जानिए कैसे एनजीओ ने बदल दी निगम स्कूल की तस्वीर, बच्चों को मिल रही प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधाएं

फाउंडेशन के शिक्षकों ने बच्चों को नवोन्मेषी तरीके से पढ़ाना शुरू किया तो बच्चों ने पढ़ाई में रुचि बढ़ा दी। अब इस स्कूल के बच्चे प्राइवेट स्कूल जैसा अनुभव कर रहे हैं। लाक डाउन के दौरान फाउंडेशन के शिक्षकों ने बच्चों को आनलाइन पढ़ाया ताकि उनकी पढ़ाई न रुके।

Mangal YadavThu, 21 Oct 2021 10:28 AM (IST)
जसोला स्थित निगम प्रतिभा विद्यालय में मोदीकेयर फाउंडेशन की ओर से लगाई गई फाइबर की कुर्सी व टेबल’ जागरण

नई दिल्ली [अरविंद कुमार द्विवेदी]। टीम भावना से मिलकर काम किया जाए तो सब कुछ संभव है। लक्ष्य हासिल करने के लिए किए गए निरंतर प्रयास से बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी पार हो जाती हैं। पांच साल के अंदर जसोला स्थित दक्षिणी दिल्ली नगर निगम प्रतिभा विद्यालय की तस्वीर बदलकर मोदी केयर फाउंडेशन ने यह साबित कर दिखाया है। फाउंडेशन ने निगम के शिक्षकों के साथ मिलकर न सिर्फ बच्चों की रुचि के अनुसार सिलेबस तैयार किया, बल्कि उसे लागू भी किया।

फाउंडेशन के शिक्षकों ने बच्चों को नवोन्मेषी तरीके से पढ़ाना शुरू किया तो बच्चों ने पढ़ाई में रुचि बढ़ा दी। इस कारण अब इस स्कूल के बच्चे प्राइवेट स्कूल जैसा अनुभव कर रहे हैं। लाक डाउन के दौरान फाउंडेशन के शिक्षकों ने बच्चों को आनलाइन पढ़ाया, ताकि उनकी पढ़ाई न रुके।

स्थानीय पार्षद नीतू मनीष चौधरी ने बताया कि निगम व फाउंडेशन के शिक्षकों के प्रयास से कई साल से यह स्कूल (बालिका) पूरे एसडीएमसी में टाप पर व बालक टाप थ्री में रहता है। फाउंडेशन के आने से स्कूल में काफी नई चीजें हुई हैं। शिक्षकों की संख्या बढ़ने से वे बच्चों को पर्याप्त समय दे पाते हैं।

मोदी केयर फाउंडेशन की डायरेक्टर लतिका दीक्षित ने बताया कि उद्यमी समीर मोदी ने शिक्षा के क्षेत्र में विकास व नवोन्मेष के लिए 1996 में फाउंडेशन शुरू किया था। फाउंडेशन विशेष रूप से स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है। वर्ष- 2013 में फाउंडेशन ने कूड़ा बीनने वाले उन बच्चों को पढ़ाने के लिए ख्वाबगाह प्रोजेक्ट शुरू किया था, जो स्कूल नहीं जाते थे। फिर इन बच्चों का निगम के स्कूलों के में दाखिला भी करवाया।

लतिका ने बताया कि वर्ष-2016 में निगम ने फाउंडेशन को यह स्कूल दिया था। फाउंडेशन ने पूरे स्कूल के फर्नीचर बदलवाए। अब यहां बच्चों की रुचि व सुविधा के अनुसार फाइबर की रंग-बिरंगी कुर्सी-टेबल हैं। ब्लैक बोर्ड की जगह ग्रीन बोर्ड और क्लास रूम में टाइलें लगवाई गईं। कमरों को बच्चों की पसंद के अनुसार सजाया गया। दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप बनवाने के साथ ही स्कूल के मैदान को संवारा गया है। वाटर प्यूरीफायर लगवाए गए हैं। स्कूल में नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाए जाते हैं। खेल व कंप्यूटर शिक्षा के लिए भी शिक्षक हैं।

अब बड़ी संख्या में अभिभावक यहां अपने बच्चों का एडमिशन करवा रहे हैं। लतिका ने बताया कि जल्द ही फाउंडेशन की ओर से स्कूल परिसर में एक बिल्डिंग भी बनवाई जाएगी। एसडीएमसी सेंट्रल जोन के स्कूल इंस्पेक्टर शीशपाल मीणा ने बताया कि स्कूल व फाउंडेशन के शिक्षकों के तालमेल से बच्चों को काफी फायदा मिल रहा है। अभी इस स्कूल की दोनों पाली में करीब तीन हजार बच्चे हैं।

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