जंतर मंतर पर धरने पर बैठी पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती बोलीं यहां गोडसे का कश्मीर बन रहा

जहां लोगों को बोलने तक की आजादी नहीं है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ये बातें सोमवार को जंतर-मंतर पर आयोजित एक धरने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि वो राजधानी दिल्ली में कश्मीर के मौजूदा हालात को सभी के समक्ष रखने आई हैं।

Vinay Kumar TiwariMon, 06 Dec 2021 02:50 PM (IST)
राजधानी दिल्ली में कश्मीर के मौजूदा हालात को सभी के समक्ष रखने आई हैं।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। यह मेरे गांधी का भारत नहीं नाथूराम गोडसे का भारत लगता है। यहां गोडसे का कश्मीर बनाने की साजिश हो रही है। जहां लोगों को बोलने तक की आजादी नहीं है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ये बातें सोमवार को जंतर-मंतर पर आयोजित एक धरने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि वो राजधानी दिल्ली में कश्मीर के मौजूदा हालात को सभी के समक्ष रखने आई हैं।

जंतर मंतर पर धरने पर बैठी पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती बोलीं प्रचार से अलग है नए कश्मीर की सच्चाई

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार भारत की जनता के सामने जम्मू कश्मीर के माहौल को शांतिपूर्ण बता रही है। लेकिन असलियत में यहां कि सड़कों पर लोगों का खून बहाया जा रहा है। बात-बात पर यहां के नागरिकों पर आतंकवाद विरोधी कानून थोपे जा रहे हैं। देश की जनता के सामने जिस नए कश्मीर का प्रचार किया जा रहा है वह सच्चाई नहीं है। एक कश्मीरी पंडित की दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है। 18 महीने की लड़की सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए अपने पिता का शव पाने के लिए प्रदर्शन कर रही है। कश्मीर में एक बिहारी व्यक्ति को मार दिया जाता है।

मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये नया हिंदुस्तान है, यहां पर संविधान के बारे में बात करने वाले हर व्यक्ति को टुकड़े-टुकड़े गिरोह का तमगा दे दिया जाता है। कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे किसानों को खालिस्तानी कहा जाता है और उन पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। कश्मीर के हालातों को जो देश की जनता के सामने रखता है उसे पाकिस्तानी बता दिया जाता है।

वहीं, अनुच्छेद 370 को हटाने के सवाल पर मुफ्ती ने जवाब दिया कि कश्मीर की जनता को अनुच्छेद 370 के नाम पर लूटा और धोखा दिया गया है। भारत में कई ऐसे राज्य हैं जो बाहरी लोगों को जमीन खरीदने की अनुमति नहीं देते या अपने राज्य के लोगों के लिए रोजगार सुनिश्चित करते हैं। अगर केंद्र सरकार को उन राज्यों के लिए दिक्कत नहीं है तो कश्मीर पर सवाल क्यों उठाना। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में तत्काल प्रभाव से वहां की जनता से संवाद शुरू करने की जरूरत है।

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