Kisan Andolan: यूपी गेट पर पहुंचे पंजाबी सिंगर बब्बू मान, किसानों के मुद्दे पर राहुल गांधी को दी नसीहत

Kisan Andolan पंजाबी गायक बब्बू मान ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद के बाहर ट्रैक्टर चलाने की बजाय संसद के अंदर कृषि कानून को खत्म कराने की लड़ाई लड़नी चाहिए। वह भी किसान के बेटे हैं।

Mangal YadavTue, 27 Jul 2021 07:16 AM (IST)
राहुल गांधी संसद के अंदर लड़े लड़ाई : बब्बू मान

 नई दिल्ली/ गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। यूपी गेट पर कृषि कानून विरोधी धरना सोमवार को भी जारी रहा। धरने में पंजाबी गायक बब्बू मान ने पहुंचकर अपना समर्थन दिया। पंजाबी गायक बब्बू मान ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद के बाहर ट्रैक्टर चलाने की बजाय संसद के अंदर कृषि कानून को खत्म कराने की लड़ाई लड़नी चाहिए। वह भी किसान के बेटे हैं। कानून वापस होने पर ही धरनास्थल से लोग घर लौटेंगे। सरकार जिद पर अड़ी है। जिद तो बच्चा करता है। यह आंदोलन लंबा चलने वाला है।

यूपी गेट पहुंचे गौरव टिकैत ने कहा कि पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में महापंचायत का आयोजन होगा। जिसमें विभिन्न जिलों के हजारों लाेग हिस्सा लेंगे। आंदोलन को हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है।

मृतक को दी श्रद्धांजलि

सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर पलटने से मौत का शिकार हुए नवरीत को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मृतक के परिवार वाले भी यूपी गेट पहुंचे। विभिन्न जिलों से आए प्रदर्शनकारी यूपी गेट पर श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने पर यूपी गेट भारी पुलिस बल तैनात रहा।

महिलाओं ने कहा, कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को मिले सम्मान

वहीं, कृषि कानूनों के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में तीसरे दिन महिलाओं ने संसद की तरह कार्यवाही चलाई। अब तक एक स्पीकर और एक डिप्टी स्पीकर बनाया जाता था, लेकिन महिलाओं ने दो डिप्टी स्पीकर बनाए। इस दौरान 110 महिलाओं ने आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम, 2020 पर चर्चा की और बाद में इसे खारिज करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। वहीं, पंचायतों और स्थानीय निकायों की तर्ज पर संसद व विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 33 फीसद आरक्षित करने की मांग की गई। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले चल रहे प्रदर्शन में अभिनेत्री गुल पनाग भी पहुंचीं। उन्होंने कृषि कानूनों को रद करने की मांग की।

मोर्चा से जुड़ीं मेधा पाटकर ने कहा कि कृषि कानूनों को गलत ढंग से संसद में पारित किया गया है, इसलिए इनमें संशोधन नहीं, बल्कि इन्हें रद किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सोमवार को हुई चर्चा में दो प्रस्ताव प्रमुख रूप से पारित किए गए। पहले प्रस्ताव के तहत महिलाओं के कृषि में योगदान को सम्मान मिलना चाहिए। साथ ही विधानसभा व लोकसभा में 33 फीसद महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाए। इस संबंध में संविधान में संशोधन किया जाए। फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लागू करने के लिए कानून बनाया जाए। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

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