जानिए यूपी गेट पर किसानों के आंदोलन में कब शामिल हुए थे चौधरी अजित सिंह, कैसे हुआ था स्वागत

चौधरी अजित सिंह को जानने वालों का कहना है कि एक तरह से किसानों का मसीहा अब नहीं रहा।

राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जाट नेता होने के साथ-साथ किसानों के भी हितैषी थे। पश्चिमी यूपी में जाट राजनीति के बूते ही उन्होंने राजनीति की सीढ़ियां चढ़ी और लगातार सात बार सांसद चुने जाते रहे। किसानों के भी हितैषी थे और उनके अधिकारों के लिए हमेशा आवाज उठाते रहते थे।

Vinay Kumar TiwariFri, 07 May 2021 05:12 PM (IST)

नई दिल्ली, गाजियाबाद, [शाहनवाज अली]। राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जाट नेता होने के साथ-साथ किसानों के भी हितैषी थे। पश्चिमी यूपी में जाट राजनीति के बूते ही उन्होंने राजनीति की सीढ़ियां चढ़ी और लगातार सात बार सांसद चुने जाते रहे। वो किसानों के भी हितैषी थे और उनके अधिकारों के लिए हमेशा आवाज उठाते रहते थे। उनकी एक आवाज पर किसान अपनी ट्रैक्टर ट्राली और लाव लश्कर के साथ हजारों की संख्या में पहुंच जाया करते थे। उनके बीच रखा हुक्का जब गुड़गुड़ता हुआ चौधरियों के बीच घूमता उसी में सारी चीजें तय हो जाया करती थीं। वो सभी को साथ लेकर चलने वाले थे।

प्रदेश की राजनीति में जाटों के बूते दबदबा रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह के निधन के साथ जाटों की मजबूत आवाज खामोश हो गई। पश्चिमी यूपी के किसानों की जब भी कोई मांग हुई या उन्होंने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सोचा तो उसका पहला पड़ाव यूपी गेट ही हुआ करता था। कुछ साल पहले तक ये काफी संकरा था मगर एनएचएआइ ने अब इसे 14 लेन का बना दिया है। आज भी किसानों का आंदोलन यहीं से सरकार को अपना संदेश दे रहा है।

साल 2018 में पहुंचे थे चौधरी

छोटे चौधरी एक समय तक राजनीति में काफी सक्रिय थे, वो किसानों के बुलावे पर पहुंच जाया करते थे। साल 2018 में जब किसानों ने आंदोलन किया तो वो यहां यूपी गेट पर भी पहुंचे थे। चौधरी अजित सिंह गाजियाबाद के यूपी गेट पर अक्टूबर 2018 में भारतीय किसान यूनियन के धरना-प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे थे। इसके बाद उनका गाजियाबाद आना नहीं हुआ। उनके निधन से पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों में शोक छाया हुआ है।

राजघाट पर जाने के दौरान यूपी गेट पर रोके गए थे किसान

यूपी-दिल्ली बार्डर पर किसानों को अक्टूबर 2018 में बलपूर्वक रोक दिया गया था। किसान गांधी जयंती पर दिल्ली राजघाट पर धरना देने जा रहे थे। वह किसानों के हित में होने वाले प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। भारतीय किसान यूनियन के मुखिया रहे चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के समय उन्होंने बड़े आंदोलन में वह साथ खड़े रहे।

लोगों ने कंधे पर उठाया फिर हो गए थे बेहोश

चौधरी अजित सिंह किसानों को समर्थन देने के लिए जब यूपी गेट पर पहुंचे, उस समय उनको देखकर किसान इतने अधिक उत्साहित हुए कि उन्होंने चौधरी अजित सिंह को अपने कंधे पर उठा लिया और नारे लगाने लगे। इसी दौरान उनकी तबियत बिगड़ गई और वो बेहोश हो गए, यहां से उनको अस्पताल ले जाया गया, उसके बाद वो दुबारा से यहां नहीं आ पाए।इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चौधरी अजित सिंह को अपने बीच पाकर किसान कितने उत्साहित हुए थे।

पश्चिमी यूपी में जाटों का बोलबाला

रालोद का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, जेपीनगर, रामपुर, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, एटा, मैनपुरी, बरेली, बदायूं, पीलीभीत व शाहजहांपुर में खासा प्रभाव रहा। छोटे चौधरी यानि चौधरी अजित सिंह के निधन की खबर के साथ ही उनके कार्यकर्ताओं व समर्थकों में निराशा के साथ शोक छाया हुआ है। चौधरी अजित सिंह को जानने वालों का कहना है कि एक तरह से किसानों का मसीहा अब नहीं रहा।

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