पेट्रोल-डीजल की छलांग से सांसत में बाजार, बढ़ सकती है महंगाई; लोगों को होगी परेशानी

दिल्ली में एक साल के भीतर प्रति लीटर डीजल 18 रुपये तक महंगा हो चुका है।

व्यापार से जुड़ा हर वर्ग इसके लिए अब दिल्ली व केंद्र सरकार की ओर देख रहा है तथा उनसे उत्पाद शुल्क व वैट में कटौती की मांग कर रहा है। इसके साथ ही पेट्रो पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग मुखर होने लगी है।

Prateek KumarThu, 25 Feb 2021 06:45 AM (IST)

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार हो रही वृद्धि से दिल्ली के बाजार सांसत में हैं। कुछ ट्रांसपोर्टर जहां माल ढुलाई व भाड़ा बढ़ाने की बात कहने लगे हैं, वहीं कुछ ने तो इसे बढ़ा भी दिया है। इसकी वजह यह है कि दिल्ली में एक साल के भीतर प्रति लीटर डीजल 18 रुपये तक महंगा हो चुका है। बुधवार को दिल्ली में डीजल की दर 81.36 रहीं तो पिछले वर्ष 10 मार्च को यह 63.05 रुपये था। इसी तरह एक साल में पेट्रोल के दाम में 19 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में माल ढुलाई बढ़ने के चलते सब्जी व अनाज जैसे जरूरी सामानों के साथ अन्य सामानों के दाम बढ़ने का संकट आसन्न हो गया है।

व्यापार से जुड़ा हर वर्ग इसके लिए अब दिल्ली व केंद्र सरकार की ओर देख रहा है तथा उनसे उत्पाद शुल्क व वैट में कटौती की मांग कर रहा है। इसके साथ ही पेट्रो पदार्थों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग मुखर होने लगी है। डीजल के दाम में बढ़ोतरी से सड़कों पर व्यावसायिक वाहनों की कमी का भी नया संकट पैदा होने लगा है। ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों के मुताबिक एक-दो ट्रकों के मालिक सही किराया न मिल पाने की वजह से ट्रकों को सड़क पर उतारने से परहेज करने लगे हैं।

डीजल का दाम बढऩे से कई तरह की समस्याएं पैदा हो गई हैं। व्यावसायिक वाहनों के परिचालन के खर्च में 60 फीसद हिस्सेदारी डीजल की होती है। स्थिति यह है कि डीजल का दाम बढ़ने से परिचालन की लागत में 30 फीसद का इजाफा आया है। इसलिए बड़े ट्रांसपोर्टर किराया बढ़ाने लगे हैं, जबकि छोटे ट्रांसपोर्टरों को सही किराया नहीं मिल रहा है तो वह वाहनों को सड़क पर उतारने से परहेज करने लगे हैं। इन सब कारणों से महंगाई बढ़ेगी।

परमीत सिंह गोल्डी, अध्यक्ष, दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन

पेट्रोल का दाम बढऩे का साफ असर वाहन चालकों पर पड़ा है। अब वे पेट्रो पदार्थ लेने में जेब का खासा ध्यान रख रहे हैं तथा इसे लेकर वे हमसे बातें कर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि प्रीमियम पेट्रोल की मांग एकदम से घट गई है, क्योंकि यह सामान्य पेट्रोल के मुकाबले तकरीबन चार रुपये महंगा है। सामान्य पेट्रोल जहां 90.93 रुपये प्रति लीटर है तो प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 94.25 रुपये प्रति लीटर है। इसका एक ही हल है कि पेट्रो पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।

निश्चल सिंघानिया, प्रवक्ता व पूर्व अध्यक्ष, दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन

इसका साफ असर बाजारों पर पडऩे वाला है। कुछ ट्रांसपोर्टरों ने किराया बढ़ा दिया है तो कुछ इसकी तैयारी कर रहे हैं। इसका सीधा असर सामानों की कीमत पर पड़ेगा। अभी भी कारोबार पर कोरोना का असर है। उसमें अगर महंगाई बढ़ती है तो कारोबार कम होगा। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार पहले तो पेट्रो पदार्थोँ से तत्काल उत्पाद शुल्क घटाएं। आगे इसे जीएसटी के दायरे में लाने की तैयारी करें। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम में 30 रुपये तक की कमी आ जाएगी।

बृजेश गोयल, चेयरमैन, चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआइ)

अभी बाजार मेें उतनी मांग नहीं है। इसलिए ट्रांसपोर्टरों के पास ज्यादा काम नहीं है। ऊपर से हर चीजों की महंगाई उन्हें परेशान किए हुए है। अब डीजल के बढ़ते दाम ने ट्रांसपोर्टरों को काफी मुश्किलों में डाल दिया है। कई की इतनी भी कमाई नहीं हो रही है कि वे अपने व्यावसायिक वाहन की किस्त भी भर पाएं। इसलिए गाडिय़ां उठा ली जा रही हैं।

राजेंद्र कपूर, अध्यक्ष, दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट आर्गेनाइजेशन

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