कोर्ट में याचिका, सरकारी स्कूल के गरीब बच्चों के लिए किए जाए आइसोलेशन केंद्र स्थापित

याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि केंद्र व दिल्ली सरकार को कदम उठाने के लिए निर्देश दें।

याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि केंद्र व दिल्ली सरकार को इस संबंध में कदम उठाने के लिए निर्देश दिए जाएं याचिका में दावा किया गया है कि गरीबों की बड़ी आबादी होम आइसोलेशन के नियमों का पालन करने में सक्षम नहीं है।

Vinay Kumar TiwariMon, 17 May 2021 12:51 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकारी स्कूल के गरीब बच्चों के लिए आइसोलेशन केंद्र स्थापित करने की मांग की गई है। याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि केंद्र व दिल्ली सरकार को इस संबंध में कदम उठाने के लिए निर्देश दिए जाएं, साथ ही मौजूदा होम आइसोलेशन नीति में संशोधन की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि गरीबों की बड़ी आबादी होम आइसोलेशन के नियमों का पालन करने में सक्षम नहीं है, क्योंकि उनके पास कोरोना संक्रमित सदस्यों को अलग रखने के लिए कमरा ही नहीं है।याचिका में बच्चों के लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन सुविधाओं और आइसोलेशन केंद्र बनाने की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार चिकित्सा विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखा जाए तो महामारी की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो सकते हैं।वहीं, होम आइसोलेशन नीति के तहत संक्रमित व्यक्ति को अलग कमरे में रखा जाना चाहिए, जिसमें शौचालय की सुविधा हो, ताकि परिवार के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क कम से कम हो, साथ ही संक्रमित व्यक्ति की देखभाल के लिए भी एक व्यक्ति होना चाहिए, लेकिन निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के पास अलग से कमरे की सुविधा नहीं है। इसके कारण ही ज्यादा से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।

उधर कोरोना संक्रमण कालोनियों के साथ ही अब गांवों में भी तेजी से फैल रहा है। गांवों में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लोग कई तरह के अभियान चला रहे हैं। फतेहपुरबेरी गांव के निवासी ऋषिपाल महाशय ने गांव में संक्रमण के खतरे को दूर करने के साथ ही यहां रहने वाले प्रवासी कामगारों की मदद के लिए अभियान शुरू किया है। वे इन प्रवासीकामगारों की कोरोना की जांच करवाते हैं। अगर वे संक्रमित पाए जाते हैं तो उन्हें आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कराने के साथ ही उनके लिए निश्शुल्क दवा व आक्सीजन भी उपलब्ध कराने में सहायता करते हैं।

ऋषिपाल ने बताया कि वे अपने प्रयास से अब तक गांव में 500 से ज्यादा घरों को सैनिटाइज करवा चुके हैं। लोगों के घरों को सैनिटाइज करवाने के लिए वे निगम कर्मियों को बुलाते हैं। कई बार अन्य जगहों पर व्यस्त होने के कारण निगमकर्मी समय पर घर सैनिटाइज करने नहीं आ पाते हैं। ऐसे समय के लिए ऋषिपाल ने खुद भी मशीन आदि की व्यवस्था कर रखी है और वे खुद लोगों के घर सैनिटाइज करते हैं। वे लोगों को संक्रमित होने से पहले व संक्रमित होने के बाद बरती जाने वाली सावधानियां भी बताते हैं।

उन्होंने बताया कि गांव में तमाम प्रवासी कामगार रहते हैं। लाकडाउन के कारण उनका कामधंधा आजकल छूट गया है। ऐसे लोगों को भोजन, दवा व उनके लिए मास्क आदि की व्यवस्था भी वह कर रहे हैं। इसमें वे गांव के और भी युवाओं की मदद लेते हैं। वे कहते हैं कि हर कोई ऐसे लोगों की मदद करना चाहता है, लेकिन कोई खुद आगे नहीं आता है। इसलिए वे गांव के युवाओं से भी मदद जुटाकर प्रवासी कामगारों तक पहुंचाते हैं।

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