नवनीत कालरा केस : बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे कोर्ट फैसला सुनाएगी, अदालत में जमकर चली दलीलें

नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग की अदालत में बुधवार को नवनीत कालरा की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि नवनीत कालरा ने वैधानिक तरीके से कंसंट्रेटर को विदेश से आयात किया। इस दौरान उन्होंने सभी जीएसटी भी अदा की।

Prateek KumarThu, 13 May 2021 06:10 AM (IST)

नई दिल्ली [गौरव बाजपेई]। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के मामले में रेस्टोरेंट संचालक नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका पर साकेत कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे इस मामले में अपना फैसला सुनाएगा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग मामले की सुनवाई कर रहे थे। नवनीत कालरा की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा और विनीत मल्होत्रा ने बहस की जबकि अभियोजन पक्ष की तरफ से अतुल श्रीवास्तव बहस में शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी, एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट और महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

कालरा के वकील बोले- जब सरकार ने तय नहीं की कंसंट्रेटर की कीमत तो कैसे हुई कालाबाजारी

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग की अदालत में बुधवार को नवनीत कालरा की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि नवनीत कालरा ने वैधानिक तरीके से कंसंट्रेटर को विदेश से आयात किया। इस दौरान उन्होंने सभी जीएसटी भी अदा की। इसके अलावा बिक्री के दौरान भी उन्होंने पूरे वैधानिक तरीकों का पालन किया। जब सभी टैक्स रूल्स और बिल अदा किए गए हैं ऐसे में कालाबाजारी और जमाखोरी का सवाल कहां उठता है।

सरकार वकील ने कहा कि कालरा ने महामारी के दौर में भी घटिया कंसंट्रेटर ऊंची कीमत पर बेचे हैं

इसका विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश अधिवक्ता अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि नवनीत कालरा ने न सिर्फ महामारी के समय निम्न स्तर के कंसंट्रेटर बेचे हैं बल्कि मोटा मुनाफा कमाने के लिए उन्हें नियत दामों से अधिक दाम पर भी बेचा। अधिक दाम पर बेचने के आरोप पर विकास पाहवा ने कोर्ट को कहा कि सरकार ने अभी तक ऑफिस इन कंसंट्रेटर के दाम तय नहीं किए हैं। ऐसे में कंसंट्रेटर के दाम कितने होंगे यह नैतिकता का मामला है वैधानिकता का नहीं।

दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया है मामला

विकास पाहवा ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई गए एफआइआर में शामिल केवल धोखाधड़ी की धारा में ही सात वर्ष से अधिक की सजा है। जबकि बाकी अन्य धाराओं में इससे कम की सजा है जिनमें अग्रिम जमानत मिल सकती है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई उच्चस्तरीय कमेटी और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी हवाला दिया। विकास ने कहा कि अनिवार्य वस्तु अधिनियम- 2013 से लेकर अभी तक सरकार ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को अधिनियमित नहीं किया है। ऐसे में कालाबाजारी और जमाखोरी जैसी धाराएं इस मामले में जोड़ी नहीं जा सकती हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष ने बताया कि मामला अभी बेहद प्रारंभिक स्थिति में है। इसलिए आरोपित को न्यायिक हिरासत व पुलिस कस्टडी में लेकर जांच की आवश्यकता है। कोर्ट को अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर देना चाहिए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप गर्ग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे कोर्ट फैसला सुनाएगी।

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