ब्लैक फंगस की जांच और पहचान आसान है। किसी भी लैब में इसकी जांच हो सकती है। बस मरीज को थोड़ा सा ध्यान रखने की जरूरत है। चेहरे पर सूजन, आखें लाल या सिरदर्द हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। इसका इलाज मौजूद है।

देश में तीसरी लहर की भी चर्चा चल रही है। इसे कैसे देखते हैं?

- देखिए, तीसरी लहर आएगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है। सिर्फ आकलन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि बच्चों पर यह अधिक असर करेगी। लेकिन मुझे लगता है कि इस बार हमारे पास लड़ने के लिए बड़ा हथियार है। देश में तेजी से टीकाकरण अभियान चल रहा है। अगर हमारी आबादी के बड़े हिस्से को टीका लग गया तो शायद तीसरी लहर न देखने को मिले।

इसे रोकने के लिए क्या-क्या उपाय किए जाने चाहिए?

-हमें लहर की चिंता छोड़ कोरोना से बचाव के लिए जो उपाय हैं वह करते रहने चाहिए। टीकाकरण सबसे बड़ा हथियार है। आगे सरकार को 18 साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी टीका लगाना शुरू कर देना चाहिए। इसके अलावा कोरोना को हराने वाले व्यवहार ही हमें अपनाने होंगे।

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