...तो पैसों की वजह से किसी बच्चे के सपने अधूरे न रहें, छात्रों की कामयाबी में है मेरी सफलता- अलख पांडे

कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक्निकल इंस्टीट्यूट से मैकेनिकल इंजीनियरिंग से पढ़ाई करने वाले अलख पांडे ने 2016 में एक शिक्षक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। यूट्यूब चैनल के माध्यम से वह बच्चों को आइआइटी जेईई मेन जेईई एडवांस मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं के लिए निःशुल्क तैयारी कराते थे।

Sanjay PokhriyalSat, 27 Nov 2021 11:38 AM (IST)
2017 में इन्होंने 'फिजिक्स वाला' नाम से आनलाइन प्लेटफार्म की नींव रखी।

नई दिल्‍ली, अंशु सिंह। एक मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण अलख जीवन के संघर्षों को समझते थे। शुरुआत में इनके वीडियोज के विजुअल काफी कम आते थे, बावजूद इसके इन्होंने हार नहीं मानी और उत्साह के साथ रोजाना वीडियो अपलोड करते रहे। अलख कहते हैं, ‘ मैं हमेशा से किताबी कीड़ा रहा हूं। जब पढ़ाना शुरू किया तो शिक्षण से प्यार हो गया। इसने मुझे महसूस कराया कि मैं दूसरों के लिए कुछ कर पा रहा हूं। देश के अग्रणी फिजिक्स शिक्षकों में शुमार किया जाना, शिक्षण कार्य से ही संभव हो सका है। मैंने अपना एप उन लोगों की सहायता करने के एकमात्र उद्देश्य से डेवलप किया है जो भीड़ में पीछे रह गए हैं और खुद को असफल मानते हैं। मैं प्रत्येक छात्र के सीखने की यात्रा को व्यक्तिगत रूप से देखता हूं। ओलंपियाड से लेकर ड्रापर तक सभी के लिए ‘फिजिक्स वाला’ की अध्ययन सामग्री के साथ आत्मविश्वास महसूस होता है।‘

स्पष्ट विजन के साथ शुरुआत: यूट्यूब चैनल से शुरू करके 850 लोगों की एक बड़ी व मजबूत टीम तैयार करना, यकीनन अलख का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। शुरू में यूट्यूब से जो भी कमाई होती थी, उससे इन्होंने सक्षम लोगों की मजबूत टीम बनायी। कंपनी पूरी तरह से सेल्फ फंडेड है। अब तक कोई बाहरी सपोर्ट या निवेश नहीं हुआ है। वह कहते हैं, अक्सर लोग यह गलती करते हैं कि थोड़ा अच्छा पैसा आने पर उसका इस्तेमाल अपने ऐशोआराम और भौतिक जरूरतों के लिए करने लगते हैं। लेकिन मैंने जीवन में कोई भटकाव नहीं आने दिया। मेरा विज़न बिलकुल स्पष्ट रहा। मैं शुरू से एक पुरानी जीन्स और कुर्ते के साथ कंफर्टेबल रहा। जो भी कमाई हुई, उससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों की मदद कर सका। इसी का परिणाम है कि आज हमारे साथ 350 से भी अधिक टीचर हैं, 850 से अधिक स्टाफ हैं। हमारा नेटवर्क पूरे भारत में फैला है। पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और बंगाल में हम बच्चों की मदद कर पा रहे हैं। वैसे, इनके लिए मजबूत टेक्निकल सिस्टम विकसित करना कम चुनौतीपूर्ण नहीं था। कोरोना काल में ज्यादा से ज्यादा बच्चों के साथ जुड़ने के लिए इन्होंने जब एक एप लांच किया तो तीन घंटे में ही उस पर इतना ज्यादा ट्रैफिक आ गया कि डाउनलोड हुए की-एप ही क्रैश हो गए। हालांकि टेक्निकल टीम की मदद से समय रहते इसका समाधान निकाल लिया गया। इस अनुभव से भी सीख मिली।

