पीपीपी माडल पर आठ पार्कों में शुरू होगी नर्सरी

पार्कों में पीपीपी (निजी-सार्वजनिक भागीदारी) माडल पर नर्सरी बनाई जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के लिए आठ पार्कों का फिलहाल चयन किया गया है। जिसे भी जगह आवंटित की जाएगी वह निगम को शुल्क देने के साथ हर साल पेड़ पौधे भी उपलब्ध कराएगा।

Prateek KumarWed, 08 Dec 2021 09:06 PM (IST)
पांच वर्ष के लिए दी जाएगी जगह, लोगों को बेचने के साथ निगम को भी देने होंगे पौधे।

नई दिल्ली [स्वदेश कुमार]। मालियों की कमी से जूझ रहे पूर्वी निगम ने पार्कों की देखरेख के लिए एक और योजना तैयार की है। इसके तहत पार्कों में पीपीपी (निजी-सार्वजनिक भागीदारी) माडल पर नर्सरी बनाई जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के लिए आठ पार्कों का फिलहाल चयन किया गया है। जिसे भी जगह आवंटित की जाएगी, वह निगम को शुल्क देने के साथ हर साल पेड़, पौधे भी उपलब्ध कराएगा। साथ ही पूरे पार्क के रखरखाव की भी जिम्मेदारी उसी की होगी।

निगमायुक्त विकास आनंद ने बताया कि इस योजना के तहत पार्क के 20 फीसद हिस्से में नर्सरी बनाई जाएगी। 80 फीसद स्थान पार्क क्षेत्र होगा जिसके रख-रखाव का दायित्व नर्सरी संचालक का होगा। इसमें साफ-सफाई, सिंचाई, कटाई-छंटाई और सुंदरीकरण का कार्य भी शामिल है। पूर्वी निगम द्वारा ओपन टेंडर के आधार पर पांच वर्षों के लिए यह जगह आवंटित की जाएगी। इसके लिए कुछ शर्ते निधारित की गई हैं। पूर्वी निगम के पार्क में नर्सरी बनाने के लिए इच्छुक आवेदनकर्ता का इंडियन नर्सरी एसोसिएशन में पंजीकरण होना आवश्यक है।

आवंटन के बाद नर्सरी संचालक को 37.94 रुपये प्रति मीटर वार्षिक दर से पूर्वी निगम को शुल्क का भुगतान करना होगा। साथ ही प्रत्येक वर्ष 500 झाड़ीनुमा पौधे तथा 500 इंडोर पौधे देना होगा, जिनका प्रयोग पूर्वी निगम द्वारा अपने पार्कों और क्षेत्र के सुंदरीकरण के लिए किया जाएगा।

बता दें कि पूर्वी निगम आर्थिक संकट से गुजर रहा है। डीडीए के 65 पार्कों के रख-रखाव का दायित्व भी पूर्वी निगम के पास आ गया है। ऐसे में पार्कों की देखरेख के लिए पूर्वी निगम द्वारा विभिन्न योजना बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी निगम की इस पहल से नागरिकों को अपने घर के आस-पास नर्सरी की सुविधा उपलब्ध होगी। यहां से वे पौधे खरीद सकेंगे। साथ ही निगम के पार्कों का बेहतर रख-रखाव सुनिश्चित हो पाएगा। विकास आनंद ने कहा कि यदि यह योजना सफल रही तो अन्य पार्कों में भी इसे लागू किया जाएगा।

और भी हैं योजनाएं

बेहतर रखरखाव के लिए कुछ पार्कों को आरडब्ल्यूए और एनजीओ को आउटसोर्स किया जाएगा।

पार्कों में विज्ञापन के लिए डिस्प्ले बोर्ड की अनुमति दी जाएगी। बदले में पार्क का जिम्मा उठाना होगा।

कई पार्कों में दूध के क्योस्क लगाने के लिए जगह दी जाएगी। इसमें भी पार्क की जिम्मेदारी की शर्त शामिल है।

कुल पार्क : 2200

माली के स्वीकृत पद : 1200

खाली पद : 500

पार्कों का कुल क्षेत्र : 900 एकड़

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