रेजिडेंट डाक्टरों की हड़ताल से बिना इलाज घर वापस लौटे रहे मरीज

सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे अस्पताल की ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं बंद होने से लोग परेशान हैं। अस्तपाल में दूर-दराज से लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।यहां डाक्टरों ने ओपीडी व वार्ड में सेवाओं का बहिष्कार करते हुए अपना विरोध जताया है।

Pradeep ChauhanTue, 07 Dec 2021 04:37 PM (IST)
डॉक्टर कह रहे हैं कि पर्ची नहीं बनेगी।

नई दिल्ली,आनलाइन डेस्क। सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे अस्पताल की ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं बंद होने से लोग परेशान हैं। अस्तपाल में दूर-दराज से लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन डाक्टरों के हड़ताल पर होने से वापस लौटना पड़ रहा है। कई लोगों ने अस्पताल की ताजा तस्वीर सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्म पर शेयर की हैं।

मंगलवार को अस्पताल पहुंची एक महिला ने बताया, "मैं अपने बच्चे के इलाज के लिए आई थीं। डॉक्टर कह रहे हैं कि पर्ची नहीं बनेगी। इसलिए बच्चे के साथ बिना दवाई लिए वापस लौटना पड़ा। दरअसल, नीट पोस्ट ग्रेजुएट काउंसलिंग 2021 में हो रही लेटलतीफी के कारण रेजिडेंट डाक्टर हड़ताल पर हैं। मंगलवार को भी सफदरगंज,हरि नगर स्थित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल और अन्य में ओपीडी व इमरजेंसी जैसी सेवाएं बाधित रही। यहां डाक्टरों ने ओपीडी व वार्ड में सेवाओं का बहिष्कार करते हुए अपना विरोध जताया है।

दिल्ली: सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इस दौरान आपातकालीन सेवाएं बाधित होने से इलाज के लिए आए लोग परेशान हो रहे हैं। एक महिला ने बताया, मैं अपने बच्चे के इलाज के लिए आई थीं। डॉक्टर कह रहे हैं कि पर्ची नहीं बनेगी। क्या करें? अब हम घर जाएंगे।

डाक्टरों की मांग है कि जल्द से जल्द नीट पोस्ट ग्रेजुएट काउंसलिंग की जाए, जिससे अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को दूर किया जा सके। हालांकि, इसका असर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर नहीं पड़ा। सीनियर डाक्टर व कंसलटेंट ने ओपीडी से लेकर वार्ड तक में मरीजों का इलाज किया।

रेजिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन डीडीयू अस्पताल के अध्यक्ष डा. राजकुमार ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान डाक्टर फ्रंटलाइन वर्कर के तौर पर काम कर रहे हैं। हेल्थ केयर सर्विस में रेजिडेंट डाक्टर रीढ़ की हड्डी के समान हैं। ऐसे में काउंसिलिंग बहुत जरूरी है। काउंसलिंग होने के बाद ही नए डाक्टर अस्पताल में आ पाएंगे। ऐसे में जल्द से जल्द हमारी मांग को पूरा किया जाए। अस्पतालों में रेजिडेंट डाक्टरों पर काम का दबाव काफी ज्यादा है।

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