Ahoi Ashtami 2021: दिल्ली-एनसीआर में अहोई अष्टमी व्रत जारी, जानिये- पूजा के लिए कब तक है शुभ मुहूर्त

Ahoi Ashtami 2021 करवा चौथ की तरह इस त्योहार में महिलाएं (माताएं) अपने बच्चों की लंबी आयु और संतान प्राप्ति के लिए भी कठिन व्रत रखती हैं। दिल्ली-एनसीआर में इसे अहोई व्रत त्योहार के नाम से जाना जाता है।

Jp YadavThu, 28 Oct 2021 12:12 PM (IST)
Ahoi Ashtami 2021: दिल्ली-एनसीआर में अहोई अष्टमी का व्रत जारी, जानिये शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में

नई दिल्ली/नोएडा, जागरण डिजिटल डेस्क। Ahoi Ashtami 2021: दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में बृहस्पतिवार को अहोई अष्टमी त्योहार मनाया जा रहा है। करवा चौथ की तरह इस त्योहार में महिलाएं (माताएं) अपने बच्चों की लंबी आयु और संतान प्राप्ति के लिए भी कठिन व्रत रखती हैं। दिल्ली-एनसीआर में इसे अहोई व्रत त्योहार के नाम से जाना जाता है। करवा चौथ की तरह इसको लेकर लेकर एक कथा प्रचलित है। महिलाओं ने बृहस्पतिवार सुबह से ही व्रत रखा हुआ है। ज्योतिषियों के अनुसार, अहोई अष्टमी में कथा सुनने और पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 12:30 से शुरू है और यह 2 बजे तक रहेगा। पुजारियों का कहना है कि इस दौरान पूजा करने और व्रत कथा सुनना बहुत शुभ माना जाता है। अहोई व्रत के क्रम में अहोई माता के पूजन के लिए बृहस्पतिवार शाम को 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट के बीच स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त है। 

महिलाओं ने बृहस्पतिवार सुबह से ही करवा चौथ की तरह निर्जला व्रत रखा हुआ है। जब तक व्रत  खत्म नहीं हो जाता है, इस दौरान खाना-पीना पूरी तरह से वर्जित होता है। इसके बाद इस दिन रात को तारे देखने के बाद ही व्रत खत्म किया जाता है। दरअसल, माता पार्वती को ही अहोई अष्टमी माता के रूप में पूजा जाता है। अहोई व्रत में भी करवा चौथ की तरह ही अर्घ्य दिया जाता है।

यहां जानिये- अहम बिंदु

अहोई अष्टमी कथा सुनने और पूजन के लिए दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 2 बजे के बीच स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया मुहूर्त का समय श्रेष्ठ है। बृहस्पतिवार शाम को अहोई माता के पूजन के लिए शाम 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 30 के बीच स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त है। व्रत खत्म होने के बाद अर्घ्य देने का भी नियम है। अहोई अष्टमी के दिन व्रतधारी महिलाओं भगवान गणेश की पूजा अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि किसी भी अच्छे काम की शुरुआत गणेश पूजा से की जाती है। करवा चौथ की तरह अहोई व्रत में भी अर्घ्य दिया जाता है। इससे पहले अहोई अष्टमी व्रत तारों को देखकर खोला जाता है। इसके बाद अहोई माता की पूजा की जाती है। इस दिन कथा सुनते समय हाथ में 7 अनाज लेना शुभ माना जाता है।  अहोई अष्टमी की पूजा करते समय साथ में बच्चों को भी बैठाना चाहिए।

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