Rakesh Tikait ने दी केंद्र सरकार को चेतावनी, जबरन आंदोलन खत्म करवाया तो गांवों में नहीं मिलेगी भाजपा नेताओं को एंट्री

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की फाइल फोटो।

Rakesh Tikait Kisan Andolan राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार आंदोलन को जबरन खत्म नहीं करवा सकती। केंद्र सरकार यह न सोचे कि दबाव डालकर धरने से लोगों को घर भेज दिया जाएगा। ऐसा किया तो गांवों में किसी भी भाजपा नेता को एंट्री नहीं मिलेगी।

Jp YadavThu, 22 Apr 2021 07:28 AM (IST)

नई दिल्ली/सोनीपत, जागरण संवाददाता। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ कुंडली बॉर्डर पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के आंदोलनकारियों का धरना जारी है। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते खतरे और प्रभाव के बीच भी संयुक्त किसान मोर्चा (Sanyukt Kisan Morcha) लगातार साढ़े चार महीने से चल रहे धरना प्रदर्शन से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।

आलम यह है कि दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण बेकाबू है, लेकिन किसान नेता आंदोलन जारी रखने के रुख पर अड़े हैं। लॉकडाउन जैसी स्थिति में भी किसान आंदोलन को जारी रखने का एलान कर चुके किसान नेता लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे लगता नहीं है कि धरना प्रदर्शन अगले कुछ महीनों में खत्म होने वाला है।

इस बीच बुधवार को कुंडली बॉर्डर पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait, National Spokesperson of Bharatiya Kisan Union) ने कहा कि सरकार आंदोलन को जबरन खत्म नहीं करवा सकती। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार यह न सोचे कि दबाव डालकर धरने से लोगों को घर भेज दिया जाएगा। अगर केंद्र सरकार ने जबरदस्ती की तो गांवों में किसी भी भाजपा नेता को घुसने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन लगने के बावजूद आंदोलन नहीं थमेगा। राकेश टिकैत बुधवार को राई स्थित एक ढाबे पर प्रेसवार्ता कर रहे थे।

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उधर, भाकियू के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने ढाबा मालिक रामसिंह राणा द्वारा धरने पर आरओ का पानी और आटा मुहैया करवाने के लिए आभार जताया। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि जो भी व्यक्ति आंदोलन की मदद करता है, उसको केंद्र सरकार ईडी के जरिये नोटिस भिजवा देती है।

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यहां पर बता दें कि दिल्ली-एनसीआर के चारों बॉर्डर (टीकरी, सिंघु, शाहजहांपुरऔ गाजीपुर) पर किसानों का धरना पिछले साल 28 नवंबर से ही जारी है। किसान प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि जब तक तीनों केंद्रीय कृषि कानून पूरी तरह से वापस नहीं ले लिए जाते, तब तक आंदोलन खत्म करने का तो सवाल ही नहीं उठता है।

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