दिल्ली के मार्ग: जानिए जोसफ स्टेन लेन के बारे में, मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट से क्या है इसका नाता

जोसफ स्टेन मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट थे। उन्होंने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर समेत उस इलाके की कई इमारतों को डिजायन किया था। उनमें फोर्ड फाउंडेशन वर्ल्ड वाइड फंड फार नेचर-इंडिया (डब्लूडब्लूएफ-आइ) यूनिसेफ आदि हैं। इस वजह से कई बार उस इलाके को स्टेनाबाद भी कहा जाने लगा था।

Mangal YadavSat, 24 Jul 2021 01:27 PM (IST)
जोसफ स्टेन लेन : मार्बल और पत्थरों के बीच भी इनके शिल्प में है प्रकृति की खूबसूरत छटा।

नई दिल्ली [अनंत विजय]। दिल्ली के मशहूर लोदी गार्डन जाने के कई रास्ते हैं। एक रास्ता इंडिया इंटरनेशनल सेंटर(आइआइसी) के बगल से भी जाता है। ये एक घुमावदार गलीनुमा रास्ता है जो मैक्स मूलर मार्ग से लोदी गार्डन तक जाता है। लोदी गार्डन तक पहुंचने के पहले इसके दोनों तरफ कई इमारतें हैं। मैक्स मूलर रोड से लोदी गार्डन तक इस सड़क का नाम जोसफ स्टेन लेन है। कई बार इस गली से गुजरा। गलीनुमा सड़क के नाम पर ध्यान जाता था, लगता था कि ये नाम औपनिवेशिक शासनकाल से जुड़ा होगा, लेकिन इसकी बिल्कुल अलग कहानी है।

प्रकृति और इमारत का अद्भुत संबंध

जोसफ स्टेन मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट थे। उन्होंने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर समेत उस इलाके की कई इमारतों को डिजायन किया था। उनमें फोर्ड फाउंडेशन, वर्ल्ड वाइड फंड फार नेचर-इंडिया (डब्लूडब्लूएफ-आइ), यूनिसेफ आदि हैं। इस वजह से कई बार उस इलाके को 'स्टेनाबाद' भी कहा जाने लगा था। जोसफ स्टेन जब आइआइसी की इमारत को डिजायन कर रहे थे तब उन्होंने कहा था 'एक ऐसी इमारत बनाने की चुनौती है जो कि जगह से ज्यादा सादगी और सहजता के साथ संबंधों को विकसित कर सके। मार्बल और ग्रेनाइट से बनी फाइव स्टार प्रापर्टी न हो। ये एक ऐसी इमारत हो जहां प्रकृति और इमारत के बीच एक संबंध दिखे। बाग में इमारत उनका कांसेप्ट था।

आइआइसी के परिसर में प्रवेश करने पर आप उस संबंध को महसूस कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि उनकी ये सोच सिर्फ आइआइसी परिसर में दिखाई देती है। अगर आप डब्लूडब्लूएफ-आइ की इमारत या उसके आसपास की इमारतों को ध्यान से देखेंगे तो आपको जोसफ स्टेन की कला की छाप साफ तौर पर दिखाई देगी।

इन इमारतों में प्रकृति से जुड़ाव की समान कला के दर्शन होते हैं। इस इलाके से थोड़ी दूर पर दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में है त्रिवेणी कला संगम। इसका भवन भी जोसफ स्टेन की कला का ही नमूना है। अगर आप ध्यान से देखें तो त्रिवेणी कला संगम के बाहर की तरफ की दीवार और आइआइसी की दीवार में समानता दिखाई देगी। त्रिवेणी कला संगम में जगह कम होने के बावजूद खुली जगह और पेड़-पौधों को उचित स्थान दिया गया है। जोसफ स्टेन ने ही इंडिया हैबिटेट सेंटर को भी डिजायन किया था।

पचास वर्षों का नाता

जोसफ स्टेन अमेरिका में जन्मे थे और वहीं से आर्किटेक्ट की पढ़ाई की। 1952 में वो पहली बार भारत आए और कोलकाता (तब कलकत्ता) के बंगाल इंजीनियरिंग कालेज के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट के अध्यक्ष बने। फिर 1955 में वो दिल्ली आ गए। स्वाधीनता के बाद के इस दौर में कई विदेशी आर्किटेक्ट भारत आए थे क्योंकि उनको यहां असीम संभावनाएं नजर आ रही थीं। उनमें से ज्यादातर काम करके अपने वतन लौट गए थे।

जोसफ स्टेन पचास वर्षों से अधिक समय तक भारत में रहे और कई महत्वपूर्ण काम किए। उन्होंने दुर्गापुर स्टील प्लांट और दुर्गापुर औद्योगिक शहर को बसाने के काम में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके कार्यों को देखते हुए 1992 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। बाद में वो वापस अमेरिका लौट गए, जहां 2001 में उनका निधन हो गया।

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