जानिए- किसने बुलाया था अब्दाली को भारत, जिसके बाद 150 साल तक आबाद न हो सकी दिल्ली

नई दिल्ली [नलिन चौहान]। हिंदुस्तान की पश्चिमी सरहदों की तरफ से विदेशी अफगान आक्रांता अहमद शाह अब्दाली के हमले शुरू हुए, जिसका सिलसिला सन् 1748 से शुरू होकर लगभग बीस साल तक जारी रहा। लगातार इन हमलों से और हिंदुस्तान के अंदर परस्पर गृह युद्धों से दिल्ली ऐसी तबाह और बर्बाद हुई कि फिर डेढ़-दो सौ बरस तक आबाद न हो सकी। यह बात कम जानी है कि अब्दाली ने कुल आठ बार हिंदुस्तान पर आक्रमण किया। पहला हमला वर्ष 1748 के आरंभ में किया। उसके बाद तो मानों हमलों की झड़ी लग गई।

प्रसिद्ध साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने निबंध ‘स्वतंत्रता संघर्ष इतिहास’ में लिखते हैं कि तब देश विभिन्न राज्यों में बंट गया था और उनमें काफी प्रतिद्विंद्विता और टकराव था। इस टकराव ने किसी हद तक सांप्रदायिकता का रूप धारण किया। जब मराठाओं ने हिंदू पादशाही का नारा लगाया और शाह वलीउल्लाह ने मराठा काफिरों को दिल्ली से मार भगाने के लिए अफगानिस्तान के अब्दाली को आमंत्रित किया।

इसके बाद अब्दाली के सैनिकों ने जब दिल्ली लूटनी शुरू की तब उन्होंने हिंदू और मुसलमान दोनों को बुरी तरह सताया, दोनों पर अत्याचार किए, यहां तक कि शाह वलीउल्लाह को भी घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। अब्दाली के अत्याचारों से परेशान होकर दिल्ली छोड़ने वाले लोगों में मियां नजीर भी थे। उस समय उनकी आयु 22-23 वर्ष थी। सन् 1756-57 में मराठा सेनापति रघुनाथ राव की अनुपस्थिति में अब्दाली ने न केवल दिल्ली को लूटा बल्कि अपनी लूटपाट का दायरा मथुरा, गोकुल और वृंदावन तक फैला दिया। मुगल बादशाह आलमगीर के शासनकाल के दूसरे वर्ष में अब्दाली ने दूसरी बार सिंधु नदी को पार किया। मुगल वजीर गाजीउद्दीन ने नरेला में अब्दाली के सन्मुख अपना आत्म-समर्पण कर दिया। दिल्ली आने पर उसको डटकर लूटा गया, उसे एक करोड़ रुपया देना पड़ा और अपना वजीर पद छोड़ना पड़ा। अब्दाली दिल्ली के तख्त (29 जनवरी 1757) पर बैठ गया  तथा उसने अपने नाम के सिक्के चलवाए। मराठों की गैर-हाजिरी में इमाद-उल-मुल्क को अब्दाली से समझौता करना पड़ा, जो नजीबुद्दौला को मीर बक्शी और व्यवहारत दिल्ली दरबार में अपना प्रतिनिधि बनाकर लौटा गया।

जाटों ने लगाई थी अब्दाली पर रोक

अब्दाली को जिस एक मात्र प्रतिरोध का सामना करना पड़ा वह था जाट राजा का प्रतिरोध, जो डीग और भरतपुर के अपने शक्तिशाली किलों में दृढ़ता से डटा रहा। कितने ही हंगामे दिल्ली में उर्दू के मशहूर शायर मीर तकी मीर की आंखों के सामने हुए और कितनी ही बार मौज-ए-खून उनके सर से गुजर गई। अब्दाली के पहले हमले के वक्त वर्ष 1748 मीर रिआयत खां के साथ लाहौर मे मौजूद थे और पानीपत की तीसरी लड़ाई वर्ष 1761 के भी दर्शक थे।

मीर का घर हुआ बर्बाद

दिल्ली में इस विदेशी विजेता और देश के अंतर गृह युद्ध करने वालों ने लूटमार मचाई। इसमें मीर का घर भी बर्बाद हुआ। इस युग के माली नुकसानों और नैतिक पतन की भयानक तस्वीरें, मीर की शायरी और आपबीती ‘जिक्र-ए-मीर’ में सुरक्षित हैं। जिक्र-ए-मीर में अब्दाली की फौजों के हाथों दिल्ली की यह तस्वीर है-बंदा अपनी इज्जत थामे शहर में बैठा रहा। शाम के बाद मुनादी हुई कि बादशाह ने अमान दे दी है। रिआया को चाहिए कि परेशान न हो मगर जब घड़ी भर रात गुजरी तो गारतगरों ने जुल्मओ-सितम ढाना शुरू किए। शहर को आग लगा दी। सुबह, जो कि कयामत की सुबह थी, तमाम शाही फौज और रोहिल्ले टूट पड़े और कत्ल व गारत में लग गए। मैं कि फकीर था अब और ज्यादा दरिद्र हो गया, सड़क के किनारे जो मकान था वह भी ढहकर बराबर हो गया।

जाटों से खुश हुआ था अब्दाली

पानीपत में विजय प्राप्त करने के उपरांत अब्दाली ने विजयोल्लास के साथ दिल्ली में प्रवेश किया तथा उसने सूरजमल के विरुद्ध अभियान करने के संबंध में विचार किया क्योंकि उसने मराठाओं को शरण दी थी। दिल्ली से शाह के प्रस्थान के पांच दिन पूर्व समाचार प्राप्त हुआ कि सूरजमल ने अकबराबाद (आगरा) के किलेदार को किला खाली करने पर विवश कर दिया है, और किले में प्रवेश पा चुका है। अब्दाली की संतुष्टि के लिए उसने (सूरजमल) उसे एक लाख रुपया दिया तथा पांच लाख रुपया बाद में देने का वादा किया, जो कभी नहीं दिए गए। वर्षा ऋतु आ पहुंची थी तथा पृष्ठ भाग में सिखों ने अपना सिर उठाना आरंभ कर दिया, अब्दाली हठी जाट से इतना भर पाकर प्रसन्न था। 21 मई 1761 को वह शालीमार बाग (दिल्ली के बाहर) से अपने देश के लिए रवाना हुआ।

(लेखक दिल्ली के अंजाने इतिहास के खोजी हैं)

Delhi Assembly Election 2020: केजरीवाल को मिला 'PK' का साथ, अब AAP को जिताएंगे चुनाव !

जानिए कौन हैं चुनावी रणनीति के चाणक्य 'PK', 8 साल में जीत का स्कोर रहा है 5-1

दिल्ली-एनसीआर की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक

1952 से 2020 तक इन राज्यों के विधानसभा चुनाव की हर जानकारी के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.