आनलाइन एजुकेशन है एक बेहतर विकल्प: एडटेक प्लेटफार्म के माध्यम से आनलाइन शिक्षा कोविड-19 से बहुत पहले से हो रही है, लेकिन कोविड ने आनलाइन एजुकेशन को मेनस्ट्रीम एजुकेशन माडल में बदल दिया है। बच्चे हों या पैरेंट्स, सभी ने आनलाइन एजुकेशन के महत्त्व और लाभ को समझा। यह न केवल छात्रों और शिक्षकों, बल्कि निवेशकों के लिए भी सीखने का अवसर रहा। बताते हैं अलख, ‘इस दौरान हमने पैरेंट्स की आर्थिक मजबूरी को समझते हुए निःशुल्क कोर्सेज चलाये और बच्चों को स्कालरशिप आदि दिए। इसका परिणाम प्रतियोगी परीक्षा के परिणामों में देखने को मिला। कुछ बच्चों ने तो वीडियो देख कर पढ़ाई की और बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए। हमने कुछ बच्चों को लैपटाप और कुछ को डाटा भी उपलब्ध करवाए। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, इसलिए उनके सुनहरे भविष्य के लिए जितना करना संभव हो सके, वह कम ही होगा। मुझे लगता है कि एडटेक सेक्टर में सबसे अधिक वेंचर कैपिटल फंडिंग पाने वालों में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में से एक बनकर उभरा है। पारंपरिक शिक्षा की तुलना में आनलाइन शिक्षा अधिक किफायती है। यह विकल्प नहीं, एक आवश्यकता है।‘

आफलाइन शिक्षा से भी जुड़े: अलख की मानें, तो वह ज्यादा से ज्यादा बच्चों को फिजिक्स वाला के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहते हैं। वह बताते हैं, हमने करीब दस स्थानों पर आफलाइन पाठशाला भी शुरू की है। हमारा लक्षय 100 सेंटर स्थापित करना है। ये सेंटर दो टीचर माडल पर काम करते हैं, जिसमें एक टीचर सेंटर्स पर हजारों बच्चों को एक साथ एड्रेस करता है और उनके प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सेंटर पर मौजूद रहता है। इसके अलावा, हमने एक 24/7 डाउट इंजन की शुरुआत भी की है, जहां बच्चे कभी भी और कहीं से भी अपने डाउट क्लियर कर सकते हैं। 2017 से लेकर अब तक हम लगातार नये-नये तरीकों से बच्चों को एंगेज कर पा रहे हैं। हाल ही में जब एनईईटी और जेईई के परिणाम सामने आए तो मुझे अपने छात्रों द्वारा बहुत सारे धन्यवाद संदेश मिले जो मेरे लिए किसी सफलता से कम नहीं। मुझे ख़ुशी है कि मैं उनकी किसी तरीके से मदद कर पा रहा हूं।

करते रहें निरंतर प्रयास: मुझे याद है जब मैं मोदी नगर (उप्र) के एक इंस्टीट्यूट में फिजिक्स टीचर के लिए इंटरव्यू देने गया था। तब मेरे बेहद साधारण परिधान और व्यवहार को देखकर उस इंस्टीट्यूट के मालिक ने कहा था कि आप मास के टीचर नहीं बन सकते। उस अनुभव ने मुझे भावनात्मक रूप से आहत कर दिया था। तब अपनी बहन की प्रेरणा से मैंने मास तक पहुंचने और अपनी पहचान बनाने का संकल्प लिया। मुझे आज भी याद है कि कैसे एक वीडियो लेक्चर के लिए सात घंटे की तैयारी करनी पड़ती थी। लेक्चर को दिलचस्प एवं रुचिकर बनाने के लिए कभी बीच में गाना गाता था, तो कभी कुछ औऱ करता था। इसके लिए शुरू में मुझे आलोचना भी झेलनी पड़ी थी, लेकिन फिर वही मेरी पहचान बन गई। आज 'फिजिक्स वाला' का ब्रांड अंबैसडर कोई सेलिब्रिटी या निवेशक नहीं, बल्कि खुद बच्चे और उनके टीचर हैं। इसलिए कितनी भी कठिनाइयां आए, लेकिन हमे निरंतर प्रयास जारी रखना चाहिए।

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