जानिए एक ऐसे गांव की कहानी जहां बेटी पैदा होने पर लगाया जाता है पौधा, बेटी के साथ पर्यावरण बचाने की पहल

सैंथली गांव में बेटी के नाम का पौधा रोपित करतीं महिलाएं, मां को सम्मानित करतीं अर्निमा त्यागी ’ सौ. स्वयं

मुरादनगर के सैंथली गांव की अर्निमा त्यागी ने पर्यावरण को बचाने की अनोखी पहल शुरू की है। गांव में बेटी पैदा होने पर अर्निमा स्वजन को सम्मानित करने के लिए उनके घर पहुंच जाती हैं। वह ढोल-बाजे बेटी और मां के लिए गिफ्ट लेकर जाती हैं।

Vinay Kumar TiwariThu, 25 Feb 2021 03:10 PM (IST)

हसीन शाह, गाजियाबाद। मुरादनगर के सैंथली गांव की अर्निमा त्यागी ने पर्यावरण को बचाने की अनोखी पहल शुरू की है। गांव में बेटी पैदा होने पर अर्निमा स्वजन को सम्मानित करने के लिए उनके घर पहुंच जाती हैं। वह ढोल-बाजे, बेटी और मां के लिए गिफ्ट लेकर जाती हैं। बेटी के नाम का एक पौधा रोपित कराती हैं। उस पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी स्वजन को सौंपती हैं। अब तक वह 550 से ज्यादा स्वजन को सम्मानित कर पौधे रोपित करवा चुकी हैं। पौधे का नाम बेटी के नाम पर रखा जाता है। अर्निमा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मानित कर चुके हैं। 

अर्निमा त्यागी गांव की प्रधान रह चुकी है। एमएससी करने के बाद अर्निमा ने अपने बच्चों व घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ एक निजी कंपनी में नौकरी करती थीं। अर्निमा ने 2016 में बेटियों के प्रति ग्रामीणों की धारणा बदलने का निर्णय लिया। इस मुहिम को सफल बनाने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। उन्होंने गांव की आंगनबाड़ी महिलाओं के साथ मिलकर अपनी एक टीम तैयार की। उनकी टीम गांव में गर्भवती महिलाओं की सूची बनाकर रखती है। गांव में साढ़े आठ हजार की आबादी है।

बच्चा पैदा होने पर वह फोन कर बेटी व बेटा पैदा होने की जानकारी लेती हैं। बेटी के जन्म लेने की सूचना मिलते ही अर्निमा त्यागी अपनी टीम के साथ जश्न मनाने के लिए निकल जाती हैं। वह पूरे गांव में ढोल व बाजा बजवाते हुए बेटी के घर पहुंचती हैं। ढोल-बाजे के साथ अर्निमा को देख ग्रामीण समझ जाते हैं कि गांव में बेटी ने जन्म लिया है। सभी ग्रामीण इस जश्न में शामिल होते हैं। बेटी के घर ढोल बजाया जाता है। 

ग्रामीण हो रहे जागरूक 

बेटी के पैदा होने पर अर्निमा त्यागी साथ में एक पौधा भी लेकर उनके घर जाती हैं। सरकारी विभाग द्वारा लगाए गए कुछ पौधे देख-रेख की कमी के कारण सूख जाते हैं। अर्निमा ने बताया कि एनसीआर में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। यदि लोगों को जागरूक नहीं किया गया तो आने वाले समय में यहां रहना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने जो पहल शुरू की है, इससे लोग जागरूक हो रहे हैं।

बेटियों की शिक्षा और रोजगार को दिया बढ़ावा 

बेटियों की शिक्षा के लिए अर्निमा ने गांव के शिक्षित लोगों का सहयोग लिया। वह शिक्षित लोगों से बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा दिलाती हैं। गांव की सभी बेटियां पढ़ रही हैं। ग्रामीण स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। वह बेटियों को रोजगार के लिए भी प्रशिक्षित करती हैं। बेटियों को निश्शुल्क कपड़ों की सिलाई की ट्रेनिंग दिलाती हैं। पिछले पांच साल में ग्रामीणों ने करीब 15 बेटियों को गोद लिया है। 

हमारे घर में बेटी ने जन्म लिया तो अर्निमा त्यागी पौधा लेकर आई थीं। उन्होंने मुङो और मेरे पति को सम्मानित किया। बेटी के नाम का पौधा लगवाया। अब हम पौधे की देखरेख करते हैं। इससे ग्रामीण प्रदूषण के प्रति जागरूक हो रहे हैं। (नगमा सराफत, सैंथली)

अर्निमा त्यागी की पहल से प्रदूषण के प्रति समाज बदल रहा है। बेटियां बचाने के साथ लोग पर्यावरण को बचाने की तरफ बढ़ रहे हैं। हमसे भी उन्होंने पौधा लगवाया था। (मोनिका, सैंथली)

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