किस तरह बदल रहा है खाना बनाने का तौर तरीका? पढ़िये- दिल्ली समेत देशभर का हाल

दिल्ली में 17 फीसद लोग इंडक्शन कुकटाप (चूल्हा) राइस कुकर और माइक्रोवेव ओवेन जैसे ई कुकिंग उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरे नंबर पर तमिलनाडु और तीसरे नंबर पर असम व केरल है जहां क्रमश 15 एवं 12-12 फीसद लोग इनका उपयोग कर रहे हैं।

Jp YadavWed, 20 Oct 2021 10:05 AM (IST)
किस तरह बदल रहा है खाना बनाने का तौर तरीका? पढ़िये- दिल्ली समेत देशभर का हाल

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ई कुकिंग को भी विभिन्न राज्य तेजी से अपना रहे हैं। अभी तक जिन राज्यों में लोग इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण अपना रहे हैं, उनमें दिल्ली का नंबर पहला है। यहां 17 फीसद लोग इंडक्शन कुकटाप (चूल्हा), राइस कुकर और माइक्रोवेव ओवेन जैसे ई कुकिंग उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरे नंबर पर तमिलनाडु और तीसरे नंबर पर असम व केरल है जहां क्रमश: 15 एवं 12-12 फीसद लोग इनका उपयोग कर रहे हैं। दिल्ली और तमिलनाडु में, 17 प्रतिशत परिवारों ने अलग-अलग तरह से इलेक्ट्रिक कुकिंग को अपनाया है। यह जानकारी सामने आई है काउंसिल आन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) द्वारा जारी किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन 'आर इंडियन होम्स रेडी फार इलेक्ट्रिक' में।

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने बिजली उपकरणों से खाना पकाने के लाभों को प्रोत्साहित करने के लिए इस साल फरवरी में गो इलेक्टि्रक अभियान शुरू किया था।इस अध्ययन के मुताबिक ई-कुकिंग का शहरी इलाकों में विस्तार 10.3 फीसद जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ 2.7 फीसद है। राष्ट्रीय स्तर पर देश में कुल पांच फीसद परिवारों ने ही ई-कुकिंग को अपनाया है। एलपीजी की मौजूदा कीमत पर सब्सिडी आधारित बिजली पाने वाले परिवारों के लिए ई-कुकिंग एलपीजी की तुलना में ज्यादा किफायती होगी। हालांकि इस पर शुरुआत में आने वाली लागत और उपभोक्ताओं की विभिन्न धारणाएं शहरी परिवारों के बीच ई-कुकिंग को अपनाने में बाधा साबित हुई हैं।

सीईईडब्ल्यू के अध्ययन में यह भी पाया गया है कि ई-कुकिंग को अपनाने वाले 93 फीसद परिवार अभी भी खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन के रूप में एलपीजी पर निर्भर हैं और ई-कुकिंग उपकरणों को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों के संपन्न परिवारों में बिजली के उपकरणों की मदद से खाना पकाने का प्रचलन ज्यादा है। खासतौर पर दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसका ज्यादा चलन है, जहां पर महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों की तुलना में बिजली सस्ती है।

सीईईडब्ल्यू का यह अध्ययन 'इंडिया रेजिडेंशियल एनर्जी सर्वे (आइआरईएस) 2020' पर आधारित है, जो इनिशिएटिव फार सस्टेनेबल एनर्जी पालिसी (आइएसईपी) के साथ साझेदारी में किया गया था। यह निष्कर्ष सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले 21 राज्यों के 152 जिलों में लगभग 15 हजार शहरी और ग्रामीण परिवारों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित हैं।

सीईईडब्ल्यू के अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि ई-कुकिंग को बढ़ावा देने में खाना पकाने वाले कुशल और कम लागत वाले इलेक्ट्र्क उपकरणों, उपयुक्त वित्तीय समाधानों और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसलिए ब्यूरो आफ एनर्जी इफिशियंसी (बीईई) को राइस कुकर और इंडक्शन चूल्हे जैसे ई- कुकिंग उपकरणों को अपने मानक और लेबलिंग कार्यक्रम में शामिल करना चाहिए।

(डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्यू) का कहना है कि भारत ने घरेलू प्रदूषण कम करने में लगातार प्रगति की है। अभी 85 फीसद परिवारों के पास एलपीजी सिलेंडर के रूप में स्वच्छ ईंधन है। चूंकि शहरी परिवारों के बीच इलेक्ट्रिक कुकिंग को अपनाने की संभावना ज्यादा है, इसलिए इस बदलाव में मदद करने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी एलपीजी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संसाधनों की बचत होगी।

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