दिल्ली के मेडिकल कालेजों में डाक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी, एनएमसी ने मांगी रिक्त पदों की जानकारी

मेडिकल कालेज व अस्पताल डाक्टरों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सफदरजंग आरएमएल लेडी हार्डिग मेडिकल कालेज सहित सभी मेडिकल शैक्षणिक संस्थानों से डाक्टरों के खाली पदों की जानकारी मांगी है।

Mangal YadavSat, 16 Oct 2021 02:02 PM (IST)
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मेडिकल कालेजों से मांगी डाक्टरों के खाली पदों की जानकारी

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। मेडिकल कालेज व अस्पताल डाक्टरों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सफदरजंग, आरएमएल, लेडी हार्डिग मेडिकल कालेज सहित सभी मेडिकल शैक्षणिक संस्थानों से डाक्टरों के खाली पदों की जानकारी मांगी है। मेडिकल कालेजों को आयोग से प्राप्त पत्र में कहा गया है कि संस्थान एमबीबीएस, मेडिकल स्नातकोत्तर व सुपर स्पेशियलिटी की सीटें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जबकि, मेडिकल कालेजों में लंबे समय से फैकल्टी स्तर के डाक्टरों के पद वर्षो से खाली पड़े हैं। आयोग ने सभी मेडिकल कालेजों से जल्दी ही इसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

मौजूदा समय में स्थिति यह है कि दिल्ली के भी बड़े अस्पताल व मेडिकल कालेज फैकल्टी स्तर के डाक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। इस वजह से अस्पताल प्रशासन अस्थायी तौर पर सहायक प्रोफेसर नियुक्त करने को मजबूर रहो रहे हैं। इससे मरीजों का इलाज तो प्रभावित हो ही रहा है, मेडिकल के छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। हाल ही में सफदरजंग अस्पताल ने एक साल के अनुबंध पर 117 सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की है। वहीं आरएमएल अस्पताल ने 45 व लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज ने 38 सहायक प्रोफेसरों की अनुबंध पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की है। क्योंकि, स्थायी तौर पर सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है।

एम्स में भी फैकल्टी स्तर के डाक्टरों के 1095 स्वीकृत पद हैं। इसमें हाल ही में जेरियाटिक ब्लाक के लिए सहायक प्रोफेसरों के 15 स्वीकृत पद शामिल नहीं है। जबकि, एम्स में अभी करीब 750 स्थायी फैकल्टी हैं। इस लिहाज से एम्स में 345 डाक्टरों की कमी है। एम्स में भी लंबे समय से स्थायी तौर पर सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हुई है। एनएमसी द्वारा मेडिकल कालेजों को जारी पत्र में कहा गया है कि डाक्टरों की कमी के मामले को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। 

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