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नवनीत कालरा को कोर्ट से नहीं मिली राहत, गुरुवार को सुबह 10 बजे फिर होगी सुनवाई

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के मामले में अदालत में सुनवाई हो रही है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकार ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खुद खरीदकर बाजार तक पहुंचाया नहीं। और जो लोग बेच रहे थे उनको पकड़ लिया। अब वे लोग कहां जाए जो 70 हजार रुपये देकर भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदकर अपने लोगों की जान बचाना चाहते हैं।

Prateek KumarWed, 12 May 2021 06:45 AM (IST)

नई दिल्ली [अरविंद द्विवेदी]। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के मामले में आरोपित रेस्टोरेंट कारोबारी नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका पर साकेत कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई हुई। इस दौरान बचाव पक्ष द्वारा न्यायिक क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए गए। इससे पहले मंगलवार को मामले की ब्रीफिंग जिला जज के सामने भी की गई थी। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमित दास की अदालत में सुनवाई हुई और कोर्ट ने मामले को बुधवार सुबह 10 बजे के लिए लिस्ट किया है। इधर बुधवार को सुनवाइ के दौरान नवनीत कालरा को कोर्ट ने फिलहाल राहत नहीं दी है। गुरुवार सुबह 10:00 बजे कोर्ट इस मामले में अपना निर्णय सुनाएगा। वहीं, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामदगी के मामले में गिरफ्तार पांच व्यक्तियों में से चार व्यक्तियों को साकेत कोर्ट ने रुपये 50000 के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है।

इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि सरकार ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खुद खरीदकर बाजार तक पहुंचाया नहीं। और जो लोग बेच रहे थे उनको पकड़ लिया। अब वे लोग कहां जाए जो 70 हजार रुपये देकर भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदकर अपने लोगों की जान बचाना चाहते हैं।

सुनवाई के दौरान नवनीत कालरा के वकील ने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को पुलिस के कई अधिकारियों को भी बेचा गया और पैसों का ट्रांसजेंक्शन रिकार्ड हमारे पास मौजूद है। सब कुछ वैध तरीके से किया गया। फिर यह जमाखोरी या कालाबाजारी कैसे हुई। लुक आउट नोटिस जारी करने का क्या मतलब है। 

अभियोजन पक्ष ने कहा कि 10 से 20 हजार रुपये में आने वाले कंसंट्रेटर को 70 हजार रुपये में अपराध है। अभियोजन पक्ष की तरफ से आरोप लगाया गया कि कालरा ने चीन से घटिया मशीनें खरीदकर भारत में महंगे दामों पर बेचा। इस पर कोर्ट ने कहा कि चीन से सामान आयात करने का अधिकार क्षेत्र केंद्र सरकार के पास है जिसकी अनुमति केंद्र सरकार ने दी है। ऐसे में व्यापारियों पर आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं।

सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमित दास के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अपना जवाब कोर्ट में रखा। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। इसके बाद बचाव पक्ष द्वारा यह सवाल भी उठाया गया कि क्या यह कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर सकता है।

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