Delhi Politics: दिल्ली भाजपा के नेताओं का इंतजार खत्म, कांग्रेस में नियुक्तियों का गड़बड़झाला

दिल्ली में बिजली के बाद अब जल पर संग्राम शुरू हो गया है।
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 02:57 PM (IST) Author: Mangal Yadav

नई दिल्ली जागरण संवाददाता। भाजपा की राष्ट्रीय टीम घोषित होने के बाद अब दिल्ली भाजपा के नेताओं का इंतजार भी खत्म हो सकता है। कई नेताओं का कहना है कि दिल्ली के पदाधिकारियों के नाम घोषित होने में देरी का एक कारण राष्ट्रीय टीम भी है। प्रदेश नेतृत्व यह देखना चाहता था कि किन नेताओं को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिलती है। नई टीम में दिल्ली के प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू को जगह नहीं मिली है। अब तक वह उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पद जाने से दिल्ली में उनके समर्थक भी निराश हो गए हैं।

दरअसल, कई नेता इनके जरिये प्रदेश में मनचाहा पद पाने की कोशिश में लगे हुए हैं। उन्हें लगता है कि जाजू का सियासी कद कम होने से उनके खुद के सपने न टूट जाएं। दूसरी ओर सह प्रभारी तरुण चुग का कद बढ़ने से उनके नजदीकी खुश हैं। उन्हें अब दिल्ली में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है।

नियुक्तियों व सदस्यता में गड़बड़झाला

प्रदेश कांग्रेस में पदाधिकारियों की नियुक्ति और सदस्य बनाने में गड़बड़झाला सामने आ रहा है। तीन दिन पहले ही प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष अनिल चौधरी ने आम आदमी पार्टी (आप) व भाजपा के कुछ लोगों को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। पता चला है कि इनमें से कुछ लोगों को करावल नगर जिला स्तर पर पहले ही पार्टी में शामिल किया जा चुका था। इसी तरह इस जिले में मंदीप भड़ाना और ब्रजमोहन जाटव को ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त किया गया। बाद में सामने आया कि मंदीप भाजपा में हैं और नियुक्ति पत्र लेने ही नहीं आए। वहीं जाटव कुछ माह पूर्व तक आप में थे। दिलचस्प यह कि जाटव को अभी तक औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल भी नहीं कराया गया है। इन नियुक्तियों को लेकर जिला अध्यक्ष एआर जोशी को प्रदेश अध्यक्ष ने नोटिस भी जारी किया था।

जल पर शुरू हुआ संग्राम

दिल्ली में बिजली के बाद अब जल पर संग्राम शुरू हो गया है। दिल्ली सरकार ने बेहतर जल प्रबंधन के लिए राजधानी को अलग-अलग जोन में विभाजित करके सलाहकार नियुक्त करने का फैसला किया है। इस घोषणा से भाजपा को सरकार पर वार करने का एक मौका मिल गया है। इस बहाने वह आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को चुनावी वादे याद कराने से लेकर दिल्ली जल बोर्ड में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। पार्टी पिछले दिनों बिजली बिल को मुद्दा बना रही थी। सड़क पर उतरने की खानापूरी भी की गई थी। हालांकि, उसकी मांग सिरे नहीं चढ़ सकी। प्रदेश नेतृत्व की किरकिरी भी हुई। आंदोलन बीच में छोड़ देने के आरोप भी लगे। वहीं, अब पानी पर संग्राम करके पार्टी पिछली कमी दूर करने की कोशिश में लग गई है। मुद्दे को धार देने की कोशिश हो रही है। देखना है इसमें वह कितनी सफल होती है।

निगम के नेताओं की बढ़ीं उम्मीदें

भाजपा के राष्ट्रीय टीम की घोषणा में युवा चेहरों को तरजीह मिलने पर अब दिल्ली भाजपा की टीम में जगह पाने की कोशिश में लगे कई भाजपा पार्षदों का उत्साह बढ़ गया है। युवा चेहरों के नाम पर अब इन्हें भी तरजीह मिलने की संभावना लगने लगी है। ऐसे में पार्षदों ने प्रदेश नेतृत्व से लेकर राष्ट्रीय नेताओं की गणोश परिक्रमा तेज कर दी है। रविवार को राष्ट्रीय टीम में पद पाने वाले नेताओं के घर पर युवा पार्षदों को भी देखा गया। ऐसे कई पार्षद हैं जो प्रदेश महामंत्री से लेकर प्रदेश सचिव और मोर्चा प्रमुख की जिम्मेदारी चाहते हैं। राष्ट्रीय टीम की घोषणा के साथ उन्हें पार्टी के आतंरिक समीकरण अब अपने पक्ष में लगने लगे हैं। वैसे भी, नए और युवा चेहरे के नाम पर ही वर्ष 2017 में हुए नगर निगमों के चुनाव में पुराने सभी पार्षदों की टिकट काटकर पार्टी ने इन सभी को मौका दिया था।

राम नाम की होड़

राजनीतिक दलों में राम नाम की होड़ नई नहीं है। हालांकि इसकी जिम्मेदारी भाजपा ने पहले से ले रखी है, लेकिन लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी रुख बदला है। वह भी गाहे-बगाहे राम नाम का जाप कर लेती है। वैसे भी 500 वर्षो के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु राम का मंदिर बनने जा रहा है। ऐसे में राम का जिक्र हर सियासतदां की जुबां पर आना ही है। वो तो कोरोना के कारण रामलीला मंचन में व्यवधान नजर आ रहा है, अन्यथा इस बार कांग्रेस पार्टी वाले भी मंचन करते नजर आते। अब मंच पर भले ही वह नजर न आएं, पर राम के साथ दिखने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे।

भाजपा वाले रामलीला मंचन की मांग को लेकर उपराज्यपाल तक अर्जी लेकर पहुंच रहे हैं तो प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जय प्रकाश अग्रवाल ने सीधे केंद्र सरकार के सामने ही मांग रख दी। बोले, रामलीला मंचन से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। ऐसे में सरकार इसकी मंजूरी दे। बता दें कि जय प्रकाश अग्रवाल ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रामलीला मैदान की रामलीला में बतौर मुख्य अतिथि बुलाने पर रामलीला समिति से बाहर होने का निर्णय ले लिया था।

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