Kisan Andolan: किसान आंदोलन से 60 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान, CAIT ने किया दावा

Kisan Andolan कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने दावा किया है कि दिल्ली और आसपास के राज्यों में एक साल से चल रहे कृषि कानून विरोधी आंदोलन के कारण अब तक करीब 60 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुकसान हो चुका है।

Jp YadavTue, 30 Nov 2021 11:53 AM (IST)
Kisan Andolan: किसान आंदोलन से 60 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान, CAIT ने किया दावा

नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। कारोबारी संगठनों के समूह कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने दावा किया है कि दिल्ली और आसपास के राज्यों में एक साल से चल रहे कृषि कानून विरोधी आंदोलन के कारण अब तक करीब 60 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुकसान हो चुका है। आंदोलनकारियों द्वारा राजमार्ग अवरुद्ध करने से साामान की आवाजाही प्रभावित होने से यह नुकसान हुआ है। संगठन के मुताबिक नुकसान के आंकड़े विभिन्न राज्यों से कैट की अनुसंधान शाखा द्वारा प्राप्त इनपुट पर आधारित हैं। बता दें कि जिस तीन कृषि कानून की वापसी की मांग को लेकर यह आंदाेलन शुरू हुआ, वह कानून केंद्र सरकार द्वारा संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में वापस लिया जा चुका है। पर आंदोलन अभी जारी है।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि पिछले वर्ष नवंबर व दिसंबर तथा इस वर्ष जनवरी में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश से दिल्ली को आपूर्ति पर काफी प्रभाव पड़ा है। किसानों द्वारा दिल्ली की ओर जाने वाले राजमार्गों के अवरुद्ध होने के कारण महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश से माल का परिवहन भी प्रभावित हुआ। इन राज्यों से आने वाली प्रमुख वस्तुओं में खाद्यान्न, एफएमसीजी उत्पाद, इलेक्ट्रिकल आइटम, बिल्डर्स हार्डवेयर, उपभोक्ता इलेक्ट्रानिक्स, आटो स्पेयर पार्ट्स, मशीनरी लेख, सेनेटरीवेयर और सेनेटरी फिटिंग, पाइप और पाइप फिटिंग, कृषि उपकरण, उपकरण, फर्निशिंग फैब्रिक, कास्मेटिक्स, आयरन और शामिल हैं। स्टील, लकड़ी और प्लाईवुड, खाद्य तेल, पैक्ड सामान्य सामान आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने बताया कि देश भर के विभिन्न राज्यों से प्रतिदिन लगभग 50 हजार ट्रक माल लेकर दिल्ली आते हैं और करीब 30 हजार ट्रक दिल्ली से दूसरे राज्यों में माल ढोते हैं। दिल्ली न तो एक कृषि प्रधान राज्य है और न ही एक औद्योगिक राज्य, इसे अपने सदियों पुराने व्यापार के वितरणात्मक स्वरूप को बनाए रखने के लिए माल की खरीद-बिक्री पर निर्भर रहना पड़ता है और इसलिए दिल्ली किसान आंदोलन का प्रमुख पीड़ित है।

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