वकीलों के पैनल पर रार : एलजी ने खारिज किया दिल्ली कैबिनेट का फैसला

दंगों के मामलों में लोक अभियोजकों (वकीलों) के पैनल बनाने को लेकर रार बढ़ गई है। उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार के फैसले को खारिज कर दिया और इस संबंध में भेजी उसकी फाइल को राष्ट्रपति के विचारार्थ केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है।

Prateek KumarSun, 25 Jul 2021 06:10 AM (IST)
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल एवं अनिल बैजल।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। राजधानी में गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पिछले साल हुए दंगों के मामलों में लोक अभियोजकों (वकीलों) के पैनल बनाने को लेकर रार बढ़ गई है। उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार के फैसले को खारिज कर दिया और इस संबंध में भेजी उसकी फाइल को राष्ट्रपति के विचारार्थ केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी है। पिछले सप्ताह दिल्ली मंत्रिमंडल ने वकीलों के पैनल पर पुलिस के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और अपने पैनल को सही बताया था। उसके बाद फाइल उपराज्यपाल के पास अनुमति के लिए भेज गई थी।सूत्रों ने बताया कि उपराज्यपाल कार्यालय और दिल्ली सरकार के बीच मत भिन्नता की वजह से मामला राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रखा गया है। इससे संबंधित फाइल शुक्रवार को गृह मंत्रालय को भेज दी गई। उपराज्यपाल कार्यालय ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के बनाए पैनल की सिफारिश की है। इसमें कहा गया है कि गणतंत्र दिवस के दिन हुईं ¨हसक घटनाओं के मामले में 11 और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामलों में तीन अन्य विशेष लोक अभियोजक तत्काल नियुक्त किए जाएं।-

नए कानून बनने के बाद एलजी ने पहली बार राष्ट्रपति का विचार मांगाइस साल अप्रैल में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन (संशोधन) अधिनियम 2021 के प्रभाव में आने के बाद यह पहली बार है, जब उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के साथ मत भिन्नता की वजह से किसी मामले को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजा है। इस कानून के मुताबिक, दिल्ली सरकार को किसी भी निर्णय में उपराज्यपाल की राय लेनी होगी।

एक साल में दूसरी बार टकराव

एक साल में यह दूसरी वकीलों की नियुक्ति के मामले में उपराज्यपाल कार्यालय और दिल्ली सरकार में टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई है। कुछ माह पहले सरकार ने 2020 के दंगों के मामले में पुलिस के वकीलों के पैनल को मानने से इन्कार कर दिया था। उस समय सरकार ने कहा था कि जांच एजेंसी स्वयं अपने वकील नहीं रख सकती है। पुलिस दंगों की जांच कर रही है, इसलिए उनके वकील नहीं होने चाहिए। उस मामले में भी उपराज्यपाल ने असहमति व्यक्त की थी। इसी तरह, अब गणतंत्र दिवस पर हिंसा के मामले में तनातनी हो गई है।

ऐसे बढ़ी तनातनी

कुछ दिन पहले ही गणतंत्र दिवस पर हिंसा मामलों में वकीलों के पैनल पर फैसला लेने के लिए एलजी ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखा था। एलजी ने साफ कहा था कि मामले की जांच पुलिस कर रही है। ऐसे में प्रभावी पैरवी के लिए उसके वकीलों के पैनल को मंजूरी देना ठीक रहेगा। इससे पहले एलजी ने दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ एक आनलाइन बैठक में साफ कर दिया था कि गणतंत्र दिवस पर उपद्रव से संबंधित मामलों के लिए वकीलों के पैनल का वह फिर से गठन करेंगे। वहीं दिल्ली सरकार ने कहा था कि इस मामले में उसका बनाया पैनल ठीक से काम कर रहा है।

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