नामी कंपनियों के नाम से इंटरनेट मीडिया पर मैसेज वायरल कर हो रही ठगी, आप भी न हो जाएं शिकार, पढ़ ले पूरी खबर

ट्विटर, फेसबुक समेत अन्य इंटरनेट मीडिया पर एक संदेश वायरल हो रहा था।

राजीव तनेजा ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में दी शिकायत में बताया कि ट्विटर फेसबुक समेत अन्य इंटरनेट मीडिया पर एक संदेश वायरल हो रहा था जिसमें यह दावा किया जा रहा था कि रेमडेसिविर और व अन्य कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए उपयोगी इंजेक्शन मिल जाएगा।

Vinay Kumar TiwariThu, 06 May 2021 05:49 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के इस दौर में जहां लोग अपनों की जान बचाने के लिए जद्दोजहद में लगे हैं तो वहीं दूसरी तरफ साइबर ठग चिकित्सा उपकरण व अन्य दवाओं के नाम पर धोखाधड़ी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। कोरोना काल में इन दिनों अब कुछ ठग नामी कंपनियों के नाम से फर्जी मैसेज बनाकर उसे इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर रहे हैं, उसके बाद ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं।

दरअसल, क्राइम 30 वर्षीय राजीव तनेजा ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में दी शिकायत में बताया कि ट्विटर, फेसबुक समेत अन्य इंटरनेट मीडिया पर एक संदेश वायरल हो रहा था जिसमें यह दावा किया जा रहा था कि रेमडेसिविर और व अन्य कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए उपयोगी इंजेक्शन मिल जाएगा। यह संदेश दवा बनाने वाली सिप्ला फाउंडेशन लिमिटेड नामक कंपनी के बताए जा रहे थे।

पीड़ित ने वायरल संदेश पर दिए गए नंबर पर संपर्क किया तो पंकज सिंह और राहुल यादव नाम के व्यक्तियों से बात हुई। दोनों ने इंजेक्शन दिलाने का झांसा देकर 70 हजार रुपये अकाउंट में मांगे। पीड़ित ने पैसे दे दिए। आरोपितों ने इंजेक्शन कोरियर के जरिये भेजने की बात कही। पैसे भेजने के बाद आरोपितों ने कोई इंजेक्शन नहीं भेजा। ऐसे में पीड़ित ने सोमवार को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को ईमेल भेज कर मामले की शिकायत किया। शिकायत पर अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शुरुआती जांच में अपराध शाखा के साइबर यूनिट ने ठगी करने वाले गिरोह के दो बैंक खाते सीज कर दिए हैं। वहीं आरोपितों की तलाश की जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह गिरोह बिहार और झारखंड से संचालित किया जा रहा है। जोकि नामी दवा कंपनियों के नाम पर फर्जी बैंक खाता खोलकर इंटरनेट मीडिया पर चिकित्सा उपकरण और दवाओं को देने का संदेश भेज फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि बिना जांचे और पुष्टि किए किसी को भी कोरोना के इलाज संबंधी चिकित्सा उपकरण व दवा देने के नाम पर पैसा न भेजे। इस तरह के मामलों में साइबर सेल में महज 16 दिन 60 से अधिक मामले दर्ज किए हैं।

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