दिल्ली में कत्ल की खौफनाक तस्वीरें सीसीटीवी में कैद, सड़क पर तड़पता रहा युवक; लोग बने रहे तमाशबीन

सीसीटीवी फुटेज में राजधानी की सड़क पर हुए कत्ल की खौफनाक तस्वीरों के बीच दिल्ली के लोगों का यह संवेदनहीन चेहरा भी दिखाई दिया। मनोज की हत्या की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है जिसमें वह बदमाशों से बचने के लिए भाग रहे हैं और सड़क से लोग गुजर रहे हैं।

Mangal YadavSun, 24 Oct 2021 10:49 AM (IST)
मदद तलाश रही आंखों को दिख रहे थे तमाशबीन

नई दिल्ली [धनंजय मिश्र]। सड़क पर दौड़ते वाहनों के बीच खून से लथपथ एक युवक की आंखें मदद तलाश रही थीं, लेकिन गुजरने वाले तमाशा देखकर निकल जा रहे थे। उन्होंने घायल को अस्पताल पहुंचाना तो दूर युवक के शरीर से बह रहे खून को रोकने का भी प्रयास नहीं किया। सीसीटीवी फुटेज में राजधानी की सड़क पर हुए कत्ल की खौफनाक तस्वीरों के बीच दिल्ली के लोगों का यह संवेदनहीन चेहरा भी दिखाई दिया।

दरअसल, मनोज की हत्या की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है, जिसमें वह बदमाशों से बचने के लिए भाग रहे हैं और सड़क से लोग गुजर रहे हैं। यही नहीं वारदात के बाद खून से लथपथ मनोज की आंखें हर तरफ मदद तलाश रही हैं, लेकिन लोग हैं कि तमाशा देखकर निकल जा रहे हैं।

यही नहीं मनोज के बड़े भाई मुकेश ने बताया कि आसपास के लोगों ने मनोज के दुकान मालिक श्रवण को सूचना दी, उनके फोन पर जिस समय वह घटनास्थल पर पहुंचे वहां तमाम लोग खड़े हुए थे, लेकिन कोई उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास नहीं कर रहा था। मुकेश का कहना है कि मनोज को अस्पताल पहुंचाने के लिए उन्होंने कई कार सवारों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन वह मदद का तैयार नहीं हुए।

पुलिसकर्मियों ने फेर लीं आंखें तो ई-रिक्शा से पहुंचाया अस्पताल

मनोज के भाई मुकेश का दावा है कि जिस समय वह कार सवारों से मदद मांग रहे थे। उसी समय गश्ती पुलिस की एक गाड़ी भी मौके पर पहुंची थी। पुलिसकर्मियों से उन्होंने मनोज को अस्पताल पहुंचाने के लिए मदद मांगी, लेकिन वह ई-रिक्शा से ही मनोज को अस्पताल ले जाने की बात कहते हुए चले गए। इसके बाद मुकेश ने ई-रिक्शा से मनोज को अस्पताल पहुंचाया। इससे उनका काफी खून बह गया। मुकेश का कहना है कि यदि समय पर मदद मिल जाती तो शायद उनके भाई की जान बच जाती। हालांकि, डीसीपी श्वेता चौहान ने मुकेश के आरोपों को निराधार बताया है।

पिता को ढूंढ रही छह वर्षीय बेटी

मनोज की छह वर्षीय बेटी ट्विंकल अपने पिता को ढूंढ रही है। छोटे भाई बबलू ने बताया कि मनोज अपने बच्चों का रोज कुछ न कुछ खाने के लिए जरूर लाते थे। दोनों बच्चे अपने पिता के बिना अब कैसे रहेंगे। मुकेश ने बताया कि मनोज अपनी मेहनत से परिवार का भरण पोषण कर रहा था। अब उनकी मौत हो जाने के बाद बच्चों और पत्नी की देखभाल कौन करेगा। परिवार में गत चार वर्ष में चार सदस्यों की मौत हो चुकी है।

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